फेडरेशन के पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षकों को लगातार बीएलओ ड्यूटी, सर्वेक्षण, ऑनलाइन डाटा एंट्री और अन्य प्रशासनिक कार्यों में लगाया जा रहा है। इससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है और शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट आ रही है। शिक्षकों का मानना है कि अगर यही स्थिति जारी रही, तो सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर और कमजोर हो सकता है। इससे खासकर ग्रामीण और गरीब वर्ग के बच्चों की शिक्षा पर ज्यादा असर पड़ेगा।