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Rajasthan Panchna Dam: 20 साल का सूखा खत्म, तड़के 5 बजे छोड़ा नहरों में पानी, जानें ख़ास बातें और किसे होगा फायदा?

Karauli के Panchna Dam से 20 साल बाद नहरों में पानी छोड़ दिया गया है। 6 July 2026 को आई तकनीकी खराबी को पूरी रात काम करके ठीक किया गया और सुबह 5 बजे पानी की निकासी शुरू हुई।
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Karauli Panchna Dam Water Released Into Canals After Midnight Repair Works

पांचना बांध- File Pic

राजस्थान के करौली जिले में स्थित एशिया के सबसे बड़े मिट्टी के बांध यानी पांचना बांध (Panchna Dam) से आखिरकार मंगलवार, 7 July को अलसुबह ठीक 5 बजे नहरों में सिंचाई के पानी की निकासी पूरी तरह से शुरू कर दी गई है। इससे पहले कल सोमवार, 6 July 2026 को जल संसाधन मंत्री द्वारा बांध के गेट खोलने के कुछ ही घंटों बाद आई तकनीकी खराबी के चलते पानी का प्रवाह अचानक रुक गया था, जिसके बाद कमांड क्षेत्र के किसानों में भारी आक्रोश फैल गया था और उन्होंने सड़कों पर चक्काजाम कर दिया था। इसके बाद प्रशासन और जल संसाधन विभाग के आला अधिकारियों ने पूरी रात मौके पर डटकर और कड़ी मशक्कत के बाद तड़के इस खराबी को दूर किया, जिससे 20 साल से पानी का इंतजार कर रहे हजारों किसानों के चेहरों पर दोबारा खुशी लौट आई है और खेतों तक पानी पहुंचने का रास्ता साफ हो गया है।

पूरी रात चला मरम्मत का काम, मुस्तैद रहे NDRF और गोताखोर

जल संसाधन विभाग जयपुर के अधीक्षण अभियंता विजय कुमार शर्मा ने इस पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि बांध के मुख्य गेट में अचानक आई तकनीकी खराबी को दूर करना चुनौतीपूर्ण था। सोमवार दोपहर को जैसे ही मुख्य गेट वापस नीचे गिर गया और पानी का प्रवाह पूरी तरह रुक गया, प्रशासन ने तुरंत एक्शन लिया।

इस तकनीकी खराबी को ठीक करने के लिए NDRF की टीम और विशेष गोताखोरों को आपातकालीन स्थिति में मौके पर बुलाया गया। पुलिस प्रशासन के आला अधिकारी और जल संसाधन विभाग की तकनीकी टीम रातभर बांध पर ही डटी रही।

भारी बारिश और अंधेरे के बीच चली इस मशक्कत के बाद तड़के 5 बजे गेट को सफलतापूर्वक चालू किया जा सका और नहरों में पानी की सप्लाई बहाल की गई।

भड़क गए थे किसान, सड़कों पर लगाया था जाम

पांचना बांध से नहरों में पानी छोड़े जाने की खबर से कमांड क्षेत्र (कमांड एरिया) के अंतर्गत आने वाले सवाई माधोपुर और गंगापुर सिटी के किसानों में भारी उत्साह था। लेकिन कल दोपहर अचानक पानी रुक जाने की वजह से उन तक पानी नहीं पहुंच पाया, जिससे किसानों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।

नाराज किसानों ने करौली जिले के कुसाय, गाधौली, कैमला, कटकड़ मोड़ सहित हिंडौन-महावीरजी-नादौती मार्ग पर ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़े करके पूरी तरह से चक्काजाम लगा दिया था।

सोमवार पूरी शाम इन रास्तों पर भारी ट्रैफिक जाम रहा और किसान लगातार प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। अब तड़के पानी छोड़े जाने के बाद किसानों ने राहत की सांस ली है।

