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छत्तीसगढ़ में है एशिया का सबसे बड़ा आर्गेनिक खेती फॉर्म, यहां 181 एकड़ में गौ पालन के साथ होती है 20 तरह के फलों की खेती

Organic farming in chhattisgarh: एशिया का सबसे बड़ा खेती फॉर्म जिले के धमधा ब्लॉक के ग्राम धौराभाठा में है। यहां 181 एकड़ में 20 प्रकार के फलों की खेती होती है। इनमें सीता फल, एपल बेर, अमरूद, ड्रेगन फू्रट प्रमुख है।

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दुर्ग

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Dakshi Sahu

Dec 05, 2020

छत्तीसगढ़ में है एशिया का सबसे बड़ा आर्गेनिक खेती फॉर्म, यहां 181 एकड़ में गौ पालन के साथ होती है 20 तरह के फलों की खेती

छत्तीसगढ़ में है एशिया का सबसे बड़ा आर्गेनिक खेती फॉर्म, यहां 181 एकड़ में गौ पालन के साथ होती है 20 तरह के फलों की खेती

हेमंत कूपर@ दुर्ग. एशिया का सबसे बड़ा खेती फॉर्म जिले के धमधा ब्लॉक के ग्राम धौराभाठा में है। यहां 181 एकड़ में 20 प्रकार के फलों की खेती होती है। इनमें सीता फल, एपल बेर, अमरूद, ड्रेगन फू्रट प्रमुख है। इन फलों की डिमांड देशभर में है। यहां खेती पूरी तरह आर्गेनिक तरीके से की जाती है। आर्गेनिक खाद और कीटनाशक सहजता से उपलब्ध हो, इसके लिए 110 गीर नस्ल की गायें भी पाली गई है। फॉर्म के मैनेजर राकेश धनकर बताते हैं कि आर्गेनिक खेती पर आधारित यह एशिया का सबसे बड़ा फॉर्म है, जहां पूरी तरह जैविक पद्यति से खेती होती है। यहां फिलहाल 40 एकड़ में एपल बेर और 35 एकड़ में थाई अमरूद की खेती हो रही है। एपल बेर और अमरूद की मुम्बई, हैदराबाद, दिल्ली, कोलकोता, बंग्लुरू जैसे बड़े शहरों में अच्छी मांग है। सबसे खास बात यह है कि पूरी तरह आर्गेनिक व उच्च गुणवत्ता की होने के कारण उन्हें खरीदार खोजने की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि खरीदार खुद आकर फल ले जाते हैं। उन्होंने बताया कि सीजन में हर दिन 10 टन और पूरे सीजन में लगभग 500 टन अमरूद का उत्पादन होता है। इसके अलावा 10 टन खजूर और 40 एकड़ में 550 टन एप्पल बेर का उत्पादन होता है।

पतंजलि को भाया सीता फल
फॉर्म के मैनेजर राकेश धनकर बताते हैं सीजन में हर दिन 10 टन सीता फल निकलता है। सीता फल पकने पर इसका पल्प निकाल लेते हैं, जो आइसक्रीम आदि बनाने में काम आती है। यहां बाला नगर प्रजाति के सीता फल की खेती होती है जो सर्वश्रेष्ठ प्रजाति माना जाता है। उन्होंने बताया आर्गेनिक और उच्च गुणवत्ता की होने के कारण पतंजलि ने सीता फल खरीदने की इच्छा जताई है। पतंजलि पैकेज्ड फूड के रूप में इस सीता फल को मार्केट में उतारने की इच्छुक है। पिछले दिनों पतंजलि के सीईओ आचार्य बालकृष्ण ने इसके लिए संपर्क किया था।

दूध के लिए नहीं, गोबर और गो-मूत्र के लिए गायें
फार्म में 110 गीर प्रजाति की गाय पाली गई हैं। इनके चारे के लिए 40 एकड़ में गन्ना, मक्का और नैपियर घास लगाई गई है। मैनेजर राकेश धनकर ने बताया कि 1 गिर गाय से निकले गोबर से 10 एकड़ में जैविक खेती की जा सकती है। यहां आर्गेनिक खाद, कीटनाशक बनाने के लिए यूनिट तैयार की गई है। इससे इजरायल की पद्धति से आर्गेनिक खाद 500 एकड़ तक फैले खेत में पहुंचाया जाता है।

वाटर हार्वेस्टिंग का भी मॉडल फॉर्म
फॉर्म में पानी की सतत सप्लाई रहे, इसके लिए लगभग 10 एकड़ में 2 तालाब बनाया गया है। यह वाटर हार्वेस्टिंग का भी शानदार मॉडल साबित हुआ और नजदीक के गांवों में इससे जलस्तर काफी बढ़ गया। इसके पास की अधिकतर भाठा जमीन है। धनकर ने बताया कि फॉर्म की ओर से आसपास के किसानों को भी आर्गेनिक और आधुनिक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

कोरोना से नुकसान, लेकिन अब सब ठीक
कोरोना के कारण लॉकडाउन का असर फॉर्म पर भी पड़ा। धनकर ने बताया कि ट्रांसपोर्टिंग बंद होने के कारण फलों की सप्लाई संभव नहीं हुआ। इस कारण 200 रुपए किलो में बिकने वाले थाई अमरूद गायों को खिलानी पड़ी। इससे काफी नुकसान भी हुआ, लेकिन अब सब कुछ ठीक हो चुका है। यहां ड्रैगन फू्रट और स्वीट लेमन जैसे एन्टी ऑक्सीडेंट्स से भरपूर फलों का भी उत्पादन हो रहा है।