
पाटन के वेटलैंड में प्रवासी पक्षी बार हेडेड गूस
पाटन के बेलौदी, चीचा, अचानकपुर और सांतरा में प्राकृतिक रूप से सुरम्य, हरियाली से भरपूर और जलीय क्षेत्र के रूप में बड़ा वेटलैंड है। इस कारण यह प्रवासी पक्षियों के लिए बेहद अनुकूल क्षेत्र है। वेटलैंड में प्रवासी पक्षियों के लिए प्रचूर भोजन होता है। इसके अलावा यह इलाका सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद अनुकूल है। इसलिए क्षेत्र में लगातार प्रवासी पक्षियों की संख्या बढ़ती जा रही है। वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर राजू वर्मा बताते हैं कि यहां पर अलग-अलग मौसम में कैस्पियन सागर, तिब्बत और साइबेरिया से प्रवासी पक्षी आते हैं। कुछ पक्षी सीजन तक यहीं बसेरा बना लेते हैं और कुछ अच्छी खुराक लेकर आगे बढ़ जाते हैं। उन्होंने बताया कि यह प्रवासी पक्षियों के पैसेज का महत्वपूर्ण पड़ाव है। उनका कहना है कि यहां की आबोहवा प्रवासी पक्षियों की लंबी हवाई यात्रा के बाद विश्राम के लिए अनुकूल है।
इन प्रवासी पक्षियों की होती है आमद
बार हेडेड गूस, ब्लैक हेडेड आइबिस, ब्लैक विंग काइट, कॉमन क्रेस्टल, करमोरेंट, गोल्डन प्लोवर, ग्रीन सेंड पाइपर, हुदहुद, लिटिल रिंग प्लावर,नॉर्थन पिनटेल,पेंटेड स्टोर्क, रेड नेपड आइबिस, रेड क्रेस्टेड पोचार्ड, बुलबुल, स्पून बिल स्टोर्क, शार्ट टोड स्नैक ईगल, वाइट ऑय बजार्ड, वूली नेकेड स्टोर्क, ब्लैक विंग स्टिल्ट, कॉटन पिग्मी गूस, गार्गने, लिटिल इग्रेट, ग्रेट इग्रेट, ओपन बिल स्टोर्क, सिकरा, मार्श हैरियर, बूटेड ईगल, ग्रेटर स्पॉटेड ईगल, ऑसप्रे, स्पॉटेड आउल, बर्न आउल, येल्लो ऑय बाबलर आदि प्रवासी पक्षियां यहां पहुंचती है।
बर्ड सेंचूरी के प्रोजेक्ट पर भी काम
पाटन के बेलौदी साइट में प्रवासी पक्षियों के अलावा भारतीय जलीय पक्षियों की भी बड़ी संख्या मौजूदगी रहती है। वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पास उन्होंने बेलौदी में माइग्रेटरी बड्र्स के कर्जवेशन की संभावनाओं के बारे में प्रस्ताव रखा था। इस पर बर्ड सेंचुरी बनाने की घोषणा की गई थी। इस पर काम भी चल रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले तीन चार सालों में इन वेटलैंड्स में बतख प्रजाति के प्रवासी पक्षियों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।
Updated on:
21 Nov 2023, 5:37 PM IST
Published on:
21 Nov 2023, 5:33 PM IST
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