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देख लीजिए स्वास्थ्य मंत्री जी, जिला अस्पताल के डॉक्टर रात में कहते हैं, दूसरी जगह ले जाओ मरीज को…

रात में भर्ती होने वाली गर्भवती को जांच के बाद ऑपरेशन के नाम पर दूसरे अस्ताल में रेफर किया जा रहा है। जबकि जिला अस्पताल में आपरेशन की पूरी सुविधा है।

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दुर्ग

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Dakshi Sahu

Jun 04, 2018

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देख लीजिए स्वास्थ्य मंत्री जी, जिला अस्पताल के डॉक्टर रात में कहते हैं, दूसरी जगह ले जाओ मरीज को...

दुर्ग . जिला अस्पताल में प्रसव के लिए आने वाली गर्भवतियों और उनके परिजन को परेशानी की सामना करना पड़ रहा है। खासकर रात में भर्ती होने वाली गर्भवती को जांच के बाद ऑपरेशन के नाम पर दूसरे अस्ताल में रेफर किया जा रहा है। जबकि जिला अस्पताल में आपरेशन की पूरी सुविधा है।

रात 10.30बजे के बाद तो मामूली तकलीफ में भी कर्मचारी ही कोई न कोई बहाना बनाकर टरकाते हैं। और फिर दूसरे अस्पताल के लिए रेफर किया जाता है। करीब महीने पर से यही रवैया है। इस दौरान अस्पातल से उन्हें रेफर टिकट भी नहीं दिया जाता।

डॉक्टर भी कॉल पर आने से बचते हैं
जिला अस्पताल में रात में ऑपरेशन करने की सुविधा लिए रोज रोटेशन में विशेषज्ञ डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जाती है। इसके बाद भी रात में डॉक्टर कॉल पर नहीं आते। रात में ऐसे केस में डॉक्टर को कॉल किया जाता है जिसमें किसी तरह का बवाल होने की आशंका हो, या फिर दो से अधिक केस में आपरेशन की जरुरत होती है।

संस्थागत प्रसव सर्वाधिक जिला अस्पताल में होता है। औसत हर रोज २० गर्भवती का प्रसव कराया जाता है। इसमें से 30 प्रतिशत प्रसव ऑपरेशन से होता है। जून के पहले तक प्रतिदिन रात में औसतन ५ गर्भवती का ऑपरेशन कर प्रसव कराया जाता था। यह ग्राफ मई में पूरी तरह गिर चुका है।

ऐसे खुला मामला
25 मई को बोरी की किरण दिल्लीवार को पहले प्रसव के लिए जिला अस्पताल लाया गया था। दोपहर में भर्ती करने पर सारा कुछ नार्मल बताया गया। बाद में खून की कमी बताया गया। पीडि़त परिवार ने आनन फानन ब्लड की व्यवस्था भी कर ली। इसके बाद अस्पताल के कर्मचारी टाल मटोल करते रहे। रात १०.३० बजे परिवार के सदस्यों को यह सूचना दी गई कि केस बिगड़ जाएगा वे नजदीक के किसी अस्पताल में ऑपरेशन कराएं। यहां पर अच्छी सुविधा नहीं है।

स्टाफ के कर्मचारी ऑनन फानन निर्णय लेने दबाव बनाने लगे। पीडि़त परिवार ने रेफर टिकट तैयार करने कहा तो लेबर रुम में ड्यूटी करने वाले कर्मचारी लालपीले होने लगे। उनका कहना था कि वे रेफर टिकट केवल रायपुर मेडिकल कॉलेज के लिए देंगे।

अगर नजदीक के अस्पताल में प्रसव कराना है तो वे कुछ भी लिख कर नहीं देंगे। उन्हें स्वय टिकट पर यह लिखना होगा कि वे अपनी मर्जी से अस्पताल छोड़ अन्य अस्पताल जाना चाह रहे हैं। पीडि़त परिवार ने पत्रिका को बताया कि मंगलम अस्पताल पहुंचने पर बिलकुल सामान्य क्रम में ऑपरेशन कर प्रसव कराया गया और तीस हजार रुपए का बिल बनाया गया।

सीधी बात, सिविल सर्जन डॉ. केके जैन
Q रात में प्रसूताओं को जबरदस्ती निजी अस्पताल भेजने का खेल चल रहा है?
A हमारे पास एक भी शिकायत नहीं आई है।
Q सप्ताह भर में दो से तीन प्रकरण प्रकाश में आया है हमने उनसे चर्चा की है?
A स्थिति असामान्य होने पर हम मेडिकल कॉलेज भेजते है। अस्पताल भेजने की जिम्मेदारी हमारी है। बकायदा दस्तावेज तैयार किया जाता है।
Q मै बिना रेफर टिकट वाले मरीजों की बात कर रहा हूं। जिन्हें अस्पताल के नजदीक नर्सिंग होम में भेजा जाता है।
A कहा न शिकायत नहीं है। जो मरीज जाते हैं वे स्वेच्छा से जाते हैं। वे टिकट में लिखकर जाते हैं।
Q ऐसे प्रकरणों में क्या कभी संज्ञान लिया गया है?
A नहीं, हम केवल शिकायत होती है उसमें जांच करते है।
Q इस माह तो रात में सबसे क म ऑपरेशन हुआ है?
A वर्तमान में स्टाफ की कमी है। स्टाफ नर्स हड़ताल में है। ग्राफ कम दिखाई दे रहा है इसका असर यह भी हो सकता है।

एक आपरेशन में निजी अस्पताल प्रसूता के परिवार वालों से 25 से 30 हजार रुपए तक चार्ज ठोक देते हैं। खास बात यह है कि जिस अस्पताल का नाम बताया जाता है वहां स्मार्ट कार्ड की सुविधा रहती है। रात में अस्पताल में भर्ती करने के पहले स्मार्टकार्ड को ब्लाक कर दिया जाता है। इसके बाद दवाई व अन्य सुविधा उपलब्ध करो के लिए अतिरिक्त राशि नगद जमा करने कहा जाता है। स्मार्टकार्ड से केवल 9000 रुपए ब्लाक किया जाता है।