
दुर्ग . एमबीएस अंतिम वर्ष की परीक्षा में बैठने प्रवेश लिया था। प्रवेश के साथ परीक्षा शुल्क भी जमा किया पर यूनिवर्सिटी ने परीक्षा में बैठने के लिए प्रवेश पत्र जारी नहीं किया। सेक्टर-7 भिलाई निवासी छात्र दिनेश कुमार (30 वर्ष) की परिवाद पर जिला उपभोक्ता फोरम ने डॉ.सीवी रमन यूनिवर्सिटी कोटाबिलासपुर और के आई जावेद समन्वयक नेहरु नगर भिलाई को दोषी ठहराया है।
फोरम की अध्यक्ष मैत्रेयी माथुर, सदस्य राजेंद्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने फैसले में दोनों पर 5.05 लाख रुपए का हर्जाना लगाया है। जिसमें परीक्षा से वंचित कर साल खराब करने के लिए ३ लाख रुपए,मानसिक कष्ट के लिए २ लाख रुपए और वाद व्यय के लिए 5 हजार रुपए शामिल है। यह राशि एक माह के भीतर अदा करने का आदेश दिया है।
एक साल बरबाद हो गया
छात्र दिनेश कुमार ने फोरम को जानकारी दी थी कि नेहरु नगर स्थित समन्वयक के कार्यालय में उसने २०१३ में पीजी डीआरडी के तहत एमबीए अंतिम वर्ष में प्रवेश लिया था। १ अप्रैल २०१४ को प्रवेश शुल्क, ट्यूशन फीस व परीक्षा शुल्क १७६०० रुपए जमा किया था। ९ अक्टूबर २०१५ को परीक्षा शुल्क १५०० रुपए जमा किया।
इसके बाद भी संस्थान ने प्रवेश पत्र जारी नहीं किया और परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी। वह हायर एजुकेशन लेकर अच्छी नौकरी करने के लिए प्रवेश किया था। उसके अन्य दोस्त परीक्षा दिलाकर अच्छी जगह नौकरी कर रहे हैं। प्रतिमाह उनकी आमदानी 20 से 25 हजार रुपए है। जबकि वह पढ़ाई से ही वंचित हो गया।
फीस लेते समय अपात्र है यह नहीं बताया
प्रकरण से यह सिद्ध है कि दोनों अनावेदकों ने मिलकर परीक्षा व अन्य शुल्क लिया है। फीस लेने के समय पात्र है कि नहीं यह नहीं बताया गया। जब परीक्षा की बारी आई तो उसे वंचित कर दिया गया। यह छात्र के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उसका धन व समय दोनों बरबाद हो हुआ। इसके लिए अनावेदक को मानसिक कष्ट के लिए हर्जाना देना ही होगा।
छात्र पात्रता नहीं रखता था
बचाव में अनावेदकों ने कहा कि प्रवेश लेटरल एंट्री के माध्यम से लिया गया था। जांच में पाया गया कि पीपीडीपीएम या डीएमएम योग्यता पहले लेना होगा। वह सीधे एमबीए अंतिम वर्ष की पात्रता नहीं रखाता। इसकी सूचना समय रहते दे दी गई थी, लेकिन आवेदक प्रवेश देने दबाव बनाता रहा। कोर्ट में केस करने भी धमकी दी थी।
Published on:
04 Mar 2018 09:59 am
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