
हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायरायडिज्म दो तरह की थायरॉयड की बीमारी होती हैं। हाइपोथायरायडिज्म में थायरॉक्सिन हार्मोन कम स्रावित होता है और हाइपरथायरायडिज्म में थायरॉक्सिन ज्यादा स्रावित होने लगता है। दोनों में ही लक्षण एक से होते हैं लेकिन केवल वजन में अंतर होता है। हाइपो में वजन बढ़ता जाता है और हाइपर में वजन घटने लगता है। दोनों ही स्थितियों में दवा लेना जरूरी होता है। लेकिन दवा सही तरीके और समय पर न ली जाए तो इसका फायदा भी नहीं होता है। ऐसे में जरूरी है कि आप थायरॉयड की दवा लेने का सही समय, तरीका और डाइट के बारे में पूरी जानकारी रखें।
थॉयराक्सिन शरीर की कार्यप्रणाली को सुचारू रूप से चलाने के लिए बेहद जरूरी है। तितली के आकार की यह ग्रंथि गर्दन के अंदर और कोलरबोन के ठीक ऊपर होती है। ये हार्मोन मेटाबॉलिज्म को रेग्युलेट करता है और हृदय गति, श्वास, शरीर के वजन, मांसपेशियों की ताकत और अन्य सहित विभिन्न शारीरिक कार्यों को भी नियंत्रित करता है। ऐसे में अगर यह सही तरह से काम ना करे तो इस ग्रंथि को रेग्युलेट करने के लिए दवाईयों का सेवन करने की जरूरत होती है।
थॉयराइड के लक्षण
थायरॉइड दवाएं लेने का सही समय है?
थायरॉइड दवाई हमेशा सुबह लेनी चाहिए, वह भी खाली पेट। अगर खाने के बाद या साथ इसे लिया जाए तो ये सही तरीके से अवशोषित नहीं होती है। इससे दवा का असर नहीं होगा। जिन लोगों को सुबह खाली पेट थायरोक्सिन की खुराक लेने पर दिल की धड़कन बढ़ने की समस्या हो उन्हें दवा को आधी गोली खाने के आधे घंटे के बाद दूसरी आधी गोली खानी चाहिए। अगर कोई दवा लेने से चूक जाता है, तो इसे कुछ भी खाने के करीब 2-2:30 घंटे बाद इसे ले सकता है।
थायरॉइड की दवा लेते समय न करें ये भूल
डिस्क्लेमर- आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए दिए गए हैं और इसे आजमाने से पहले किसी पेशेवर चिकित्सक सलाह जरूर लें। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने, एक्सरसाइज करने या डाइट में बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
Updated on:
01 Apr 2022 10:14 am
Published on:
01 Apr 2022 09:16 am
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