साक्षरता के मामले में प्रदेश में अव्वल दुर्ग जिले को 1993 में साक्षर जिला घोषित किया गया था। उन दिनों साक्षरता अभियान के प्रोजक्ट डायरेक्टर प्रो. डीएन शर्मा के अनुसार 1992 में ग्रामीण क्षेत्र में 80 प्रतिशत निरक्षर साक्षर हो चुके थे। 1993 में शहरी क्षेत्र के 80 प्रतिशत लोग लिखना-पढऩा सीख चुके थे। इसके बाद साक्षरता अभियान तो बंद कर दिया गया, लेकिन उत्तर साक्षर, नवसाक्षर, स्किल डेवलपेंट, दीदी -भैया बैंक जैसे प्रोजक्ट आए। 1995 से 1998 तक सतत शिक्षा अभियान चलाया गया। गांव-गांव, मोहल्लों में लाइब्रेरी खोल लोगों को पढऩे प्रेरित किया गया था। इस दौरान सबसे ज्यादा इफेक्टिव कला जत्था के प्रोग्राम रहे जिन्होंने शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य, कृषि जैसे क्षेत्रों में जागरूकता लाई।