
सरकार ने अक्टूबर तक बढ़ाई कस्टम मिलिंग की मियाद
किसानों से समर्थन मूल्य पर उपार्जित धान को प्रदेश सरकार राइस मिलर्स के माध्यम से कस्टम मिलिंग कराती है। कस्टम मिलिंग के माध्यम से धान को चावल में तब्दील कर सार्वजनिक वितरण प्रणाली और शासकीय योजनाओं में हितग्राहियों को वितरण के लिए उपयोग किया जाता है। मिलर्स को धान की मिलिंग कर तय मियाद में सरकारी गोदामों में जमा कराना होता है। राज्य शासन ने इसके लिए पूर्व में 30 सितंबर तक मियाद तय की थी। इसी के अनुरूप जिला प्रशासन द्वारा अब तक चावल जमा नहीं कराने वालों के खिलाफ सख्ती शुरू की गई थी।
4.61 लाख एमटी चावल कराना है जमा
सरकारी खरीद से उठाए गए धान के एवज में मिलर्स को 4 लाख 61 हजार 280 मिट्रिक टन चावल जमा कराना है, लेकिन अब तक केवल 4 लाख 5 हजार मिटरिक टन चावल ही जमा कराया जा सका है। मिलर्स ने अब भी 55 हजार मिटरिक टन चावल जमा कराया जाना है।
16 को थमाया जा चुका है नोटिस
जिले में कस्टम मिलिंग के लिए 134 राइस मिलर्स ने धान का उठाव किया है। इनमें से समयबद्ध चावल जमा नहीं कराए जाने पर पिछले दिनों जिला प्रशासन ने 16 मिलर्स को नोटिस दिया था। इन्हें 30 सितंबर तक चावल जमा नहीं कराने पर स्टॉक सीज की चेतावनी दी गई है। अब मियाद बढ़ गई है, ऐसे में इन मिलर्स को फिर समय मिल गया है।
17 मिलर्स के स्टॉक में मिली थी गड़बड़ी
इससे पहले कस्टम मिलिंग का चावल जमा कराने में लेटलतीफी को देखते हुए खाद्य विभाग ने राइस मिलों में आकस्मिक जांच की थी। जांच में 17 मिलों में 1 लाख 11 हजार 833 क्विंटल चावल कम पाया गया था। मामले के खुलासे के बाद मिलर्स के खिलाफ कस्टम मिलिंग चावल उपार्जन आदेश के तहत प्रकरण भी दर्ज किया गया है।
चावल सस्ता इसलिए जमा होने के आसार
अफसरों की माने तो सरकार द्वारा तय नई तिथि तक सभी बचे हुए मिलर्स द्वारा चावल जमा करा दिए जाने की संभावना है। दरअसल एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध और नई फसल की बंपर आवक की तैयारी के मद्देनजर इस समय बाजार में चावल सस्ता है। ऐसे में मिलर्स के पास बाहर कमाई का अवसर नहीं के बराबर है। ऐसे में चावल जमा कराने में प्राथमिकता दिखाई जा सकती है।
Published on:
26 Sept 2022 08:06 pm
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