
उन्होंने कहा कि मनुष्य मोह माया के पीछे भागते हुए रुपया एकत्र करने में लगा रहता है। रुपया आते ही भाई-भाई आपस में लड़ते हैं। परमात्मा ने जरुरत के अनुसार पानी, प्रकाश, पृथ्वी को उपलब्ध कराया है लेकिन आज हम सभी प्रकृति के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि ग्लोबल वार्मिंग का मुख्य कारण टूटती कुटुम्ब व्यवस्था तथा आवश्यकताओं का बढऩा है जिसका सीधा प्रभाव पर्यावरण पर पड़ रहा है।

एकता व भाईचारा कथा का उद्देश्यकथा के प्रांरभ में सांसद हर्षवद्र्धनसिंह ने भाईश्री का स्वागत करते हुए परिचय दिया। उन्होंने पर्यावरण के लिए पौधारोपण तथा जीवन के लिए जल संचय का आह्वान करते हुए कहा कि पर्यावरण प्रदूषण प्राणी मात्र के लिए खतरा है। सिंह ने कहा कि कथा का उद्देश्य अनेकता में एकता तथा सर्व समाज में भाईचारा है। गायत्री परिवार के भूपेन्द्र पण्ड्या ने तपते सूर्य के बीच भागवत मर्मज्ञ रमेशभाई ओझा के आगमन को वागड़वासियों के लिए श्रेष्ठ बताते हुए श्रद्धालुओं से सत्संग के प्रसाद का रसास्वादन करने का आह्वान किया।

इंसान भूमि का वरदान, नहीं बने अभिशापउन्होंने बताया कि आज हम सभी मिलकर प्रकृति का दोहन नहीं शोषण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संत किसी एक समाज या वर्ग का नहीं होता, वर्तमान में राजनीतिक दांव पेंच के कारण ही जाति व कौम के कारण ही अशान्ति फैल रही है। उन्होंने इंसान को भूमि का वरदान बताते हुए कहा कि उसे अभिशाप नहीं बनना चाहिए।

भागवत मर्मज्ञ रमेश भाई ओझा ने कहा कि श्रद्धालुओं की श्रद्धा, भक्ति, परमार्थ एवं इच्छा को लेकर वागड़ की धरा पर आराधना महोत्सव का आयोजन हुआ है जिसमें सभी कौम एवं जातियों के लोग भागवत से जुड़े हैं, इससे वागड़ में सर्व सम्प्रदाय समभाव की दृष्टि दिखाई देती है। ओझा मंगलवार से राजकीय महाविद्यालय के खेल मैदान में मंगलवार से शुरू हुए आठ दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा प्रेम यज्ञ में प्रवचन दे रहे थे।