
आइए जानते हैं कि दूध के दांतों से बनी स्टेम सेल से कैसे भविष्य में होने वाली बीमारियों का इलाज किया जा सकता है।
भविष्य में स्टेम सेल थैरेपी से बीमारियों के इलाज के लिए दूध के दांत सुरक्षित रखे जा सकते हैं। दूध के दांत बच्चे का बायो इंश्योरेंस हैं। आइए जानते हैं कि दूध के दांतों से बनी स्टेम सेल से कैसे भविष्य में होने वाली बीमारियों का इलाज किया जा सकता है।
दांतों के स्टेम सेल से बनें अंग
ऑडोन्टोब्लास्ट : दंतधातु का निर्माण
म्योकाइट्स : मांसपेशियों की मरम्मत
कॉन्ड्रोकाइट्स : जोड़ों के कार्टिलेज
कार्डियो म्योकाइट्स : दिल के क्षतिग्रस्त ऊत्तकों की रिपेयरिंग
न्यूरोनल : दिमाग के ऊत्तक
ऑस्टियोकाइट्स : हड्डियां
एडिपोकाइट्स : वसा
स्टेम सेल थैरेपी से अब तक आंखों में कॉर्निया प्रत्यारोपण और ह्रदयाघात के कारण क्षतिग्रस्त मांसपेशियों का इलाज, मधुमेह, ऑटिज्म और नॉन हीलिंग अल्सर का उपचार किया गया है। अमेरिका में दो लोगों को स्टेम सेल की मदद से एड्स से पूरी तरह छुटकारा मिला।
गर्भनाल से अलग
विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भनाल की स्टेम कोशिकाओं से खून बनाया जा सकता है और दांत के सेल्स (डेंटल पल्प स्टेम सेल्स) से ऊत्तक बनाए जा सकते हैं। इसलिए दोनों अलग हैं।
दंत कोशिकाएं यह भी करेंगी
दांत से बनी स्टेम कोशिकाएं आंखों के कॉर्निया, मस्तिष्क रोग, मधुमेह, नए बाल उगाना, गुर्दे और लिवर की बीमारियां,पार्किंसन,मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी और रीढ़ की हड्डी में तकलीफ ठीक कर सकती हैं।
30 की उम्र तक स्टोर करें
स्टेम सेल बैंकिंग में दांतों के पास के मांसल हिस्से से स्टेम सेल लिया जाता है। दांतों से स्टेम कोशिका बच्चों के साथ बड़ों की भी 30 साल की उम्र तक सुरक्षित रखी जा सकती है। उम्र बढ़ने के साथ स्टेम सेल्स की संख्या भी कम होती जाती है। फिलहाल डेंटल सेल्स से उसी व्यक्ति का इलाज हो सकता है, जिसका दूध का दांत प्रिजर्व किया गया है। वैज्ञानिक आने वाले समय में सैकंड डिग्री ब्लड रिलेटिव जैसे भाई, बहन, मां और पिता के इलाज की संभावना भी देख रहे हैं।
भविष्य की तैयारी
क्रायोजेनिक टैंक में माइनस 156 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान में दांत रखे जाते हैं। इससे किसी भी भाग के ऊत्तक बन सकते हैं।
Published on:
23 Oct 2018 05:05 pm
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