
60 की उम्र से पहले सुनने में आए परेशानी, ताे रखें ये सावधानी
उम्र बढ़ने के साथ सुनने की क्षमता में कमी आना स्वभाविक है। लेकिन कुछ मामलों में कान में तरह-तरह की आवाजें आना जिसे टिनीटस भी कहते हैं, के कारण भी कम सुनाई देता है। मेडिकली इसे प्रेसबायक्युसिस कहते हैं। ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं है। कुछ बातों को ध्यान में रखकर सुनने की क्षमता में सुधार किया जा सकता है।
कान की अंदरूनी सतह कमजोर हाेना बनती है वजह
60 - 65 वर्ष की उम्र के बाद सुनने में कमी आम है। सामान्य रूप से कान की आंतरिक सतह पर पड़ने वाली आवाज विद्युत तरंग बनकर दिमाग तक जाती है और दिमाग तुरंत उसे समझने का संदेश देता है। लेकिन उम्र बढ़ने के दौरान कान की आंतरिक सतह कमजोर होने से कोशिकाओं का काम धीमा हो जाता है। इसके अलावा डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर के रोगी या जिनका कान आकार में बड़ा या कान में कोई विकृति हो उनमें सुनने की क्षमता साठ वर्ष की उम्र से पहले भी प्रभावित होने लगती है।
जांच : ऑडियोमेट्री से पता लगाते गंंभीरता : ऑडियोमेट्री जांच से पता करते हैं कि कान में किस कारण और कितनी क्षति हुई है। कान को नुकसान पहुंचने के दो कारण हो सकते हैं। पहला, कान के पर्दे में छेद होना और दूसरा, पर्दा ठीक होने के बावजूद आंतरिक कान में खराबी होना।
इलाज व सावधानी
मरीज को ऐसी दवाएं देते हैं जो आंतरिक कान की नसों को सक्रिय करती हैं। बिल्कुल सुनाई न देने की स्थिति में हियरिंग एड लगाते हैं। सावधानी के तौर पर विशेषज्ञ तेज आवाज वाले माहौल से दूर रहने और समय-समय पर ब्लड प्रेशर व ब्लड शुगर जैसी जांचें कराने की सलाह देते हैं। इसके अलावा शोरगुल वालो स्थानों पर जानें से बचें।
Published on:
30 Jun 2019 06:24 pm
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