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सती वृंदा की राख से उत्पन्न हुआ था तुलसी का पौधा, तुलसी विवाह की पौराणिक कथा

शुक्रवार को तुलसी विवाह छोटी दिवाली के रूप में मनाया जाएगा। तुलसी विवाह को लेकर पौराणिक ग्रंथों में कई कथाएं मिलती हैं। जिनका जिक्र अक्सर धार्मिक सत्संगों में होता है।

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Satya Narayan Shukla

Nov 10, 2016

Sati was born from the ashes of Vrinda Tulsi plant

Sati was born from the ashes of Vrinda Tulsi plant, legend of Tulsi Vivah

भिलाई.
शुक्रवार को तुलसी विवाह छोटी दिवाली के रूप में मनाया जाएगा। तुलसी विवाह को लेकर पौराणिक ग्रंथों में कई कथाएं मिलती हैं। जिनका जिक्र अक्सर धार्मिक सत्संगों में होता है। पं. उमेश भाई जानी ने बताया कि तुलसी और शालिग्राम के विवाह की परंपरा उस वक्त शुरू हुई जब छल से भगवान विष्णु ने राजा जालंधर की पत्नी और अपनी भक्त वृंदा का सतीत्व भंग किया। देवताओं से युद्ध के दौरान जब जांलधर को देवता हरा नहीं पाए तब उन्होंने विष्णु की शरण ली और वंृदा को मिले वरदान का असर कम करने को कहा।


तुलसी ने दिया श्राप

जब पूजा में बैठी वृंदा के सामने भगवान विष्णु उसके पति के रूप में गए तो वृंदा ने उनके चरण छुए तभी देवताओं ने युद्ध में जालंधर के सिर को धड़ से अलग कर दिया और वह धड़ वंृदा के सामने गिरा और वंृदा ने भगवान विष्णु छल से उनका सतीत्व भंग करने की वजह से श्राप दिया कि वे पत्थर के हो जाएं। जब लक्ष्मी जी ने प्रार्थना की तो वृंदा ने अपना श्राप वापस लिया और वह पति के सिर को लेकर सती हो गई।


राख से पैदा हुआ तुलसी का पौधा

सती हुई तुलसी की राख से तुलसी का पौधा उत्पन्न हुआ। जिसके बाद भगवान विष्णु ने शालिग्राम रूप में तुलसी से ब्याह रचाया और वरदान दिया कि बिना तुलसी के पत्ते के उनको भोग नहीं लगेगा। तभी से एकादशी के दिन तुलसी विवाह की परंपरा है और भगवान विष्णु को भोग में तुलसी का पत्ता अनिवार्य है। तुलसी विवाह के दिन बकायदा गन्ने का मंडप बनाकर तुलसी को सजाया जाता है। पौराणिक रीति-रिवाजों से शालिग्राम और तुलसी का विवाह संपन्न कराकर लोग मंगलमय जीवन की कामना करते हैं। सदियों से परंपरा चली आ रही है।


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