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दुर्ग-बेमेतरा रेल लाइन प्रोजेक्ट की फिर से खुलेगी फाइल, नई सरकार की पहल

दुर्ग से बेमेतरा रेल लाइन बिछाने की योजना की बंद फाइल अब फिर खुलेगी। पंद्रह साल बाद प्रदेश की सत्ता में आई कांग्रेस की सरकार इस पर नए सिरे से विचार करेगी।

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दुर्ग

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Dakshi Sahu

Dec 27, 2018

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दुर्ग-बेमेतरा रेल लाइन प्रोजेक्ट की फिर से खुलेगी फाइल, नई सरकार की पहल

दुर्ग. दुर्ग से बेमेतरा रेल लाइन बिछाने की योजना की बंद फाइल अब फिर खुलेगी। पंद्रह साल बाद प्रदेश की सत्ता में आई कांग्रेस की सरकार इस पर नए सिरे से विचार करेगी। खास बात यह है कि पूर्व सांसद ताम्रध्वज साहू के प्रस्ताव पर रेल मंत्रालय ने दुर्ग से बेमेतरा रेल लाइन के सर्वे कराया था।

फिर जागी उम्मीद की किरण
सर्वे के बाद रेलवे ने इस प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि रेलवे के लिए यह घाटे का सौदा है। रेलवे इस पर अकेले खर्च नहीं करेगा। दुर्ग जंक्शन से पावर हाउस नंदनी होते बेमेतरा तक रेल चलाने की योजना पर अब सरकार के फिर विचार करने की बात से उम्मीद की किरण नजर आ रही है।

तीन साल पहले किया था सर्वे
तीन वर्ष पहले इसके लिए सर्वे कराया गया था। सर्वे रिपोर्ट आने के बाद रेलवे ने इस योजना से यह कहते हाथ खींच लिया था कि रेलवे इस रेल लाइन पर अकेले खर्च नहीं करेगा। अगर राज्य सरकार ५० प्रतिशत राशि लगाती है तो रेल मंत्रालय बेमेतरा तक रेल लाइन बिछाने तैयार है।

आगे मुंगेली से बिलासपुर को भी जोडऩे की योजना
भविष्य में इसे मुंगेली होते बिलासपुर तक भी जोड़ सकता है। रेलवे का तर्क था कि वर्तमान परिस्थिति में नंदनी अहिवारा होते बेमेतरा तक यात्री रेल ही चलाया जा सकता है। इस रुट पर यात्री रेल के अलावा गुड्स ट्रेन नहीं चलाया जा सकता। यात्री रेल चलाने के लिए राज्य सरकार की सहभागिता आवश्यक है।

82 किमी. रेल लाइन बिछाने सर्वे
रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक एक किलोमीटर नई ट्रेक बिछानेे के लिए ८० से ९० लाख रुपए तक खर्च आता है। अगर रूट में माइनर केनाल है तो यह बजट एक करोड़ तक भी चला जाता है। जिस रूट का सर्वे किया गया था उसकी दुर्ग जंक्शन से दूरी ९३ किलोमीटर है। नंदनी तक बीएसपी पहले रेल लाइन बिछा चुकी है। सर्वे ८२ किलोमीटर रेल लाइन बिछाने किया जा चुका है।

अगर अकेले रेलवे लाइन बिछाता है तो उसे लगभग ८२ करोड़ रुपए खर्च करना पड़ेगा। वहीं अगर स्टेट गवर्नमेंट के साथ कार्य करता है तो रेलवे का खर्च आधा हो जाएगा। रेल लाइन के अलावा जमीन अधिग्रहण की भी समस्या है। अधिग्रहण के लिए जमीन मालिक को वर्तमान जमीन दर से पांच गुना अधिक का भुगतान करना होता है।

राज्य शासन से हरी झंडी का इंतजार
कैबिनेट मंत्री ताम्रध्वज साहू ने पत्रिका को बताया कि रेलवे पहले ही कह चुका है कि अगर राज्य शासन चाहे तो वह काम शुरू कर सकता है। उन्होंने कहा कि तत्कालीन राज्य सरकार ने इमसें रूचि नहीं दिखाई। अब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में हम इस विषय को रेलवे मंत्रालय के समक्ष रखेंगे। इसमें बेहतर क्या हो सकता है इसके लिए पहल करेंगे। उम्मीद है कि रेलवे का नजरिया सकारात्मक होगा। साहू ने यह भी कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद अगर केन्द्र में कांग्रेस की सरकार बनती है तो रेल लाइन बिछाने के लिए नए सिरे से प्रयास करेंगे।

सिर्फ यात्री ट्रेन चलाने से उठाना पड़ेगा घाटा
किसी भी लाइन में यात्री ट्रेन चलाने के अलावा गुड्स ट्रेन चलाने पर ही रेलवे को फायदा होता है। यात्री ट्रेन चलाने से रेलवे हमेशा घाटा में रहा है। वैसे भी नंदनी होते बिलासपुर तक के लिए इस मार्ग पर वर्तमान में गुड्स ट्रेन के लिए कोई स्कोप नजर नहीं आ रहा है। इसलिए रेलवे बड़ी राशि खर्च नहीं करेगा।

गुड्स ट्रेन का वैसे तो 100 से लेकर 200 क्लास है। क्लास के हिसाब से ही भाड़ा निर्धारित होता है। सबसे कम भाड़ा कम्यूनिट कामन यूज सामानों का होता है। इसमें फल से लेकर आनाज शामिल है। इसके बाद अन्य सामानों की ढुलाई का भाड़ा निर्धारित है। वर्तमान में सबसे मंहगा भाड़ा पेट्रोलियम पदार्थ के परिवहन का है।