
आयुर्वेद चिकित्सा में भी इसे बाहरी घाव व पस को भरने और जोड़ों में दर्द की समस्या में राहत पाने के लिए प्रयोग किया जाता है।
कई रोगों के इलाज के लिए पान के पत्तों को काफी समय से इस्तेमाल में लिया जा रहा है। आयुर्वेद चिकित्सा में भी इसे बाहरी घाव व पस को भरने और जोड़ों में दर्द की समस्या में राहत पाने के लिए प्रयोग किया जाता है।
सूजन करे दूर : गठिया या जोड़ों में सूजन की दिक्कत होने पर पान के पत्तों को बाहरी रूप से लगाएं। अरंडी के तेल को फोड़े पर लगाकर हल्के गर्म पान के पत्तों को उस जगह पर रखने से पस बाहर निकल आता है।
कमर दर्द में राहत : पान के पत्तों को गर्म कर पीसकर या उसके रस के साथ नारियल या अन्य तेल को मिलाकर कमर पर लगाना फायदेमंद होता है।
सांस लेने में तकलीफ : सरसों के तेल में भीगे व गर्म किए हुए पान के दो पत्तों को 10 मिनट के लिए सीने पर रखें। खांसी व सांस से जुड़ी दिक्कतों में लाभ होगा।
सिरदर्द में आराम : पत्तों की तासीर ठंडी होने के कारण यह दिमाग की गर्मी शांत करते हैं जिससे सिरदर्द में भी लाभ होता है।
Published on:
11 Jun 2019 04:26 pm
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