20 साल पुराना ऐतिहासिक विवाद सुलझा

एशिया के इस सबसे बड़े मिट्टी के बांध के पानी के बंटवारे को लेकर पिछले 2 दशक यानी 2006 से गतिरोध बना हुआ था। बांध के कमांड क्षेत्र के 35 गांवों (मुख्यतः मीणा समुदाय) और कैचमेंट या डूब क्षेत्र के 39 गांवों (मुख्यतः गुर्जर समुदाय) के बीच पानी के इस्तेमाल को लेकर सहमति नहीं बन पा रही थी।

कमांड क्षेत्र के किसान अपने खेतों की सिंचाई के लिए लगातार नहरें खोलने की मांग कर रहे थे, लेकिन डूब क्षेत्र के किसानों को अपने हक के पानी की चिंता थी। इस बार मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की विशेष पहल पर गठित तीन मंत्रियों की कमेटी ने दोनों पक्षों के साथ लंबी बैठकें कीं और उन्हें आपसी सहमति के एक सिंगल मंच पर लाने में बड़ी सफलता हासिल की।

61 करोड़ की लिफ्ट सिंचाई परियोजना

सरकार ने इस ऐतिहासिक विवाद को हमेशा के लिए शांत करने के लिए एक बेहद व्यावहारिक समाधान का फॉर्मूला तैयार किया है। डूब क्षेत्र के 39 गांवों के किसानों की सिंचाई संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने 61 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत वाली दो नई 'गुडला-पांचना लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं' को मंजूरी दी है और उनका शिलान्यास भी कर दिया है।

इस बड़ी लिफ्ट परियोजना के तहत डूब क्षेत्र के गांवों को भी पर्याप्त पानी मिलेगा। इसी ठोस आश्वासन और विकास कार्य के बाद दोनों पक्षों में सहमति बनी और सोमवार को जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने बांध के तीन गेट खोलकर इस ऐतिहासिक ट्रायल रन की शुरुआत की थी।

पांचना बांध की क्षमता और सिंचाई से जुड़े कुछ मुख्य आंकड़े

करौली और आस-पास के जिलों के लिए लाइफलाइन माने जाने वाले पांचना बांध के कुछ बेहद महत्वपूर्ण तकनीकी और प्रशासनिक आंकड़े इस प्रकार हैं:

कुल भराव क्षमता: पांचना बांध की कुल आधिकारिक भराव क्षमता 258.62 मीटर निर्धारित है।

वर्तमान जलस्तर: सोमवार को बांध का वास्तविक जलस्तर 254.75 मीटर दर्ज किया गया था, जो नहरों में पानी छोड़ने के लिए पूरी तरह अनुकूल है।

पानी रोकने की कुल क्षमता: इस विशाल मिट्टी के बांध में 2,100 मिलियन क्यूबिक फीट (MCFT) पानी को रोकने की क्षमता है।

लाभान्वित कृषि भूमि: नहरें पूरी तरह खुलने से क्षेत्र की लगभग 10,000 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई के लिए भरपूर पानी मिल सकेगा, जिससे खरीफ और रबी दोनों फसलों को बड़ा फायदा होगा।

प्रशासन की अपील: नहरों और गंभीर नदी के पास बरतें विशेष सतर्कता

पांचना बांध की नहरों में पानी का वेग काफी तेज होने के कारण और आगे गंभीर नदी (Gambhir River) के जलस्तर में होने वाली संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए स्थानीय जिला प्रशासन ने एक विशेष गाइडलाइन जारी की है।

करौली और कमांड क्षेत्र के प्रशासनिक अधिकारियों ने नहरों के किनारे और डूब क्षेत्र के आस-पास रहने वाले ग्रामीण किसानों और पशुपालकों से विशेष रूप से अलर्ट रहने की अपील की है।

प्रशासन ने लाउडस्पीकर के माध्यम से गांवों में मुनादी करवाई है कि कोई भी व्यक्ति अपने मवेशियों (कैटल) और छोटे बच्चों को जलभराव वाले क्षेत्रों, उफनती नहरों और गंभीर नदी के तटों के पास न जाने दे ताकि किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान या अप्रिय हादसे से पूरी तरह बचा जा सके। जल संसाधन विभाग की पेट्रोलिंग टीमें भी इस समय नहरों के रूट पर लगातार निगरानी रख रही हैं।

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