
पित्त की थैली यानी गॉल ब्लैडर, शरीर का एक छोटा-सा अंग है जो लिवर के ठीक पीछे होता है। इसका कार्य पित्त को संग्रहित करना और भोजन के बाद पित्त नली के माध्यम से छोटी आंत में पित्त का स्त्राव करना है। कभी-कभी पित्ताशय में कोलेस्ट्रॉल, बिलरुबिन और पित्त लवणों के जमने से वहां पथरी बन जाती है। कोलेस्ट्रॉल 80 फीसदी पथरी का कारण है। कई बार यह कैंसर में भी बदल जाता है।
संभावित कारण
इसके 80 से 90% मामलों में गॉल
ब्लैडर में पथरी होना कारण होता है। साथ ही जल प्रदूषण (भारी धातु जैसे- क्यूप्रस, प्लमबम, निकल, कैडमियम एवं सीएचआर), धूम्रपान और तम्बाकू की आदत, पेस्टिसाइड्स जैसे डीडीटी और ओपीसी, कोई दवा, गर्भनिरोधक दवाइयां और टाइफाइड इंफेक्शन से भी इसकी आशंका रहती है।
प्रमुख लक्षण
इसके प्रमुख लक्षणों में पेटदर्द, उल्टी, खाने के बाद पेट में भारीपन, भूख में कमी, पेट फूलना, कमर अथवा कंधों में दर्द एवं पीलिया बनना आदि शामिल हैं। इसके साथ ही इसमें सूजन एवं मवाद पडऩे से बुखार भी आ सकता है।
80% मरीजों में गॉल ब्लैडर कैंसर का पता आखिरी अवस्था में लगता है। ज्यादातर मरीजों में कोई विशेष लक्षण नहीं होते हैं। पीलिया एवं दर्द भी आखिरी अवस्था में ही प्रकट होते हैं। इसमें कीमोथैरेपी भी प्रभावी नहीं है। शुरुआत में ऑपरेशन से पूर्ण निदान संभव है।
पथरी का इलाज समय पर
पथरी लंबे समय तक होने से सूजन आने लगती है। बड़े आकार की पथरी से खतरा ज्यादा बढ़ जाता है, लेकिन छोटे आकार की पथरी भी समस्याएं पैदा कर सकती है। ये पेन्क्रिएटाइटिस और पीलिया जैसी गंभीर बीमारी बना सकती है। इसलिए समय से इलाज लें।
इन बातों का रखें ध्यान
गॉल ब्लैडर पथरी वाले मरीज को सर्जन की सलाह लेकर समय-समय पर सोनोग्राफी करवाते रहना चाहिए। इसके साथ ही वैसे कारणों से दूर रहें जिनसे पथरी बन रही है। इसमें खानपान का ध्यान रखें। विटामिन सी से भरपूर चीजें अधिक मात्रा में लें। इनसे पथरी बनने की समस्या दूर होती है।
Updated on:
07 Aug 2023 07:12 pm
Published on:
07 Aug 2023 07:08 pm
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