
अनूठी नजीर: दूध बेचकर जोड़ी पाई-पाई गांव के बच्चों की पढ़ाई में लगाई
मिलन शर्मा @ डूंगरपुर. बुढ़ापे में जब शरीर साथ नहीं देता है तब रुपए और रिश्तेदार ही साथ देते हैं। पर, डूंगरपुर जिले के दोवड़ा ब्लॉक अंतर्गत धाणी घटाऊ गांव के 65 वर्षीय मादू (मादाजी) रेबारी ने जीवन भर हाड़-तोड़ मेहनत कर कमाई सारी पूंजी शिक्षा के लिए दान देकर समाज और देश के लिए अनूठी नजीर पेश की है। निर्धनतम तबके के मादाजी ने दूध बेच-बेच कर एकत्रित की तीन लाख रुपए की राशि गांव के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में हॉल निर्माण के लिए दान कर दी है। मादू रेबारी चाहते है कि प्रकृति ने भले ही उनको संतान सुख से वंचित रखा। लेकिन, गांव के बच्चे भी उनके ही बच्चों के समान है। ये अच्छी शिक्षा अर्जित कर गांव का नाम रोशन करें। निर्धन मादू रेबारी की शिक्षा रुपी महायज्ञ में दी गई यह अनूठी आहुति अन्य भामाशाहों के लिए आदर्श उदाहरण बन कर उभरा है। इससे अन्य भामाशाह भी विद्यालय से जुड़े हैं।
आह्वान किया.. नहीं लगाई देर
विद्यालय की समस्या को देखते हुए संस्थाप्रधान महेश व्यास ने गांव के भामाशाहों को प्रेरित करने के लिए सर्वप्रथम विद्यालय में सरस्वती मंदिर निर्माण की योजना बनाई और गांव वालों से 35 हजार रुपए का सहयोग लेते मंदिर बनवाया। कार्यक्रम में गांव वालों को आह्वान किया। इस पर गांव वालों ने प्रति घर पांच-पांच सौ रुपए जुटा कर ढाई लाख रुपए एकत्रित कर विद्यालय में हॉल निर्माण की नींव रखी। इसके बाद आरसीसी पिल्लर आदि खड़े हो गए। लेकिन, निर्माण कार्य अधूरा था। इस पर व्यास ने शिक्षक दिनेश बरण्ड़ा को साथ लेकर दूध विके्रता मादू रेबारी के पास झौली फैलाई। इस पर उन्होंने कहा कि गांव के बच्चे ही मेरा सहारा है और तुरंत ही तीन लाख रुपए का चैक सौंप दिया। इससे एक बार फिर हॉल निर्माण के कार्य ने गति पकड़ ली है और जल्द ही हॉल बनकर तैयार होगा।
सर्दी, गर्मी और वर्षा में खुला आसमां ही सहारा...
गांव के राउप्रावि में कक्षा एक से आठ में 115 का नामांकन है। लेकिन, कक्ष केवल चार है। इसमें एक कक्ष संस्थाप्रधान मय स्टॉफ के लिए तथा एक कक्ष भण्डार गृ़ह के लिए है। शेष दो कक्षों में आठ कक्षाओं को बैठाना मुश्किल है। ऐसे में सर्दी, गर्मी, वर्षा आदि में कई बार बच्चों को शामिल बैठाकर अध्ययन करने की मजबूरी है, तो कई बार खुला आसमान ही सहारा है।
कोरोना काल भी बना ग्रहण
वर्ष 2019-20 में गांव वालों ने ढाई लाख रुपए एकत्रित कर विद्यालय में 30 गुणा 40 के हॉल निर्माण की योजना बनाई। लेकिन, यह राशि काफी कम थी। इस पर प्रदेश सरकार ने बजट स्वीकृत किया। लेकिन, इस बीच कोरोना काल आ गया। ऐसे में बजट वापस चला गया। इसके बाद से कार्य अवरुद्ध पड़ा था। लेकिन, मादू रेबारी के सहयोग के बाद से एक बार फिर कार्य ने गति पकड़ी है।
अन्य भामाशाह भी हुए प्रेरित
1.50 लाख रुपए लक्ष्मण रेबारी
1.50 लाख रुपए सरपंच रेखा कलासुआ एवं शंकरलाल कलाल
51 हजार रुपए विमलप्रकाश ननोमा
35 हजार रुपए लक्ष्मण रेबारी
16,151 रुपए मुकेश हिरासी
Published on:
16 Feb 2023 10:38 am
बड़ी खबरें
View Allडूंगरपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
