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Decision: लॉंड्री वाले ने धुलाई करते समय 35 सौ की साड़ी फाड़ी, अब देगा 11 हजार हर्जाना

रायक्लिनिंग के लिए दिए साड़ी के फटने पर जिला उफभोक्ता फोरम ने नेहरु नगर स्थित धोबी घाट लॉंड्री के संचालक को दोषी ठहराया।
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Satya Narayan Shukla

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Updated: 14 Jan 2017, 9:20 AM IST

consumer forum decision

consumer forum decision

दुर्ग.
ड्रायक्लिनिंग के लिए दिए साड़ी के फटने पर जिला उफभोक्ता फोरम ने नेहरु नगर स्थित धोबी घाट लॉंड्री के संचालक को दोषी ठहराया। लॉड्री के संचालक को फोरम ने आदेश दिया कि वह एक माह के भीतर परिवादी को कुल 11200 रुपए अदा करे। इस राशि में साड़ी के लिए निर्धारित धुलाई शुल्क का पंद्रह गुना हर्जाना 1200 रुपए, मानसिक कष्ट के लिए 7000 रुपए और वाद व्यय 3000 रुपए शामिल है। इस मामले में प्रियदर्शनी परिसर निवासी अधिवक्ता अनुराग ठाकर ने परिवाद प्रस्तुत किया था।


सिल्क साड़ी दिया था धुलाई के लिए

परिवाद पर सुनवाई के बाद यह फैसला जिला उपभोक्ता फोरम की अध्यक्ष मैत्रेयी माथुर व सदस्य राजेन्द्र पाध्ये ने सुनाया। परिवाद के मुताबिक अधिवक्ता ने अपनी पत्नी की सिल्क साड़ी और एक फ्राक धुलाई के लिए धोबी घाट लॉंड्री में 25 अप्रैल 2016 को दिया था। साड़ी और फ्राक को अच्छी तरह देखने के बाद पावती दिया था। जिसमें 2 मई 2016 को डिलीवरी डेट दिया था। निर्धारित दिन में पहुंचने पर संचालक ने केवल फ्राक यह कहते हुए दिया कि साड़ी तीन दिन बाद देगा।


लॉड्री वाले ने किया अभद्र व्यवहार

इसके बाद दस दिन का समय दिया। बाद में पहुंचने के बाद दी गई साड़ी को देखा तो खुलासा हुआ कि साड़ी में 20 से 25 जगह छेद है जिसे रफू कर दिया गया है। परिवादी ने कहा कि बिल में उसे धुलाई चार्ज साड़ी का 80 रुपए और फ्राक का 50 रुपए अंकित किया गया था। भुगतान के समय 120 रुपए अतरिक्त लिया जा रहा था। पूछने पर बताया गया कि साड़ी फटी हुई थी उसे रफू किया गया गया है। साड़ी फटने का विरोध करने पर लॉड्री संचालक ने अभद्र व्यवहार किया।


जवाब देने में भी लापरवाही

अनावेदक ल़ॉंड्री संचालक ने विलंब से जवाब दिया। जवाब दावा को ग्राह्य नहीं करने पर फोरम के सामने उसने विनती की थी। इसके बाद फोरम ने विलंब से जवाबदावा प्रस्तुत करने के लिए 1000 रुपए का जुर्माना किया। अनावेदक ने जवाबदावा तो उस समय प्रस्तुत कर दिया लेकिन जुर्माना की राशि जमा नहीं की। यही कारण था कि फोरम ने फैसले के दौरान उसके जवाब दावा पर विचार नहीं किया।