
फिल्म संजू देखकर ड्रग एडिक्ट यूथ का रियल लाइफ में कमबैक, नशा से तबाह जिंदगी में खुशियों की दस्तक
भिलाई. फिल्में समाज का आईना मानी जाती हैं। जो कुछ समाज में चल रहा होता है उसे फिल्मों में दिखाया जाता है, नतीजन सोसायटी में भी फिल्मों का सीधा प्रभाव पड़ता है। युवा चाहे वह किसी भी दौर का रहा हो, फिल्मी हीरो को अपना रोल मॉडल मानता है। यूथ पर इसके अच्छे और बुरे दोनों इफेक्ट पड़ते हैं। हालिया रिलीज फिल्म 'संजू से युवाओं में सकारात्मक बदलाव आए हैं।
फिल्म संजू में एक्टर संजय दत्त की लाइफ के बारे में दिखाया गया। फिल्म में दिखाया गया कि किस तरह संजय दत्त ड्रग एडिक्ट हो गए थे। एक स्टेज पर आकर नशा छोड़ उन्होंने अपनी लाइफ में कमबैक किया और फिर से अपनी स्टार वाली पहचान बनाई। ये फिल्म 300 करोड़ के क्लब में भी शामिल हो चुकी है। ये फिल्म ड्रग एडिक्ट यूथ के लिए भी इंस्पायरिंग साबित हुई है।
कॉलेज की पढ़ाई छूट गई
कॉलेज लाइफ में दोस्तों के साथ कूल दिखने के फेर में एमबीए कर रही 23 वर्षीय युवती मारिजुआन ड्रग की एडिक्ट हो गई। नशे से पढ़ाई भी छूट गई थी। फिल्म देखने के बाद गिल्टी फील करने लगी और परिजनों को आपबीती सुनाई। फैमिली ने सपोर्ट किया और इलाज शुरू कराया।
स्कूल टाइम से ही पड़ गई थी लत
दिल्ली में एक इंजीनियरिंग स्टूडेंट (19) जो पिछले चार साल से नशा कर रहा था। हिरोइन, मॉर्फिन एलएसडी, एमडीएमए जैसे घातक ड्रग्स लेने की लत उसे स्कूल टाइम से ही पड़ गई थी। एक ड्रग्स छुटती तो वह दूसरी लेने लगता। संजू फिल्म में संजय दत्त की मां की मौत के दौरान ड्रग्स लेने वाले सीन को देख स्टूडेंट ने ड्रग्स छोडऩे का संकल्प लिया। उसने फैमिली से इस वाकए को साझा किया और अभी उसका ट्रीटमेंट चल रहा है।
रियल लाइफ की स्टोरी
फिल्म एक्टर को युवा रोल मॉडल मानते हैं। कई बार उनके किरदार से इंप्रेस हो जाते हैं। चूंकि 'संजूÓ संजय दत्त की रियल स्टोरी पर बनाई गई थी, एेसे में कोई भी ड्रग एडिक्ट के दिमाग में फिल्म क्लिक करेगी ही। ड्रग करने वाले की जिंदगी बर्बाद तो होती है साथ ही उसकी फैमिली भी परेशान रहती है। फिल्म का पॉजिटिव इफेक्ट है कि युवा बैड हैबिट से निजात पा रहे हैं।
जिंदगी से होने लगा प्यार
मुंबई में लॉ की पढ़ाई करते वक्त दोस्तों के साथ 22 वर्षीय युवती को मारिजुआना व अन्य ड्रग की आदी हो गई। इस वजह से मां ने न चाहते हुए भी उससे दूरी बना ली। पढ़ाई भी प्रभावित हो गई। संजू देखकर मानसिकता में बदलाव आया और जिंदगी से प्यार होने लगा। मॉम से मिली और अपनी गलती स्वीकार किया। अभी उसका इलाज जारी है।
इन बातों का रखें ध्यान
उन बच्चों से दो से-तीन महीने में मिलने जाएं जो बाहर रहकर पढ़ाई कर रहे हों।
बैंक के मिनी स्टेटमेंट के साथ ही बच्चों के बिहेवियर पर नजर रखें।
अपने बच्चों के फ्रेंड्स लाइफ स्टाइल पर भी केयर करें।
ऐसे बच्चों में ड्रग्स एडिक्शन का खतरा ज्यादा रहता है जिनके पैरेंट्स जॉब करते हैं। एेसे परिजनों को चाहिए कि वे बच्चों की बातों को सुनें, उन्हें वक्त दें।
अपने स्तर पर मॉनिटरिंग जरूरी है। साथ ही काउंसिलिंग भी कराएं
Published on:
18 Aug 2018 11:46 am
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