करोड़ों में एक, दिव्यांग गौकरण ने पैर से बनाई पीएम की पेंटिंग, उन तक पहुंचाए कैसे

गौकरण ने अपने पैरों से पीएम मोदी के लिए पेटिंग तैयार की है।  कुछ कर दिखाने के जज्बे ने गौकरण के पैरों को मजबूत कर दिया और वह पैर ही गौरकण की जुबां बन गए।

कोमल धनेसर@भिलाई.अखबार में जैसे ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आने की खबर पढ़ी, दिव्यांग गौकरण पाटिल खुश हो गया। बस कैनवास पर तुलिका के सहारे अपनी कल्पनाओं को इस उम्मीद से उकेरने लगा कि वह अपनी बनाई पेटिंग उन्हें खुद भेंट करेगा। मगर अब राज्योत्सव में उसे यह मौका मिलेगा या नहीं यह सोचकर वह उदास है। गौकरण ने अपने पैरों से पीएम मोदी के लिए पेटिंग तैयार की है। मूक-बधिर होने के साथ ही गौकरण के दोनों हाथ भी जन्म से नहीं है। कुछ कर दिखाने के जज्बे ने गौकरण के पैरों को मजबूत कर दिया और वह पैर ही गौरकण की जुबां बन गए।

पैर बन गए जुबां
कंप्यूटर पर फर्राटे से उसके पैरों की उंगलियां की-बोर्ड पर थिरकती है और जब तुलिका पैरों की उंगलियों में आ जाती है तो कैनवास पर जिंदगी के कई रंग उतर आते हैं। राज्योत्सव में पीएम मोदी को अपनी बनाई पेटिंग देने वह काफी उत्सुक है, लेकिन पीएम के प्रोटोकॉल में वह उन तक पहुंच पाएगा या नहीं यह उसे खुद नहीं पता। अपनी मां के सामने एक ही रट लगाए हुए हंै कि किसी तरह वह उसे मोदी  के पास ले जाए। पर मां शांता आचार्य के पास ऐसी कोई पहुंच नहीं है जो उसे प्रधानमंत्री के मंच तक ले जा सकें।

कहीं से कोई रास्ता मिल जाए
इससे पहले गौकरण रायपुर आए पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, सोनिया गांधी, डॉ रमन सिंह, अखिलेश यादव, उमा भारती सहित कई बड़ी हस्तियों को अपनी बनाई पेटिंग भेंट कर चुका है। शांता आचार्य कहती हंै कि उसकी जिद को देख वह कोशिश में लगी है कि कहीं से कोई रास्ता मिल जाए ताकि वह अपनी पेंटिंग पीएम को दे सकें। अपनी पेंटिंग में गौकरण ने पीएम मोदी को एक हीरो की तरह पेश किया है जो पूरे देश-विदेश में तो छाए ही हैं बल्कि भारत को बदलने की कोशिश कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़ की लोककला को दर्शाया
स्वच्छ भारत अभियान से लेकर देश में शुरू हुई जन-धन योजना,. वन टाइम वीजा, एफडीआई, स्टार्टअप जैसी योजनाओं को भी गौकरण ने प्रचारित किया है। इसके अलावा तीन और पेटिंग बनाई है जिसमें छत्तीसगढ़ की लोककला व संस्कृति को दर्शाया है।
पेंटिंग एक्जीविशन से लेकर अब तक सैंकड़ों प्रतियोगिता में प्राइज जीत चुके गौकरण को केवल प्रधानमंत्री से मिलने की इच्छा है। लिखकर अपनी भावनाओं को उसने पत्रिका से व्यक्त किया कि अगर उसे यहां मौका नहीं मिलेगा तो वह दिल्ली जाएगा, पर वह पेटिंग जरूर भेंट करेगा।

करोड़ों में एक गौकरण
गौकरण विकलांग की श्रेणी में कुछ अलग ही है। मूक-बधिर होने के साथ-साथ उसके दोनों हाथ भी जन्म से नहीं है। इस तरह के दिव्यांग करोड़ों में एक ही मिलते हैं। गौकरण ने अपनी स्कूलिंग श्रवण बाधित स्कूल प्रयास से पूरी की और उसके बाद पॉलीटेक्नीक कॉलेज दुर्ग से डीटीपी और स्क्रिन पेंटिंग का कोर्स किया। इसके बाद उत्तर प्रदेश के चित्रकूट स्थित जगदगुरु रामभद्राचार्य विकलांग विवि से एमए फाइन आर्ट प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण किया।
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Satya Narayan Shukla Desk/Reporting
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