शुक्रवार को तुलसी विवाह छोटी दिवाली के रूप में मनाया जाएगा। तुलसी विवाह को लेकर पौराणिक ग्रंथों में कई कथाएं मिलती हैं। जिनका जिक्र अक्सर धार्मिक सत्संगों में होता है। पं. उमेश भाई जानी ने बताया कि तुलसी और शालिग्राम के विवाह की परंपरा उस वक्त शुरू हुई जब छल से भगवान विष्णु ने राजा जालंधर की पत्नी और अपनी भक्त वृंदा का सतीत्व भंग किया। देवताओं से युद्ध के दौरान जब जांलधर को देवता हरा नहीं पाए तब उन्होंने विष्णु की शरण ली और वंृदा को मिले वरदान का असर कम करने को कहा।