8 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

बड़ी लापरवाही: नसबंदी ऑपरेशन के 4 दिन बाद खुले महिला के टांके, जिला अस्पताल में 5 दिन भर्ती रखकर भी नहीं किया इलाज

परिवार नियोजन कार्यक्रम का लक्ष्य पूरा करने के चक्कर में लापरवाही बरतने का मामला सामने आया है। एक बार फिर नसबंदी ऑपरेशन के चार दिन बाद ही टांका खुलने से एक महिला की जान पर बन आई।

3 min read
Google source verification

दुर्ग

image

Dakshi Sahu

Feb 24, 2019

patrika

बड़ी लापरवाही: नसबंदी ऑपरेशन के 4 दिन बाद खुले महिला के टांके, जिला अस्पताल में 5 दिन भर्ती रखकर भी नहीं किया इलाज

दुर्ग. परिवार नियोजन कार्यक्रम का लक्ष्य पूरा करने के चक्कर में लापरवाही बरतने का मामला सामने आया है। एक बार फिर नसबंदी ऑपरेशन के चार दिन बाद ही टांका खुलने से एक महिला की जान पर बन आई। पाटन अस्पताल में जब वह अपनी पीड़ा लेकर पहुंची तो उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहां करीब पांच दिन भर्ती रहने के बाद भी इलाज नहीं हो पाया। हालत बिगडऩे पर उसका इलाज निजी अस्पताल में चल रहा है। बहरहाल, जिला स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी ने इसकी जांच के आदेश दे दिए हैं।

पाटन अस्पताल में हुआ था ऑपरेशन
बालोद के देवरी (ख) की रेशमा पति भागवत यादव का मायका सिरसा कला में है। दो बच्चों के बाद उसने मायके में ऑपरेशन कराने का फैसला किया। उसका पाटन अस्पताल में 8 फरवरी को ऑपरेशन किया गया। इसके अगले दिन उसके पेट में तेज दर्द होने लगा, तब भी दवा देकर उसको डिस्चार्ज कर दिया गया। चार दिन बाद उसके टांके खुल गए और रक्तस्राव होने लगा। फिर उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां से दुर्ग जिला अस्पताल रेफर किया गया।

हालत नहीं सुधरी
पीडि़ता के पति भागवत ने बताया कि जिला अस्पताल में उसकी दो दिन के अंतर से पट्टी की जाती थी, लेकिन हालत नहीं सुधरी। वह बेहोशी की हालत में पहुंच गई तब उसे वीवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां से उसे शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। यहां उसका उपचार चल रहा हैै।

विभाग बना रहा दबाव
जिले में महामारी का रूप ले चुके डेंगू की वजह से जिले में तीन माह तक योजना ठंडे बस्ते में रही। कुम्हारी में नसबंदी के लिए 150 पंजीयन थे। इनका ऑपरेशन अहिवारा अस्पताल में होना था, लेकिन डॉक्टर के नहीं होने से उनका ऑपरेशन नहीं हो सका।लक्ष्य में पिछडऩे के बाद विभाग के अधिकारी अब ऑपरेशन करने डॉक्टरों पर दबाव बना रहे हंै।

टांका टूटने से महिला का पेट खुल गया
वर्ष 2018 में जिला अस्पताल में बेमेतरा जिले से महिला को प्रसव के लिए जिला अस्पताल लाया गया था। प्रसव के बाद नसबंदी ऑपरेशन किया गया। सप्ताह भर बाद मरीज को छुट्टी दी गई। शासन की योजना के तहत महतारी एक्सप्रेस से घर पहुंचाया गया, लेकिन रास्ते में ही टांका टूटने से महिला का पेट खुल गया। वाहन चालक उसको छोड़कर लौट आया। परिजन महिला के पेट में कपड़ा बांधकर दुर्ग जिला अस्पताल लाया। इलाज से संतुष्ट नहीं होने पर महिला को परिजन ने बीएम शाह अस्पताल में भर्ती कराया। जहां महिला का तीन बार ऑपरेशन किया गया।

केवल नसंबदी ऑपरेशन करने से बचने यह तरीका
सरकारी अस्पताल के डॉक्टर नसबंदी का आंकड़ा बढ़ाने नया तरीका निकाल लिया है। दरअसल वे ऑपरेशन से होने वाले प्रसव के दौरान नसबंदी कर ग्राफ बढ़ा रहे हैं। दूसरे प्रसव के लिए भर्ती महिलाओं की काउंसलिंग कर नसबंदी करने का काम किया जा रहा है। वहीं सामान्य प्रसव होने और बाद में नसबंदी कराने वालों को डॉक्टर केवल डेट देते हैं, या उन्हें निजी अस्पताल की ओर रवाना कर देते हैं।

जिले में एलटीटी ऑपरेशन करने सर्जन नहीं
नसबंदी ऑपरेशन दो तरह से किया जाता है। दूरबीन पद्धती से किए जाने वाले ऑपरेशन को एलटीटी कहा जाता है। वहीं हाथों से होने वाले ऑपरेशन को सीटीटी कहा जाता है।खास बात यह है कि जिले में एलटीटी ऑपरेशन करने सर्जन ही नहीं है। हर साल स्वास्थ्य विभाग एलटीटी ऑपरेशन के लिए निजी डॉक्टरों से अनुबंध करती थी, लेकिन इस साल स्वास्थ्य विभाग ने अनुबंध किया ही नहीं।

जिले में पुरषों की अपेक्षा महिलाएं ज्यादा नसबंदी कराती है। इस साल यह आकड़ा सैकड़ा पार नहीं कर पाया। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक जिले में चालू वर्षमें केवल 74 पुरुषों ने ही नसबंदी ऑपरेशन कराया है। सीएचएमओ डॉ. गंभीर सिंह ठाकुर ने बताया कि प्रकरण की जानकारी शनिवार को ही मिली है। महिला की स्थिति के बारे में जानकारी ली है। वर्तमान स्थिति में सुधार हो रहा है। मामले में जांच कराई जाएगी।

कहा ले जाओ प्राइवेट अस्पताल
शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज डॉ. मोनिका जिंदल ने बताया कि महिला को शनिवार को भर्ती कराया गया है। महिला का टांका खुल गया था। उसमें मवाद भर गई थी। इलाज किया जा रहा है। स्थिति में सुधार है। पीडि़त महिला के पति भागवत यादव ने बताया कि पाटन अस्पताल में महिला डॉक्टर ने ऑपरेशन किया था। जिला अस्पताल में भर्ती कराने के बाद भी डॉक्टरों ने इलाज नहीं किया। जिला अस्पताल के एक अधिकारी ने प्राइवेट अस्पताल ले जाने कहा था।