
रजिस्ट्री के लिए जमीन का बटांकन अनिवार्य
दुर्ग . लैंड रिकॉर्ड में जमीन की पुरानी खरीदी-बिक्री का बटांकन दर्ज नहीं है। इधर नई रजिस्ट्री में बटांकन मतलब जमीन का अलग खसरा नंबर अनिवार्य कर दिया गया है। इससे पहले से टुकड़ों में बंट चुके प्लाटों की रजिस्ट्री पर अघोषित रूप से ब्रेक के कारण जमीन की रजिस्ट्री लगभग ठप सी हो गई है। रोज होनी वाली रजिस्ट्रियों की संख्या घटकर आधे से भी कम हो गई है। जमीन व भवन की खरीदी-बिक्री की रजिस्ट्री अब बटांकन के बिना संभव नहीं है। विभाग के सॉफ्टवेयर में इसकी जानकारी दर्ज किए बिना रजिस्ट्री की प्रोसेस आगे नहीं बढ़ेगी। अफसरों का दावा है कि बटांकन अनिवार्य किए जाने से एक ही जमीन की बार-बार बिक्री जैसी फर्जीवाड़ा की संभावना नहीं होगी, लेकिन इसमें नई परेशानी खड़ी हो गई है। व्यवहारिक दिक्कतों का हवाला देकर पटवारी पुराने प्लाटों के बटांकन से परहेज कर रहे हैं। इससे इनकी खरीदी-बिक्री बंद हो गई है।
पहले इस तरह होती थी रजिस्ट्री
इससे पहले तक पटवारी जमीन की खरीदी बिक्री के मूल नक्शे में स्याही से मार्क कर चौहद्दी दर्शा देते थे। इसके आधार पर पंजीयन कर लिया जाता था। जमीन की पहचान के लिए पंजीयन में मूल खसरे के साथ टुकड़ा लिख दिया जाता था। इससे मूल नक्शे में जमीन चिन्हित नहीं हो पाता था। बाद में सुविधा अनुसार बटांकन करा लिया जाता था।
अब रजिस्ट्री से पहले जमीन की पहचान
अब प्रत्येक रजिस्ट्री पर बटांकन अनिवार्य कर दिया गया है,ताकि बिकने वाली जमीन का रजिस्ट्री से पहले नक्शे में स्पष्ट पता चल सके और जमीन का अलग से खसरा नंबर अलाट किया जा सके। यानि अब रजिस्ट्री से पहले ही नक्शे में जमीन को चिन्हित कर दर्शाना होगा। इस तरह एक खसरे की एक ही बार रजिस्ट्री होगी।
अफसरों का दावा रूकेगी फर्जीवाड़ा
पूर्व में बटांकन बाद में दर्ज होने के कारण एक ही जमीन की बार-बार रजिस्ट्री कर लिए जाने की शिकायत मिलती थी। अधिकारियों का दावा है कि नई व्यवस्था से हर रजिस्ट्री के लिए अलग खसरा नंबर जरूरी होगा। इससे एक जमीन की बार-बार बिक्री जैसे फर्जीवाड़े की गुंजाइश नहीं रहेगी।
पुराने प्लाटों के बटांकन में कानूनी पचड़े का खतरा
जहां पहले से ही प्लाटिंग हो चुकी है,ऐसे अधिकतर जगहों के नक्शे पर अब भी बटांकन दर्ज नहीं हो पाया है। ऐसे जगहों की खरीदी-बिक्री की रजिस्ट्री में नए नियम से परेशानी हो रही है। पटवारियों की मानें तो ऐसे प्लाटों के एक से अधिक बार खरीदी बिक्री की आशंका है। इससे कानूनी पचड़े की स्थिति निर्मित हो सकती है।
बस चुकी है आबादी
ज्यादा परेशानी वहां है जहां पहले ही प्लाट बिक चुके हैं और आबादी बस चुकी है। पूर्व में बटांकन जरूरी नहीं होने के कारण इन प्लाटों की रजिस्ट्री हो चुकी है। रिकॉर्ड में बटांकन नहीं है। बसाहट के बीच जरीब फैलाकर निर्माणों का नापना और नक्शे में बटांकन टेढ़ीखीर साबित हो रही है।
लैंड रिकार्ड में बंटाकन के हिसाब से सुधार के लिए चाहिए बड़े नक्शे
पटवारियों की माने तो लैंड रिकॉर्ड में बटांकन के हिसाब से सुधार के लिए बेहद बारीकी से काम की जरूरत है। नक्शे के मौजूदा पैमाने पर यह संभव नहीं है। इसके लिए नक्शे बड़ी साइज पर तैयार करने पड़ेंगे। दूसरी ओर कम्प्यूटर और दूसरे संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
तीन की जगह केवल एक काउंटर से अलग परेशानी
नए नियम से पहले हर दिन 100 से 125 रजिस्ट्रियां हो रही थी। अब केवल 40 से 50 रजिस्ट्री हो रही है। इस पर भी रजिस्ट्री ऑफिस में तीन में से दो काउंटर बंद कर दिया गया है। इसके चलते रजिस्ट्री कराने वालों को एक-दो नहीं बल्कि चार से पांच घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है।
इस संबंध में जिला पंजीयक सुनील खलखो ने बताया कि जमीन की रजिस्ट्री में बटांकन अनिवार्य कर दिया गया है। इसके बिना रजिस्ट्री संभव नहीं है। यह व्यवस्था शासन स्तर पर की गई है। स्थानीय स्तर पर कोई भी कार्य संभव नहीं है। ऑनलाइन व्यवस्था के कारण समय को लेकर थोड़ी परेशानी है। व्यवस्था सुधारने का प्रयास किया जा रहा है।
Published on:
21 Aug 2018 07:35 pm
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