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जब सहा ना जाए दर्द

दर्द में कई और शारीरिक लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं जैसे उल्टी होना, चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना, उनींदा महसूस होना।

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जब सहा ना जाए दर्द

जब सहा ना जाए दर्द

अधिकतर दर्द बहुत सारी स्थितयों का ***** होता है कि अंदर कोई परेशानी है। ये शारीरिक या मानसिक या दोनों हो सकती हैं। संक्रमण, चोट, रिएक्शन, सूजन, जलन अगर अनियंत्रित होगी तो दर्द होगा। दर्द में कई और शारीरिक लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं जैसे उल्टी होना, चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना, उनींदा महसूस होना। इसके कुछ भावनात्मक प्रभाव भी दिखाई दे सकते हैं जैसे क्रोध, अवसाद, मूड बदलना या चिड़चिड़ापन।

दर्द का अहसास
मानव शरीर में नसें इलेक्ट्रिक वायर की तरह आपस में जुड़ी होती हैं, जो किसी भी हिस्से में दर्द या फिर चोट का संदेश तुरंत मस्तिष्क तक पहुंचाती हैं। शरीर के सभी हिस्सों में फैली इन नसों के क्षतिग्रस्त होने, रक्त का संचरण बाधित होने या फिर नस के फटने के कारण दर्द होता है।


अधिकतर दर्द उत्तकों के नष्ट होने से होते हैं। यह आपको दर्द, टीस या धुकधुक के रूप में महसूस होते हैं। शारीरिक उत्तकों को चोट किसी बीमारी जैसे कैंसर या यह किसी शारीरिक चोट जैसे कटना या हड्डी टूटने के कारण हो सकती है। दर्द का अनुभव अलग-अलग व्यक्तियों में अलग-अलग हो सकता है।

दर्द कैसे-कैसे

दिल की धमनियों का दर्द
दिल की धमनियों के दर्द को पेरिफेरल वास्कुलर डिजीज (पीवीडी) कहा जाता है। हृदय से जुडऩे वाले शरीर के आंतरिक अंग और मस्तिष्क को खून पहुंचाने वाली धमनियों में खून का संचरण बाधित होने से भी दर्द होता है।


मांसपेशीय दर्द
मांसपेशीय दर्द सामान्य है और इसमें एक या एक से अधिक मांसपेशियां सम्मिलित होती हैं। मांसपेशीय दर्द में लिगामेंट्स, टेंडन्स और मांसपेशियों तथा अंगों को जोडऩे वाले मुलायम उत्तक फैसिया भी शामिल हो सकते हैं।


साइकोजेनिक पेन
कुछ मानसिक बीमारियों में लोग ठीक तरह से नहीं खाते और पूरी नींद नहीं ले पाते हैं, जिससे शरीर के किसी हिस्से में दर्द हो सकता है।


रेफर्ड पेन
इसे रिफलेक्टिव पेन के नाम से भी जाना जाता है। जब दर्द चोट वाली जगह के पास या चोट वाली जगह से दूर होता है इसे रेफर्ड पेन कहा जाता है। उदाहरण के लिए, जब एक व्यक्ति को हार्ट अटैक होता है, यहां प्रभावित क्षेत्र हृदय है, लेकिन कई बार दर्द छाती के बजाए कंधों के आसपास और गर्दन में होता है।


टेल बोन पेन
मेरूदंड के निचले हिस्से में होने वाले दर्द को टेल बोन पेन कहते हैं। शारीरिक रूप से कमजोर लोगों में यह दर्द अधिक देखा जाता है। कई बार एक ही जगह बैठे रहने पर भी टेल बोन की समस्या देखी गई।


सिरदर्द
सिरदर्द की उत्पत्ति के वास्तविक कारणों का पता नहीं चला है, फिर भी तनाव, अवसाद, अल्कोहल का अधिक सेवन, कब्ज, थकान, शोरगुल या तंत्रिका तंत्र की गड़बड़ी, ब्रेन टयूमर आदि के कारण हो सकता है।

छाती में दर्द
छाती में दर्द की बात सुनते ही हर किसी के मन में सबसे पहले हार्ट अटैक का ख्याल आता है। लेकिन यह जानना भी जरूरी है कि हृदय संबंधी समस्याओं के अलावा इसके कुछ और संभावित कारण भी हो सकते हैं। यह आपके फेफड़ों, इसोफैगस, मांसपेशियों, पसलियों या तंत्रिकाओं की किसी समस्या के कारण भी हो सकता है।

कमर दर्द
हमारी रीढ़ की हड्डी में 32 कोशिकाएं होती हैं जिसमें से 22 गति करती हैं। जब इनकी गति अपर्याप्त होती है या ठीक नहीं होती तो कई समस्याएं हो जाती हैं। हमारी कमर की बनावट में कार्टिलेज, जोड़, मांसपेशियां, लिगामेंट आदि शामिल होते हैं। इसमें किसी के भी विकारग्रस्त होने से कमर दर्द हो सकता है।

साइकोसोमैटिक पेन
कई बार हमें कोई शारीरिक समस्या नहीं होती तब भी शरीर के किसी हिस्से में दर्द होने लगता है,इसे साइकोसोमैटिक पेन कहते हैं। यह शब्दावली उन दर्दों के लिए होती है जिनमें मन की परेशानी शारीरिक रूप से प्रदर्शित होती है।

न्यूरोपैथिक पेन
यह दर्द तंत्रिकाओं के नष्ट होने से होता है। तंत्रिकाएं किसी बीमारी जैसे डायबिटीज, स्ट्रोक या एचआईवी के संंक्रमण से नष्ट हो सकती हैं।

दर्द का उपचार
दर्द के कारण का पता लगाकर ही उसका उपचार किया जाता है। जैसे संक्रमण है तो एंटीबॉयोटिक्स लेने से दर्द चला जाता है। चोट लगी है तो पेन किलर खाने से आराम मिलता है। साइकोसोमैटिक पेन को मनोचिकित्सकीय तरीके से ठीक करने का प्रयास किया जाता है। शरीर की अंदरूनी समस्याओं के कारण उपजे दर्द का पता लगाने के लिए टेस्ट, एक्स रे, सोनोग्राफी आदि का सहारा लिया जाता है, उसी के अनुसार उपचार सुझाया जाता है।

माइक्रो एंडोस्कोपी स्पाइन सर्जरी (एमईएस) ने कमर दर्द और गर्दन के दर्द के उपचार को बेहतर और आसान बना दिया है, इसमें आधे घंटे से भी कम समय लगता है। इस सर्जरी में पारंपरिक सर्जरी की तुलना में परेशानियां कम होती है और अस्पताल में ज्यादा रहने की जरूरत भी नहीं पड़ती।