
एक छात्रा को बीबीए के बाद मिली एमकॉम की पात्रता, दूसरी को नियम बताकर रोका
भिलाई . हेमचंद यादव विश्वविद्यालय की परीक्षा और परिणाम विवाद में घिरे हुए हैं। अब एक नया मामला सामने आया है, जिसमें विवि ने एक छात्रा को बीबीए के बाद एम कॉम करने पात्रता दे दी, जबकि विवि अधिनियम के हिसाब से बीबीए के बाद में एम कॉम नहीं किया जा सकता। अब विवि उक्त डिग्री निरस्त करने का तर्क दे रहा है। विवि की इस लापरवाही का खुलासा उस वक्त हुआ जब हाल ही में मुख्य परीक्षा के लिए एक अन्य छात्रा ने भी बीबीए के बाद एम कॉम का आवेदन कर दिया।
अपात्र होने पर एमए के लिए किया आवेदन
कॉलेज में हार्ड कॉपी जमा करने के वक्त यह बात सामने आई। परीक्षा केंद्र की ओर से फार्म लौटने पर छात्रा विवि के अधिकारियों से मिली, उन्हें मामला समझाया तो सबके होश उड़ गए। विवि ने छात्रा के सामने स्वीकार किया कि पिछली परीक्षा में यह गलती हुई है, जिसे सुधार लिया जाएगा। ऐसे में अब अधिनियम के हिसाब से आप एम कॉम नहीं कर सकते, इसके बदले पीजी का दूसरा विषय चुनना होगा। एम कॉम में अपात्र होने के बाद अब छात्रा ने एमए के लिए आवेदन किया है।
अपनी सहेली को लेकर पहुंची विवि
बीबीए के बाद पीजी में एम कॉम की पात्रता नहीं मिलने पर उक्त छात्रा अपनी उस सहेली को साथ लेकर विवि पहुंची, जिसे विवि ने पूर्व परीक्षा में पात्रता दे दी थी। विवि की गलती और परीक्षा विभाग की लापरवाही के चक्कर में अब छात्रा की डिग्री पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। दरअसल, विवि का सॉफ्टवेयर किसी भी विद्यार्थी को पात्रता के हिसाब से परीक्षा के आवेदन करने के लिए तैयार नहीं है। वरना, पिछले साल जिस छात्रा को अपात्र होते हुए भी पात्रता दी गई, वैसा एक और मामला दोबारा नहीं आता।
अफसरों ने पलटा अध्यादेश
इस मामले के सामने आने के बाद विवि ने अध्यादेश पलटा तो गलती समझ में आई। अध्यादेश में स्पष्ट है कि बीबीए के बाद एम कॉम की पात्रता नहीं होगी, इसके बदले विद्यार्थी किसी अन्य विषय से स्नातकोत्तर कर सकता है। अब विवि की एक गलती से उक्त छात्रा का पूरा एक साल भी संकट में है, जिसने पिछले साल बीबीए के बाद अपात्र होते हुए भी एमकॉम की परीक्षा दी, उत्तीर्ण भी हुई।
इस संबंध में हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. राजेश पांडेय का कहना है कि बीबीए के बाद एमकॉम नहीं कर सकते। पूर्व में गलती से पात्रता दे दी गई होगी। अभी एक छात्रा ऐसे पात्रता के लिए आई थी, जिसे बता दिया है कि नियम से उन्हें दूसरे विषय में स्नातकोत्तर करना होगा।
Published on:
14 Feb 2019 05:35 pm
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