
दुर्ग. चरौदा के मुख्य मार्ग पर स्थित चरोदा शिव मंदिर का निर्माण अब पूर्ण रूप लेने लगा है। विगत कुछ वर्षों से निर्माणाधीन चरौदा के शिवमंदिर मुक्तेश्वर धाम के सावन तक पूर्ण होने की उम्मीद है, बताया जा रहा है की सावन में शिव मंदिर का निर्माण पूर्ण हो जायेगा। मुक्तेश्वर शिव मंदिर पचास साल पुराना भव्य मंदिर था, जिसका जीर्णोंद्धार कर और भव्यता प्रदान की जा रही है। यहा कार्य जन सहयोग से किया जा रहा है। भक्तों का उत्साह और उनके सहयोग से मंदिर का कार्य तेजी से हो रहा है। दिव्य जीवंत प्रतिमाएं राजस्थान से यहां पहुंच गई है। मुक्तेश्वर धाम में भक्तों को शिव परिवार के साथ ही राम दरबार, कृष्ण दरबार, दक्षिणमुखी हनुमान, दुर्गा माता जी, एकादशी माता, संतोषी माता, नवग्रहों का दर्शन, 51 शक्तिपीठ, महामाया माता, 12 ज्योतिर्लिंग दर्शन के अलावा शनिदेव की भव्य मंदिर होगा।
50 वर्ष पूर्व जिस प्रकार से ग्रामवासियों द्वारा उक्त धाम का निर्माण करवाया गया था। उसी श्रद्धा उमंग से मंदिर की नव निर्माण में ग्रामवासी लगे हुए हैं। तन, मन के साथ ही ग्रामवासी अपनी क्षमता से बढ़कर आर्थिक सहयोग कर रहे हैं। स्थल की प्राचीन माता के कारण ही गांव वालों ने मंदिर निर्माण करने का निर्णय गांव के प्रत्येक घर से श्रमदान और निर्धारित चंदा एकत्रित कर यह विशाल मंदिर का निर्माण किया था। खुदाई से प्राप्त शिवलिंग को मुख्य मंदिर में 1973 में प्रतिस्थापित किया गया। उसी समय से यहां प्रतिवर्ष पौष पूर्णिमा छेरछेरा पुन्नी मेला तीन दिवसीय विशाल मेला लगता है। ऐसी मान्यता है कि मुक्तेश्वर भगवान भोलेनाथ के दर्शन और बावली के पवित्र जल के अर्चन करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
भारतीय प्राचीन सभ्यता का प्रतीक है यह मंदिर
यह स्थल भारतीय प्राचीन सभ्यता का प्रतीक है। वर्तमान में जहां पर यह विशाल शिव मंदिर है, पूर्व में यह टीले के रूप में था। टूटे-फूटे ईटों के टुकड़े एवं ऊपर में दो नारी मूर्ति थी, जिससे लोग महामाया के रूप में पुुजते थे। इस टीले के ठीक पूर्व की और एक गड्डा था जिसमें हमेशा पानी भरा रहता था। जहां अभी बावली है। ग्रामवासी स्थल की रहस्य को जानने किले की खुदाई 1969 में प्रारंभ कर दी। इस दौरान इट के टुकड़े टूटी फूटी मूर्तियां पत्थर के बड़े-बड़े खंभे एक चौकोर नीव परकोटा मिला। दूसरे नींव बीच में जो कि प्राचीन मुख्य मंदिर का था। टूटे भाग निकलने के बाद ग्रामीणों को अंदर शिवलिंग दबे होने का विश्वास हो गया। खुदाई जारी रही कुछ दिनों में ही शिवलिंग की प्राप्ति हुई। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि इस स्थल पर प्राचीन काल में विशाल मंदिर था। संभव है इस परिक्षेत्र को चारों धाम के नाम से जाना जाता था, जो कि कालांतर में उच्चारण चरोदा फिर चरौदा हो गया
एतिहासिक शिव मंदिर का जीर्णोंद्धार 19, 20, 21 सितंबर 2018 को पूर्ण पूजा अर्चना के साथ पूरा प्रतिमा को बाहर निकाल कर कार्य आरंभ हुआ। मंदिर जीर्णोद्धार की लागत कम से कम 3 करोड़ आंकी गई है। दानदाताओं द्वारा मंदिर निर्माण समिति को खुले हस्त से किया जा रहा है। मंदिर निर्माण हेतु शासन प्रशासन द्वारा सहयोग राशि प्रदान की गई। साथ ही गांव के छोटे बड़े किसान एवं क्षेत्र के सभी जनप्रतिनिधि और बाहर से भी भक्त श्रद्धालुओं द्वारा भी मंदिर निर्माण हेतु सहयोग आया। पूर्व संस्कृति मंत्री के विभाग से 15 लाख रुपए की राशि प्राप्त हुई है।
साथ ही पूर्व विधायक देव जी भाई पटेल द्वारा 10 लाख रुपए की राशि प्राप्त हुई। इसी बीच 15 दिसंबर 2019 को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा 21 लाख रुपए से मंदिर निर्माण हेतु घोषणा की। अभी मंदिर निर्माण में लगभग 1 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं और भविष्य में मंदिर निर्माण में लगभग 3-5 करोड़ लागत से मंदिर निर्माण होना है। ऐसा भव्य शिव मंदिर रायपुर जिला में नही है। साथ ही ग्राम चरौदा के छोटे-बड़े किसानों द्वारा भरपूर सहयोग प्राप्त हुआ।
Published on:
29 Jun 2022 03:21 pm
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