
चौंकिए मत, अब दुर्ग जिले के गांवों में मितानिन बताएंगी पानी पीने लायक है या नहीं, कैसे यहां पढि़ए
दुर्ग . जिले में 3 गांवों में डायरिया फैलने के बाद अब पंचायतों में ही पानी की जांच की व्यवस्था की जा रही है। इन गांवों में डायरिया से करीब 125 लोग प्रभावित हुए थे। स्थानीय जल स्रोतों के दूषित पानी के कारण यह हालात बने थे। इसे देखते हुए अब ऐसी स्थिति से बचने पंचायतों में ही पानी की जांच की व्यवस्था कराई जा रही है। इसके लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव व मितानिनों की पानी जांचने की किट के साथ ट्रेनिंग दी जाएगी।
जांच की अब तक यह व्यवस्था
पानी की जांच के लिए जिला मुख्यालय में पीएचई का लैब है। यहां शिकायत होने पर अथवा सैम्पल लेकर आने पर जांच की सुविधा है। इसके अलावा पीएचई के मैदानी कर्मचारी भी किट के माध्यम से जांच करते रहे हैं। ग्रामीण स्तर पर तात्कालिक जांच की कोई सुविधा नहीं है।
जिला मुख्यालय से 7 किमी दूर हनोदा में 5 मई को डायरिया फैला था। एक ही दिन में यहां 54 मरीज सामने आए थे। जिनका जिला अस्पताल और स्थानीय कैम्प में इलाज किया गया। जांच में 10 जलस्रोत दूषित मिला। यहां डॉक्टरों को 4 दिन कैम्प लगाकर लोगों का इलाज करना पड़ा।
हनोदा के बाद इससे लगे चंदखुरी ग्राम में भी डायरिया फैल गया। 6 व 7 मई को यहां करीब १६ मरीज सामने आए। इन्हें स्थानीय निजी अस्पताल में भर्ती कर इलाज कराया गया। यहां भी जांच में बीमारी का कारण दूषित जलस्रोत पाया गया। दुर्ग नगर निगम द्वारा भी हर दिन 8 से 10 सेम्पल लेकर पीएचई के लैब में जांच कराया जा रहा है। पीएचई के ईई समीर शर्मा ने बताया कि जांच में अब तक किसी भी सैम्पल में खराबी नहीं पाया गया है।
यह होगा नई व्यवस्था में
ग्रामीण क्षेत्र में भी अब तक जिनके सैम्पल जांच किए गए हैं, उनमें प्रदूषण की स्थिति नहीं पाई गई है। पीएचई द्वारा प्रत्येक ग्राम पंचायत को पानी जांच के लिए एक आधुनिक किट दिया जाएगा। किट में पानी में हानिकारक तत्वों व बैक्टीरियां की जांच के सभी उपकरण व केमिकल होंगे। सरपंच,सचिव व मितानिनों को किट के उपयोग व पानी जांच की ट्रेनिंग दी जाएगी। इन पर जल स्रोतों से पानी का सैम्पल लेकर नियमित जांच की जिम्मेदारी होगी।
नई व्यवस्था से यह होगा फायदा
अब तक डायरिया अथवा दूसरी बीमारियों के लक्षण सामने आने के बाद ही पानी दूषित होने का पता चलता था और इसके बाद जांच कराई जाती थी। स्थानीय स्तर पर नियमित जांच की सुविधा होने से खतरे का तुरंत पता चलेगा। इसके साथ ही बचाव के उपाय तत्काल किए जा सकेंगे।
पानी की जांच पारदर्शिता से हो पाएगी। प्रत्येक ग्राम पंचायत में स्थानीय लोगों की मौजूदगी में पानी की जांच की जाएगी। इसकी जांच के हिसाब से रिपोर्ट भी तैयार की जाएगी। जिला स्तर पर हर तीन महीनें में रिपोर्ट एकजाई की जाएगी। इस रिपोर्ट का आंकलन कर पानी की स्थिति का पता लगाया जाएगा।
आलबरस में 66 लोगों हुआ इलाज
11 मई को आलबरस में भी डायरिया फैला। यहां सरपंच के निजी कुएं का प्रदूषित पानी पीने के कारण एक रात में 54 लोगों को इलाज के लिए निकुम अस्पताल और कैम्प में भर्ती कराना पड़ा। दूसरे दिन भी यहां 11 मरीज मिले थे। इसके अलावा निकुम में भी करीब आधा दर्जन मरीज सामने आए थे।
ईई पीएचई समीर शर्मा ने बताया कि दूषित जल से बीमारियों के खतरे को देखते हुए राज्य शासन द्वारा नई व्यवस्था कराई जा रही है। इससे पानी को पीने वाले खुद जांच कर सकेंगे। इससे खतरे का तुरंत पता चल जाएगा। इसके लिए जल्द ही सरपंच, सचिव व मितानिनों को जांच किट देकर प्रशिक्षित किया जाएगा।
Published on:
28 May 2018 10:21 am
बड़ी खबरें
View Allदुर्ग
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
