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ऐसी होती है इंसानियत, दिव्यांग मासूम की खुशी के लिए मोबाइल बेचकर कॉलेज की लड़कियों ने खरीद लिया व्हीलचेयर

संजय की खुशी के लिए उन दोनों ने अपना मोबाइल बेचकर उनके लिए व्हीलचेयर खरीद ली।

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दुर्ग

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Dakshi Sahu

Feb 06, 2018

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भिलाई. दिव्यांग संजय कुमार निर्मलकर को व्हीलचेयर पर बैठकर मुस्कुराता देख रूचि और किरण की आंखें भर आई। क्या हुआ उनके पास उनका प्यारा मोबाइल नहीं है पर उस मोबाइल के बदले संजय की कीमती हंसी उन्हें ज्यादा अच्छी लगी। तभी तो संजय की खुशी के लिए उन दोनों ने अपना मोबाइल बेचकर उनके लिए व्हीलचेयर खरीद ली।

व्हीलचेयर खरीदी
एनएसस के कैंप में ग्राम कोकड़ी में सात दिन रहने के दौरान दिव्यांग संजय से इन छात्राओं की मुलाकात वहां के स्कूल में हुई थी। उन्हें पता चला कि बिना व्हीलचेयर के बिना वह बच्चा स्कूल भी नहीं जा पाता। गल्र्स कॉलेज दुर्ग की इन दोनों छात्राओं ने काफी कोशिश की पर जब कहीं बात नहीं बनी तो उन्होंने अपना मोबाइल बेचकर उस मासूम के लिए नई व्हीलचेयर खरीदी।

खरीदी नई व्हीलचेयर
रूचि और किरण ने भी कई जगह नई व्हीलचेयर के लिए प्रयास किया। पर कहीं से कोई मदद नहीं मिली। आखिरकर उन्होंने अपना मोबाइल बेचकर 5200 रुपए की नई व्हीलचेयर खरीदी। रूचि ने बताया कि इस बात की खबर जब कॉलेज की प्रोफेसर निसरिन हुसैन को लगी तो वे भी मदद के लिए आगे आई। सभी ने मिलकर संजय के चेहरे की हंसी लौटाई। अब संजय रोज स्कूल भी जा सकेगा और आगे पढ़ सकेगा।

थक गए परिजन भी
रूचि ने बताया कि संजय कुमार निर्मलकर 75 प्रतिशत विकलांगता के साथ वह बिना किसी सहारे के स्कूल तक नहीं जा सकता। उसकी पूरानी व्हीलचेयर पूरी तरह टूट गई थी। पिता ने नई इलेक्ट्रानिक्स व्हीलचेयर के लिए शिक्षा विभाग में अर्जी भी लगाई।

80 प्रतिशत से ज्यादा विकलांग होना जरूरी

चार महीने दौड़भाग करने के बाद उनके हाथ कुछ नहीं आया। विभाग वालों ने बताया कि विभाग की योजना में 80 प्रतिशत से ज्यादा विकलांग होना जरूरी है तभी उसे इलेक्ट्रानिक्स व्हीलचेयर मिल पाती। इधर व्हीलचेयर के नहीं होने पर संजय ने स्कूल जाना ही छोड़ दिया।