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बताओ भलाई का जमाना ही नहीं रहा, चोट लगने से रोशनी गई और डॉ के खिलाफ लगाया परिवाद

मोतियाबिंद के गलत ऑपरेशन से आंखों की रोशनी चले जाने की भ्रामक जानकारी देकर डॉक्टर के खिलाफ झूठा परिवाद पेश करने वाले को उपभोक्ता फोरम ने दोषी ठहराया है।
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दुर्ग

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Satya Narayan Shukla

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Updated: 1 Aug 2018, 11:24 PM IST

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बताओ भलाई का जमाना ही नहीं रहा, चोट लगने से रोशनी गई और डॉ के खिलाफ लगाया परिवाद

दुर्ग@Patrika. मोतियाबिंद के गलत ऑपरेशन से आंखों की रोशनी चले जाने की भ्रामक जानकारी देकर डॉक्टर के खिलाफ झूठा परिवाद पेश करने वाले को उपभोक्ता फोरम ने दोषी ठहराया है। उसे डॉक्टर को मानसिक कष्ट पहुंचाने के लिए 10 हजार रुपए हर्जाना भरना होगा।

डॉक्टर की लापरवाही बताते हुए उससे 10 लाख रुपए मुआवजा मांगा

जिला उपभोक्ता फोरम में ग्राम भरदाकला जिला बेमेतरा निवासी अवधराम (८० वर्ष) ने अरिहंत चिकित्सालय धमधा के डॉ. ऋषभ मेहता के खिलाफ परिवाद प्रस्तुत किया था। इसमें आंखों की रोशनी चले जाने के लिए डॉक्टर की लापरवाही बताते हुए उससे १० लाख रुपए मुआवजा मांगा था। इस परिवाद पर फैसले में फोरम की अध्यक्ष मैत्रेयी माथुर, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने कहा कि कोई भी चिकित्सक नहीं चाहता कि मरीज का नुकसान या वह दिव्यांग हो। परिवादी ने गलत आधार पर परिवाद प्रस्तुत किया है। इसके लिए उसे डॉक्टर को हर्जाना देना होगा।

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आरोप : डॉक्टर ने गलत इलाज किया इसलिए चली गई आंखों की रोशनी
परिवादी का कहना था कि उसकी दाईं आंख में मोतियाबिंद की शिकायत थी। पांच जनवरी २०१६ को अस्पताल में ऑपरेशन कराया था, इसके बाद आंख की रोशनी चली गई। ऑपरेशन के बाद आंखों में हरी पट्टी बांधकर ड्रॉप डालने दिया था। समय-समय पर आंखों की जांच कराई। डॉक्टर रोशनी जल्द आने का कहते रहे।

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इस तरह पकड़ा गया झूठ
डॉक्टर ऋषभ मेहता ने अपना पक्ष रखते बताया कि परिवादी की आंखों की रोशनी मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद नहीं गई है। ऑपरेशन १० अक्टूबर २०१५ को हुआ था। ऑपरेशन के बाद अंतिम बार जांच १४ नवंबर २०१५ को की गई थी। तब आंख बिलकुल ठीक थी। अवधराम के आंखों में लकड़ी से चोट आई थी। दोबारा ऑपरेशन पांच जनवरी २०१६ को किया गया। तब स्पष्ट बता दिया गया था कि आंखों की रोशनी वापस नहीं आएगी ऑपरेशन से केवल दर्द से छुटकारा मिलेगा।