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कुर्सी के खेल में अटक गई जिपं की शिक्षा समिति, सत्ताधारी लगे रहे सभापति के पद के लिए, विपक्षियों ने कर लिया किनारा

जिला पंचायत में सात की जगह इस बार केवल छह समितियां होंगी। सत्ताधारी दल कांग्रेस के सदस्यों ने समितियों के सभापति की कुर्सी के फेर में शिक्षा समिति के लिए नामांकन ही नहीं भरा। वहीं विपक्षी भाजपाइयों ने समितियों के चुनाव से किनारा कर लिया। इसके चलते शिक्षा समिति का गठन नहीं हो पाया।

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Education committee not formed in district panchayat

जिला पंचायत के सभाकक्ष में कराए गए समितियों के चुनाव

दुर्ग. जिला पंचायत में विभागीय कामकाज के संचालन के लिए समितियों का गठन कर सभापतियों के चुनाव कराया गया। इससे पहले पंचायती राज अधिनियम में प्रावधानित पांच समितियों सामान्य प्रशासन समिति, शिक्षा समिति, कृषि समिति, संचार एवं संकर्म समिति व सहकारिता व उद्योग समिति के अलावा अलग से दो और समितियां बनाने का प्रस्ताव पारित किया गया था। इनमें महिला एवं शिशु कल्याण समिति और स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समिति शामिल है। इसके अनुरूप जिला पंचायत के सभाकक्ष में समितियों का गठन कर सभापतियों के चुनाव कराए गए।


इस प्रावधान के कारण अटकी समिति
जिला पंचायत में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष को मिलाकर सत्ताधारी दल कांग्रेस के 7 सदस्य हैं। प्रावधान के मुताबिक अध्यक्ष सामान्य प्रशासन समिति व उपाध्यक्ष को शिक्षा समिति स्वमेव सभापति होता है। अन्य 5 समितियों में सभापति के रूप में शेष 5 सदस्य एडजस्ट हो गए। सामान्य प्रशासन समिति में सभी सभापति सदस्य होते हैं। इस तरह प्रत्येक सदस्य सामान्य प्रशासन और सभापति वाली 2 समितियों के सदस्य हो गए। इसके बाद एक सदस्य के अधिकतम 3 समितियों में सदस्यता के नियम के चलते केवल 5 समितियां ही बन पाई।


भाजपाइयों की चुप्पी से गड़बड़ाया गणित
जिला पंचायत की किसी भी समिति में कम से कम 3 सदस्य अनिवार्य है और एक सदस्य अधिकतम ३ समितियों में शामिल होने का प्रावधान है। इस तरह सत्ताधारियों के केवल 7 सदस्य होने के कारण सभी समितियों के गठन के लिए कम से कम भाजपा के दो सदस्यों के नामांकन की दरकार थी, लेकिन भाजपा के सदस्य समितियों के गठन के अनुमोदन के बाद बैठक से उठकर चले गए और चुनाव की प्रक्रिया में शामिल नहीं हुए। इसके कारण शिक्षा समिति में एक भी नामांकन नहीं हो पाया।


छह माह बाद फिर हो सकता है प्रयास
जानकारों के मुताबिक फिलहाल अब कम से कम छह महीने तक शिक्षा समिति का गठन नहीं किया जा सकेगा। छह माह बाद शासन की अनुमति से दोबारा समिति के गठन का अवसर दिया जा सकता है। जिपं उपाध्यक्ष इस समिति के सभापति होता है, लेकिन सदस्य नहीं होने के कारण इस बीच, इस समिति की कोई बैठक नहीं हो पाएगी।


समितियों के सभापति व सदस्य

1. सामान्य प्रशासन समिति
सभापति (पदेन) - शालिनी रिवेंद्र यादव
सदस्य (पदेन) - अशोक साहू, योगिता चंद्राकर, पुष्पा भूनेश्वर यादव, आकाश कुर्रे, दुर्गा नेताम, शमशीर कुरैशी।

2. कृषि समिति
सभापति - योगिता चंद्राकर
सदस्य - पुष्पा भूनेश्वर यादव, शमश्री कुरैशी।

3. शिक्षा समिति
सभापति (पदेन) - अशोक साहू
सदस्य - निरंक

4. संचार व संकर्म समिति
सभापति - पुष्पा भूनेश्वर यादव
सदस्य - दुर्गा नेताम, आकाश कुर्रे।

5. सहकारिता व उद्योग समिति
सभापति - आकाश कुर्रे
सदस्य - दुर्गा नेताम, पुष्पा भूनेश्वर यादव।

6. महिला एवं शिशु कल्याण समिति
सभापति - दुर्गा नेताम
सदस्य - योगिता चंद्राकर, शमशीर कुरैशी।

7. स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समिति
सभापति - शमशीर कुरैशी
सदस्य - योगिता चंद्राकर, आकाश कुर्रे।