
दुर्ग. स्त्री, जन्म से देव तुल्य होती है। उसका जीवन परोपकार से लबालब होता है। जन्म से पिता, विवाह के बाद पति और मां बनने के बाद संतान तक वह सब के लिए अपना जीवन समर्पित करती है। स्त्री जो पूजा पाठ अनुष्ठान और पुण्य कार्य करती है उसका फल भी वह सब नहीं चाहती बल्कि अलग-अलग अवस्था में दूसरों के लिए ही होता है।
यह बातें देवी भागवत के दूसरे दिन जूना पीठ के महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी ने कही। रामायण और महाभारत के अलग-अलग प्रसंगों पर चर्चा करते हुए उन्होंने माता कुंती व सीता के चरित्र का वर्णन किया। स्त्री के अलग-अलग स्वरूप व अवस्था पर उन्होंने कहा कि जन्म के बाद पुत्री अपने पिता से स्नेह करती है। उसके सुख में खुश व दुख में सहभागी होती है।
पिता के दुख पर ईश्वर से उसके हरण के लिए आराधना करती है,और तब तक करती है जब तक दुख का अंत ना हो। इसी तरह विवाह के बाद पति व मां बनने पर संतान के लिए करती है। मां बनने के बाद भी वह पिता से उतना ही स्नेह करती है जितना बाल्यकाल में करती है, अर्थात स्त्री जन्म से परोपकारी होती है।
स्त्री की मूल में सृष्टि की रचना
वेद पुराणों में उपनिषदों में देवी के स्वरूप को समझाते हुए उन्होंने बताया कि नारी संपूर्ण होती है, जो जीवन को जन्म देती है और इसी के मूल में सृष्टि की रचना है। मनुष्य की पहली प्राथमिकता मति होती है। यदि पुरुष के पास मति है तो वह सत्कर्म करेगा। जिससे उसका और उसकी कुल को सद्गति मिलेगी। मति मिलती है श्रद्धा से और श्रद्धा देवी उपासना से ही मिलती है, अन्यथा पुरुष सदैव भ्रमित, सशंकित, भयभीत ही घूमता रहेगा।
पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी पहुचे
देवी भागवत के दूसरे दिन पूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी ने कथा श्रवण किया। आचार्य से आशीर्वाद लिया। इसके बाद जोगी दुर्गाधाम गए और झांकी का अवलोकन कर प्रसाद लिए। दुर्गाधाम में दूसरेे दिन माँ ब्रम्ह्चारिणी के लिए चुनरी महाराजा चौक से पहुची। पार्षद दीपक साहू, हामिद खोखर, भास्कर कुंडले, लीलाधर पाल व प्रकाश गीते के नेतृत्व में करीब 200 लोगों की टोली जसगीत के साथ चुनरी लेकर पहुंची।
वेद के एक कथा के प्रसंग पर उन्होंने बताया कि ऐश्वर्य अर्थात श्री को देवी ने ही देवताओं को दान किया। तब से पुरुषों के नाम के आगे श्री की परंपरा बनी। उन्होंने कहा की स्त्री अपने आप में एक जाति है। वह जब जिस पुरुष से संबंध हो उसकी जाति को कहलाती है। जब देवताओं ने देवी से पूछा कि श्री आपने हमें दिया अब आपके पास क्या है तो देवी ने बताया कि उनकी शालीनता, संस्कार और बुद्धि ही विशिष्टता है जो उनकी मति में है। इसी वजह से स्त्री श्रीमती हुई।
Published on:
23 Sept 2017 10:55 am
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