
पैरामिलिट्री फोर्स भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी: मुन्नाभाई ने इस खतरनाक बीमारी का हवाला देकर मांगा जमानत तो जज ने कह दिया सीधे NO
दुर्ग. दूसरे के एडमिशन कार्ड पर परीक्षा देते पुलिस के हत्थे चढ़े बल्लभगढ़ हरियाणा निवासी सतपाल सिंह (19) और पलवल हरियाणा निवासी रोहित पोसवाल (23) का जमानत आवेदन न्यायालय ने खारिज कर दिया। न्यायाधीश विवेक कुमार तिवारी ने जमानत आवेदन पर फैसला सुनाया। दोनों आरोपियों का यह पहला जमानत आवेदन था। न्यायाधीश ने फैसले में कहा कि आरक्षक भर्ती प्रक्रिया के दौरान स्वयं के स्थान पर फर्जी जाति, निवास प्रमाणपत्र तैयार कर अन्य व्यक्ति को परीक्षा में उपस्थित करने का उल्लेख प्रकरण में है।
उतई पुलिस ने इस संबंध में आवश्यक दस्तावेज जप्त किया है। डायरी में उल्लेख है कि रोहित ने फर्जी दस्तावेज बनाने के लिए दो लाख अन्य आरोपी सतपाल सिंह को दिया है। सतपाल सिंह ने रोहित व अन्य अभ्यर्थियों से पैसे लेकर उनके स्थान पर अन्य व्यक्ति को लिखित परीक्षा में बैठाया है। इस गंभीर मामले में विवेचना अपूर्ण है। मुख्य आरोपी धनसिंह व अन्य अब तक फरार है। प्रकरण गंभीर प्रकृति का है। ऐसी स्थिति में जमानत का लाभ दिया जाना उचित प्रतीत नहीं होता।
जमानत के लिए इसे बनाया आधार
आरोपी का कहना है कि वह 14 अगस्त से जेल में है। दोनों कम उम्र के शिक्षित नवयुवक है। अधिक दिनों तक जेल में रहने से मन मस्तिष्क पर विपरीत एवं बुरा प्रभाव पडऩे की प्रबल संभावना है। आरोपी रोहित पोसवाल वर्तमान में टीबी. की गंभीर बीमारी से ग्रस्त है। चिकित्सक ने 6 माह तक दवाईयां खाने एवं आराम करने की सलाह दी है। जेल में इलाज संभव नहीं होने से उसके साथ कोई भी घटना दुर्घटना हो सकती है।
अधिवक्ताओं ने यह दिया तर्क
बचाव पक्ष के अधिवक्ता रवि शंकर सिंह ने कहा कि आरोपी निर्दोष हंै। उन्हें झूठा फंसाया गया है। वह केवल परीक्षा देने आए थे, उन्हें अन्य बातों की जानकारी नहीं है। लोक अभियोजक सुदर्शन महलवार ने जमानत आवेदन का विरोध करते कहा कि परीक्षा में अनुचित लाभ लेने के लिए झूठा दस्तावेज तैयार कर स्वयं के स्थान पर अन्य व्यक्ति को परीक्षा दिलवाकर छल किया गया है।
Published on:
11 Sept 2019 01:26 pm
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