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अंतरराष्ट्रीय पंडवानी गायिका पद्मविभूषण तीजन बाई की तीसरी पीढ़ी उतरी इस विधा में

दादी को तो हमेशा पंडवानी गाते सुना.. पर पहले कभी ऐसा नहीं लगा कि मैं भी गाकर देखू, पर धीरे-धीरे लगा कि जब पंडवानी से दादी ने इतना नाम कमाया तो मैं भी क्यों नहींं सीख सकता।

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अंतरराष्ट्रीय पंडवानी गायिका पद्मविभूषण तीजन बाई की तीसरी पीढ़ी उतरी इस विधा में

भिलाई@Patrika. दादी को तो हमेशा पंडवानी गाते सुना.. पर पहले कभी ऐसा नहीं लगा कि मैं भी गाकर देखू, पर धीरे-धीरे लगा कि जब पंडवानी से दादी ने इतना नाम कमाया तो मैं भी क्यों नहींं सीख सकता। पिछले साल एक दिन दादी से कहा कि मैं भी सीखूंगा.. तो उन्होंने मजाक समझा और कुछ नहीं बोली। दूसरे दिन फिर उनके पास गया तो उन्होंने मेरी रूचि जानने कुछ पंक्तियां सुनाई और कहा इसे कल सुनाना... मैं भी पूरे दिन जब समय मिलता उसे गा- कर प्रैक्टिस करने लगा और जब दूसरे दिन दादी ने पंडवानी की वह पंक्तियां सुनी तो कह उठी.. बने गाय हस बेटा, अब तोर पंडवानी के शिक्षा शुरू होगे।

उनके ही नक्शेकदम पर चलने अब उनका पोता सौरभ तैयार

यह बातें डॉ तीजन बाई के पोते सौरभ पारधी ने पत्रिका से कही। 14 वर्ष की उम्र में नन्ही तीजन ने पहली बार मंच पर ऐसी पंडवानी गाई कि हर कोई बस उन्हें देखता ही रह गया और उसके बाद फिर तीजन ने कभी मुड़कर नहीं देखा.. देश विदेश में ख्याति पाई और पद्मविभूषण पाकर छत्तीसगढ़ का भी नाम रोशन किया। @Patrika. उनके ही नक्शेकदम पर चलने अब उनका पोता सौरभ तैयार है। सौरभ बीएसपी के लोककला मंच पर रविवार को पंडवानी की पहली प्रस्तुति देगा। बारहवीं की परीक्षा दे चुका सौरभ 18 वर्ष का है और महज एक साल में ही उसने पंडवानी को अपने जीवन में उतार लिया। जिस तरह तीजन बाई ने अपने नाना को गुरु बनाया उसी तरह सौरभ ने अपनी दादी को गुरु बनाया और उन्हीं गुरु के आशीर्वाद से वह पहली बार मंच पर जाएगा।

जहां मौका मिले वहीं तैयारी
सौरभ एक साल से पंडवानी में कुछ इस तरह रम गया है कि उसे जब जहां वक्त मिलता है वह पंडवानी गाने बैठ जाता है। दादी की जैसी भाव भंगिमाएं के साथ ही कुछ अपनी स्टाइल भी उसने तैयार की है। सौरभ ने बताया कि अब तक जो सीखा उसे दिखाने का कल पहली बार मौका मिलने जा रहा है। @Patrika. उसे इस बात की खुशी ज्यादा है कि उसे पहला मंच बीएसपी के लोककला महोत्सव में मिला जहां छत्तीसगढ़ के कई महान कलाकार प्रस्तुति दे चुके हैं और उनमें से दादी तीजन भी है जब बरसों पहले इस मंच पर प्रस्तुति देने के बाद उनकी ख्याति और बढ़ी।

कर्ण वध से हुई शुरूआत
सौरभ ने बताया कि दादी ने उन्हें पंडवानी की शुरूआत अपने नाना की तरह ही की। वह एक दिन एक प्रसंग को गाकर बताती हैं और दूसरे दिन उसे सुनती हैं। कर्ण-वर्ध का प्रसंग उसने सबसे पहले सीखा। फिर शंकर-अर्जुन प्रसंग और द्रोपदी चीरहरण के साथ ही द्रोपदी स्वयंवर का प्रसंग अभी सीख रहा है। @Patrika. उसने बताया कि दादी अक्सर प्र्रोग्राम देने बाहर ज्यादा जाती है। वह रियाज करता है और जब दादी आती है तो उसकी गलतियों को बताती है।