
जिला अस्पताल में पेट दर्द से तड़पकर बच्ची की मौत, गोद में मासूम को लेकर चिल्लाता रहा पिता मेरी बेटी को बचा लो, नहीं आया सीनियर डॉक्टर
भिलाई. मदर चाइल्ड हॉस्पिटल दुर्ग में रविवार को ढाई साल की मासूम लवली ने पेट दर्द की वजह से तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। इसके पहले जूनियर डॉक्टर फोन कर सीनियर डॉक्टर को बुलाता रहा। जब वे अस्पताल नहीं आए तब पिता बच्चे को गोद में लेकर दूसरे अस्पताल के लिए जाने निकला। अस्पताल की सीढिय़ों में ही वह पहुंचा था कि बच्ची का हाथ और पैर ढीला पड़ गया। तब वह लौटकर फिर उपर डॉक्टर की ओर भागा। जूनियर डॉक्टर ने बताया कि बच्ची नहीं रही। इसके बाद सीनियर डॉक्टर भी पहुंचे और कहा कि बच्ची की मौत हो गई है।
पेट में हो रहा था दर्द
कोहका निवासी नितेश ने बताया कि ढाई साल की बेटी के पेट में तेज दर्द हो रहा था। वह रविवार की सुबह करीब 11 बजे उसे लेकर जिला अस्पताल दुर्ग पहुंचा। जहां बच्ची का पहले कोविड-19 जांच की गई। वह पॉजिटिव नहीं थी, तब उसे बच्चों के आईसीयू में ले गए। जहां मौजूद जूनियर डॉक्टर ने देखा। दर्द बढ़ता देख उसे एक इंजेक्शन भी लगवाया। इसके बाद भी हालत बिगड़ते जा रही थी। तब जूनियर डॉक्टर ने सीनियर डॉक्टर को फोन कर बच्ची की हालत के संबंध में जानकारी दी। इसके बाद इंतजार करते रहे।
इंतजार के बाद बोला दूसरे अस्पताल में ले जाओ
बच्ची के पिता ने बताया कि जूनियर डॉक्टर ने दो-तीन बार सीनियर डॉक्टरों को बच्ची के तबीयत की जानकारी दी। सीनियर डॉक्टर रविवार होने की वजह से नहीं आ रहे थे। दोपहर करीब 1.30 बजे जब बच्ची की तबीयत अधिक बिगडऩे लगी तब उसने किसी भी निजी अस्पताल ले जाने सलाह दी। बच्ची का पेट भी दर्द के साथ फूल रहा था। जिले के एक बड़े अस्पताल से बच्ची को लेकर वह किस अस्पताल में जाए, वह सोचने लगा। इसके बाद भी डॉक्टर की सलाह पर दूसरे अस्पताल लेकर जाने का फैसला किया।
अस्पताल की सीढ़ी पर ही तोड़ दिया दम
बच्ची को हाथ में उठाकर वह सीढ़ी से नीचे उतर रहा था, तब उसकी हालत और बिगड़ते जा रही थी, वह वापस दौड़कर फिर डॉक्टर से गिड़गिड़ाया तब डॉक्टर ने कहा कि बच्ची ने दम तोड़ दिया है, यह सुनकर पिता के पैरों तले जमीन खिसक गई। सिर्फ पेट में दर्द ही तो था। उससे कैसे मासूम की जान जा सकती है। इसके बाद सीनियर डॉक्टर पहुंचे और उसने भी बताया कि मासूम की मौत हो चुकी है।
रविवार को भी लगे सीनियर की ड्यूटी
जिला अस्पताल के मदर चाइल्ड हॉस्पिटल में रविवार को भी सीनियर डॉक्टरों की ड्यूटी होनी चाहिए। जिससे यहां आने वाले बीमार बच्चों का कम से कम पूरा इलाज हो सके। एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल लेकर जाने के दौरान अगर किसी मासूम की मौत हो रही है, तो इसके पीछे जिम्मेदार कौन है। यह भी तय किया जाना चाहिए।
अंतिम संस्कार को रोककर पीएम करवाया
रविवार को दोपहर बाद बच्ची को कोहका से अंतिम संस्कार के लिए लेकर जा रहे थे। शिकायत पर पुलिस ने शव को सुपेला मॉरच्यूरी में रखवा दिया और सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद दफनाने का रस्म पूरा किया गया। डॉ. पी बालकिशोर, सीएस, जिला अस्पताल, दुर्ग ने बताया कि सीनियर डॉक्टर कॉल पर रहते हैं, तुरंत आकर देखना चाहिए। जूनियर डॉक्टर एमबीबीएस होते हैं, अगर वे कुछ समझ नहीं पा रहे तो तुरंत सीनियर को आकर देखना है। इस मामले में संबंधित डॉक्टर को तलब करके पूछताछ करता हूं। हिदायत भी दी जाएगी।
Published on:
08 Dec 2020 11:38 am
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