
प्रशासन की अनदेखी का अवैध कॉलोनाइजर्स उठा रहे जमकर फायदा, सौ एकड़ कृषि भूमि को आवासीय बताकर महंगे दामों में बेचा
दुर्ग. प्रशासन की अनदेखी का अवैध कॉलोनाइजर्स जमकर फायदा उठा रहे हैं। शहर से लगे गांवों में कॉलोनाइजर्स एग्रीकल्चर लैंड को सस्ते दामों पर खरीद रहे हैं और बाद में उसी जमीन को आवासीय व डायवर्टेड प्लाट बताकर महंगे दामों में बेंच रहे हैं। हालात यह है कि मोहलाई में फोरलेन से लेकर शिवनाथ नदी के तट तक करीब 100 एकड़ से ज्यादा में अवैध प्लाटिंग कर लिया गया है। यहां बकायदा कच्ची सड़कें बनाकर प्लाट काटे गए हैं। खरीदारों ने प्लाट के ऊपर नाम का बोर्ड तक लगा लिया है। इसके साथ ही दुर्ग-भिलाई के आउटर्स से लगे लगभग सभी गांवों में यह खेल चल रहा है।
दुर्ग-भिलाई के लिए अलग-अलग के बजाए पहली बार महानगरों की तर्ज पर जुड़वा शहर के रूप में मास्टर प्लान बनाया गया है। इसमें वर्ष 2031 तक आबादी के विस्तार और उनकी जरूरतों को ध्यान में रखकर नए आवासीय व दूसरे उपयोग के क्षेत्र प्रस्तावित किए गए हैं। प्लान में दुर्ग व भिलाई से लगे 100 गांवों को भी शामिल किया गया है। इनमें से अधिकतर गांवों में एग्रीकल्चर लैंड किसानों से सस्ती दर पर जमीन खरीदकर महंगे दामों पर प्लाटिंग के खेल जमकर चल रहा है।
कॉलोनाइजर्स इस तरह उठा रहे दोहरा फायदा
मास्टर प्लान में नए आवासीय के साथ ग्रीन लैंड, सड़क, शासकीय उपयोग व अन्य जरूरत के लिए भी इलाके प्रस्तावित किए गए हैं। इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं होने के कारण आवासीय को भी दूसरे प्रयोजन के लिए प्रस्तावित बताकर कॉलोनाइजर्स लोगों से जमीन खरीद रहे हैं। कॉलोनाइजर्स उसी जमीन पर प्लाटिंग कर नए मास्टर प्लान की स्वीकृति के साथ स्वमेव आवासीय हो जाने का हवाला देकर महंगी दाम पर बेंच रहे हैं।
मोहलाई में शिवनाथ के छोर तक अवैध प्लाटिंग
मोहलाई शहर से लगा सबसे नजदीकी गांव है। शहर और नेशनल हाइवे के बीच होने के कारण यह नए बसाहट के लिए बिल्कुल अनुकूल है। इसका फायदा उठाया जा रहा है और अवैध प्लाटिंग नेशनल हाइवे से लेकर शिवनाथ के तट तक भी पहुंच गया है। महमरा, अंजोरा, रसमड़ा के आउटर से लेकर नगपुरा के आगे तक हर गांव में एग्रीकल्चर लैंड पर मुरुम की सड़कें बनाकर अवैध प्लाटिंग कर ली गई है।
इन इलाकों में भी चल रहा प्लाटिंग का खेल जेवरा से दुर्ग तक शिवनाथ तक प्लाटिंग
जेवरा व सिरसाखुर्द में आईआईटी का भवन बन रहा है। आसपास आईआईटी के दूसरे भवन भी बनने हैं। इसके लिए टुकड़ों में 3 से 4 जगह सुरक्षित रखा गया है। इसे देखते हुए मास्टर प्लान में शिवनाथ के ग्रीन बेल्ट तक आवासीय घोषित किया गया है। इसका फायदा अवैध प्लाटिंग करने वाले उठा रहे हैं। अभी हालात यह है कि जेवरा से दुर्ग तक मुख्य मार्ग से शिवनाथ के तक प्लाटिंग पहुंच गया है। चिखली के आसपास पूरी कॉलोनी बस गई है।
धनोरा, उमरपोटी, उतई में सर्वाधिक प्लाटिंग
नए मास्टर प्लान में दुर्ग से लेकर उतई तक नए आवासीय क्षेत्र प्रस्तावित किए गए हैं। यहां अवैध प्लाटिंग के कारण अभी से सघन आबादी बस गई है। धनोरा, रिसाली, उमरपोटी से लेकर उतई तक एग्रीकल्चर लैंड पर कॉलोनियां तन गई हंै। अकेले उतई में ही खेतों के बीच दर्जनभर कॉलोनियां बन गई है।
अब तक केवल शहरी इलाकों में कार्रवाई
कलक्टर ने पिछले दिनों राजस्व अधिकारियों की बैठक में ऐसे अवैध प्लाटिंग के मामलों में कार्रवाई के लिए कहा था। उन्होंने अवैध प्लाटिंग के निशान व कॉलोनाइजर्स के बोर्ड देखकर लोगों की पतासाजी और कार्रवाई के लिए कहा था, लेकिन नगरीय निकायों के भीतर को छोड़कर अब तक कहीं भी कार्रवाई नहीं की गई है। दुर्ग निगम ने ऐसे 27 लोगों की पहचान कर करीब 100 एकड़ में अवैध प्लाटिंग चिन्हित किया है।
अवैध प्लाटिंग व कालोनी
निर्माण से यह नुकसान
0 योजनाबद्ध तरीके से विकास में बाधा।
0 सरकार को सुविधाएं उपलब्ध कराने में दिक्कत।
0 लैंड यूज बदलने में देरी, अवैध मकानों का निर्माण।
0 निर्माण के लिए ले-आउट स्वीकृति में खासी परेशानी।
0 खेल मैदान, कम्युनिटी हॉल आदि बनने के लिए जमीन नहीं।
0 शहर का बेतरतीब फैलाव
0 पर्याप्त चौड़ी सड़क, पीने का पानी, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था में परेशानी।
जानकारी मंगाई है
एसडीएम दुर्ग खेमलाल वर्मा ने बताया कि अवैध प्लाटिंग के मामलों को गंभीरता से लिया जा रहा है। इनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है। शहरी इलाकों में लगातार कार्रवाई हो रही है। ग्रामीण इलाकों में भी कार्रवाई की तैयारी है। इसके लिए पंचायतों के माध्यम से ऐसे मामलों की जानकारी मंगाई जा रही है। नियम के तहत इनके खिलाफ भी जल्द कार्रवाई शुरू की जाएगी।
Published on:
31 Oct 2020 10:39 am
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