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सूर्य नमस्कार को बनाएं आदत, सेहत को होगा फायदा

इसे रुटीन में शामिल करके एक स्वस्थ्य के लिए अच्छी आदत बनाएं। योग विशेषज्ञ बता रहे हैं इसके बारे में...

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जयपुर

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Vikas Gupta

Apr 24, 2019

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इसे रुटीन में शामिल करके एक स्वस्थ्य के लिए अच्छी आदत बनाएं। योग विशेषज्ञ बता रहे हैं इसके बारे में...

सूर्य नमस्कार सांस लेने की प्रक्रिया नियंत्रित कर मांसपेशियां लचीली व मजबूत बनाता है। इसे रुटीन में शामिल करके एक स्वस्थ्य के लिए अच्छी आदत बनाएं। योग विशेषज्ञ बता रहे हैं इसके बारे में...

सूर्य नमस्कार में आसन की 12 मुद्राएं हैं। इसे करने से पूरे शरीर की कसरत एकसाथ हो जाती है। यह सुबह या शाम किसी भी वक्त किया जा सकता है, लेकिन सुबह खाली पेट करना अधिक फायदेमंद रहता है। इसे रोजाना 15-20 मिनट करने से वजन कम होने के साथ पेट, सांस, हड्डियों, जोड़ों व हृदय आदि से संबंधित कई बीमारियां दूर होती हैं।

समय निकालें -
योग-प्राणायाम के लिए 15 से 20 मिनट निकालना आपको सेहत की कई परेशानियों से दूर रख सकता है। भागदौड़ वाली लाइफस्टाइल के साथ भी व्यक्ति सुबह-शाम 20 मिनट तक सूर्य नमस्कार, प्राणायाम व योग कर सकता है।

हर आयुवर्ग के लिए -
यह हर आयुवर्ग के लिए फायदेमंद है लेकिन इसके लाभ शारीरिक संरचना, क्षमता, उम्र व करने के तरीके पर निर्भर करते हैं। इसे एक आदत बनाकर कई बीमारियों से मुक्ति पाई जा सकती है।

मिलेगा विटामिन-डी -
सुबह-सुबह सूर्य नमस्कार करने से हड्डियों को सूर्य की किरणों से विटामिन-डी मिलता है जिससे वे मजबूत बनती हैं। यह पाचन, श्वसन, प्रजनन, तंत्रिका और अन्त:स्त्रावी ग्रंथि को संतुलित करता है और मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह को बढ़ाता है। साथ ही बालों का झड़ना व सफेद होना कम होता है।

बीमारियां रहती हैं दूर -
योग, सूर्य नमस्कार व मेडिटेशन से व्यक्ति शारीरिक व मानसिक रूप से मजबूत बनता है। इससे लो-ब्लड प्रेशर, हृदय संबंधी रोग, चिंता, तनाव व अवसाद जैसी समस्याएं तो दूर होती ही हैं। साथ ही चिकित्सा संबंधी खर्चों में भी कमी आती है। यह दावा अमरीका के मैसाच्यूसेट्स हॉस्पिटल के बेन्सन हेनरी इंस्टीट्यूट ने किया है।

हर मुद्रा के अलग लाभ -
प्रणामासन : एकाग्रता, मानसिक शांति के साथ चेहरे पर चमक।
हस्तउतानासन : पाचनतंत्र, हाथ, कंधे, गर्दन, कमर, रीढ़ की हड्डी की मजबूती व मोटापा घटाने के लिए।
पादहस्तासन : पेट की चर्बी, कब्ज-गैस, रीढ़ की हड्डी व पिंडलियों के लिए।
अश्वसंचालनासन : पैरों के स्नायु, तंत्रिका प्रणाली संतुलित होती है। कमर के निचले हिस्से व हाथ को मजबूत बनाता है।
पर्वतासन : यह हाथ-पैर व स्नायु को मजबूती देता है। इसे करने से लंबाई बढ़ती है।
अष्टांग नमस्कार : हाथ-पैर तथा वक्ष प्रदेश के स्नायु को मजबूती मिलती है।
भुजंगासन : कमरदर्द, सर्वाइकल, रीढ़ की हड्डी, स्लिप ***** के रोगियों के लिए ।
इसके बाद पर्वतासन, अश्वसंचालानासन, पादहस्तासन, हस्तउत्तानासन, प्रणामासन की पुनरावृत्ति होती है।

इलाज का खर्च 43% घटेगा -
बेन्सन हेनरी इंस्टीट्यूट ने शोध में कुछ मरीजों को नियमित योग, सूर्य नमस्कार व मेडिटेशन कराया। इन मरीजों की तुलना समान रोग वाले १३ हजार मरीजों से की, जो योग नहीं करते थे। अध्ययन में पाया कि योग करने वाले मरीज डॉक्टर के पास कम गए। उनके स्वास्थ्य पर होने वाले खर्चे में 43 फीसदी की कमी आई।

ये लोग न करें -
जिन्हें घुटने, माइग्रेन, मिर्गी, चक्कर आदि की समस्या है या तुरंत ऑपरेशन हुआ है वे लोग सूर्य नमस्कार न करें। बुखार या जोड़ों में सूजन होने पर यह परेशानी बढ़ा सकता है। महिलाओं को मासिक धर्म के समय, गर्भावस्था के 4 महीने के बाद व डिलीवरी के 3 महीने तक इसे करने से बचना चाहिए।