
टुकड़ों में मिले शव को जोड़कर बताया, महिला की हत्या कब और कैसे हुई, ये हैं 15 हजार शवों का PM करने वाले CG के डॉ. शिवनारायण मांझी
दुर्ग . खराब हो चुके शव को देखकर हर कोई नाक सिकोड़ता है पर शासकीय मेडिकल कॉलेज रायपुर में फोरेसिंक मेडीसिन विभाग प्रमुख डॉ. शिवनारायण मांझी 18 साल की सेवा में ऐसे 15 हजार शवों का पोस्टमार्टम कर चुके हैं। उनके सटीक पीएम रिपोर्ट के सहयोग से पुलिस को कई जटिल मामलों को सुलझाने में मदद मिली है। पोस्टमार्टम करते समय उनका एक ही उद्देश्य रहता है कि उनकी रिपोर्ट बिल्कुल स्पष्ट रहे। उसे पढऩे के बाद पुलिस और न्यायालय सारी बातों को स्पष्ट समझ जाए। रिपोर्ट इतना स्पष्ट हो कि वह साक्ष्य के रुप में आसानी से प्रमाणित हो।
जब पहली बार डिकंपोज शव देखा तो तीन दिन तक खाना नहीं खाया
डिकंपोज शव का पीएम करना आसान नहीं है। पत्रिका से अपने काम के अनुभव को शेयर करते डॉ. मांझी ने बताया कि 2003 में जब पहली बार डीकंपोज शव को देखा तो उनकी आंखों की नींद उड़ गई थी। तीन दिन तक खाना नहीं खा पाए थे। तब डॉ. आरके सिंह (अब मेडिकल कॉलेज राजनांदगांव के डीन) ने उसे समझाया और अपने अनुभव को शेयर कर हौसला बढ़ाया। डॉ. सिंह फोरेंसिक मेडीसिन साइंस में अंतराष्ट्रीय स्तर पर दखल रखते है। डॉ सिंह 30 हजार और डॉ. यू गोन्नाडे लगभग 28 हजार पोस्टमार्टम कर चुके हैं। डॉ. मांझी प्रदेश में तीसरे स्थान पर हैं।
जब कांपे थे हाथ और नहीं कर सके पीएम
डॉ. मांझी ने बताया कि उनके हाथ एक ही बार कांपे थे। जब उनके भतीजे का शव मॉरच्यूरी लाया गया था। शव को देखने के बाद वे तत्काल बाहर आ गए और विभाग प्रमुख से कहा कि वे यह पोस्टमार्टम नहीं कर सकते। डॉ. मांझी ने बताया कि रायपुर मेडिकल कॉलेज में सबसे ज्यादा बॉडी दुर्ग जिले से जाती है। उन्हें दुर्ग न्यायालय में गवाही के लिए सबसे अधिक हाजिर होना पड़ता है। पोस्टमार्टम में महिलाओं का शव अधिक रहा। अधिकांश बर्न केस था।
कैदी के फांसी का तरीका देख उलझे डॉक्टर
कुछ वर्ष पहले जेल से एक कैदी का शव पोस्टमार्टम के लिए लाया गया था। शव को देखकर यकीन ही नहीं हो रहा था कि कैदी ने अपने हाथ से फांसी लगाई गई है। क्योंकि वह सिर्फ चडड्डी बनियान पहना था। इस केस को समझने के लिए दो घंटे शव के निकट खड़े थे। बाद में निष्कर्ष पर पहुंचे की वास्तव में कैदी ने फांसी लगाई है।
पंद्रह दिन इंतजार के बाद भी महिला का सिर नहीं मिला
डॉ.मांझी ने बताया कि कुछ वर्ष पहले एक महिला का शव पुलिस ने मेडिकल कॉलेज भेजा था। सप्ताह भर तक महिला के शरीर का अलग-अलग पार्ट पुलिस लाती रही। शव कुल 12 हिस्सों में था। दुर्ग व रायपुर पुलिस द्वारा भेजे गए शरीर के अलग अलग हिस्सों को वे हर दिन जोड़कर मैच करते रहे। महिला की मृत्यु कैसे हुई और वे कब हुई थी इस नतीजे पर वे पहुंच गए थे, लेकिन महिला की शिनाख्त ही नहीं हो पाई। उसका सिर मिला ही नहीं। महिला की हत्या के बाद शव को टुकड़े टुकड़े कर खारून नदीं में फेक दिया गया था।
दस दिनों तक किया अध्ययन
2004 में अज्ञात डी कंपोज शव का पीएम रिपोर्ट तैयार करने के लिए उन्हें दस दिनों तक मेहनत करनी पड़ी थी। हत्या के बाद हाथ पैर बांधा गया था कि पहले इस बात को जानने के लिए उन्हें कई रात जागकर अध्यन करना पड़ा।
कोर्स हुआ लैप्स
फोरेसिंक मेडीसिन (एमडी) का कोर्स महाराष्ट्र से किया है। डॉ. आरके सिंह के प्रयास से रायुपर मेडिकल कॉलेज में फोरेसिंक मेडीसिन कोर्स खुला था, दुर्भाग्य कि इस क्षेत्र के लिए किसी ने रुचि नहीं दिखाई। तीन वर्ष में एक भी दाखिला नहीं होने के कारण कोर्स को लैप्स कर दिया गया।
जल्द मिलेगी सुविधा
डॉ.मांझी ने बताया कि जल्द ही रायपुर मेडिकल कॉलेज में यह सुविधा होगी कि अगर किसी व्यक्ति ने विष सेवन कर आत्महत्या की है तो वह कौन सा विष था इसकी जांच मिनटों में की जा सकेगी। इसकी जांच के फोरेसिंक मेडीसिन एंड टास्कोलॉजी कॉलेज में शुरू किया जा रहा है।
Published on:
29 Apr 2019 11:20 am
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