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डूंगरपुर

बीएपी में टिकट तय होने के साथ ही असंतोष के स्वर मुखर

बीएपी जिलाध्यक्ष ने समर्थकों के साथ दिया अल्टीमेटम, केंद्रीय एकीकरण कमेटी का फैसला बताया गलत

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डूंगरपुर. भारतीय ट्राइबल पार्टी से अलग हुए आदिवासी नेताओं की ओर से बनाई गई भारत आदिवासी पार्टी बीएपी में टिकट वितरण के साथ ही असंतोष के स्वर मुखर हो गए हैं। रविवार को प्रत्याशियों की घोषणा में चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पार्टी के बीएपी जिलाध्यक्ष अनुतोष रोत ने ब्लॉक अध्यक्षों, पार्टी के पदाधिकारियों, पार्षदों की मौजूदगी में पत्रकार वार्ता कर पार्टी को दो दिन में डूंगरपुर सीट पर अपना फैसला बदलने का अल्टीमेटम दिया है।

रोत ने पत्रकार वार्ता में कहा कि भारतीय आदिवासी पार्टी के गठन के साथ गांव-गांव में छह माह में हुई बैठक तय हुआ था कि प्रत्याशियों का चयन सलेक्शन प्रणाली से होगा। इसमें हर गांव के पांच-पांच पदाधिकारी शामिल होंगे। ब्लॉक अध्यक्ष आदि पार्टी के पदाधिकारी चयन करेंगे। लेकिन, पार्टी की केंद्रीय एकीकरण कमेटी ने संविधान को ताक में रखकर डूंगरपुर विधानसभा के लिए उम्मीदवार बनाया है। हमने पार्टी आलाकमान को दो दिन का समय दिया है यदि वह जनभावनाओं एवं पार्टी के पदाधिकारियों की मंशा के अनुरुप अपना फैसला नहीं बदलती है, तो जल्द ही ठोस निर्णय लिया जाएगा।

 

इनका कहना है

हमने कोई जिलाध्यक्ष ही नहीं बनाया है। चयन विधि सम्मत हुआ है। हमने आम राय लेकर ही उम्मीदवार बनाए हैं। विरोध कर सकते हैं। यदि वे भविष्य में चुनाव भी लड़ते हैं, तो वह स्वैच्छिक होगा। – मोहनलाल रोत, राष्ट्रीय अध्यक्ष, बीएपी