
दुर्ग. समर्थन मूल्य पर किसानों से खरीदे गए धान के सुरक्षित भंडारण के लिए संग्रहण केंद्र में परिवहन के मामले में प्रशासन का जिले के साथ दोहरा मापदंड सामने आया है। जिले के खरीदी केंद्रों में 10 लाख क्विंटल से ज्यादा धान भंडारित है। इस कारण जिले के लगभग सभी 94 केंद्रों में बफर स्टॉक व जाम की स्थिति है। इसके बाद भी अफसर जिले के केंद्रों से धान के उठाव के बजाए पड़ोसी जिला बेमेतरा के धान का जिले के संग्रहण केंद्रों में पहले परिवहन पर जोर दे रहे हैं। हालात यह है कि जिले के खरीदी केंद्रों से संग्रहण केंद्र के लिए एक दाना भी धान का उठाव नहीं हो पाया है, वहीं बेमेतरा जिले का 91 हजार क्विंटल से ज्यादा धान जिले के संग्रहण केंद्रों में पहुंचाया जा चुका है।
जिले के 94 खरीदी केंद्रों में एक दिसंबर से किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की जा रही है। खरीदी के पहले दिन से केंद्रों में धान की बंपर आवक हो रही है। हालात यह है कि अब खरीदी का आंकड़ा 14 लाख 67 हजार 861 क्विंटल से पार हो गया है। खरीदी केंद्रों में हर दिन औसत एक लाख क्विंटल से ज्यादा धान की आवक हो रही है, लेकिन इसके अनुरूप धान का उठाव नहीं हो रहा है। इसके चलते केंद्रों में धान जाम होने की स्थिति बन गई है। बता दें कि खरीदी केंद्रों के अधिकतम बफर लिमिट 5 से 10 हजार क्विंटल तक है, लेकिन कई केंद्रों में 20 से 25 हजार क्विंटल तक धान का भंडारण हो चुका है। इसके बाद भी संग्रहण केंद्रों में परिवहन पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
59 मिलर्स ने उठाए 3.90 क्विंटल
जिले के खरीदी केंद्रों से फिलहाल मिलर्स धान का उठाव कर रहे हैं। जिले के 59 मिलर्स ने अब तक 3 लाख 90 हजार क्विंटल धान का उठाव किया है। पिछले सालों की तुलना में मिलर्स द्वारा उठाव की यह बेहतर स्थिति है। वह भी तब जब उसना मिलिंग को बंद कर दिया गया है। मिलर्स द्वारा उठाव से स्थिति थोड़ी और बेहतर की जा सकती है, लेकिन संग्रहण केंद्र खोले बिना जाम से निजात संभव नहीं है।
50 फीसदी केंद्रों की हालत चिंताजनक
धान का उठाव नहीं होने से जिले के 94 में से आधे खरीदी केंद्रों में जाम की स्थिति चिंताजनक हो गई है। इनमें से कई केंद्र ऐसे हैं, जहां तौल में परेशानी होनेे लगी है, वहीं स्टेकिंग के लिए भी जगह कम पडऩे लगा है। धमधा में 35 हजार 805 क्विंटल, बीजाभाठा में 25 हजार 400 क्विंटल, फुंडा में 27 हजार 225 व कोडिय़ा में 27 हजार 127 क्विंटल धान होने से स्थिति सबसे ज्यादा खराब है।
पिछले बार के अनुभवों से नहीं लिया सबक सड़ गए 30 हजार क्विंटल धान
शासन के नियमानुसार खरीदी प्रारंभ होने के साथ ही समितियों से धान का उठाव भी किया जाना था, लेकिन पिछली बार भी धान के सुरक्षित भंडारण व परिवहन पर ध्यान नहीं दिया गया। इसके चलते खरीदी समाप्ति के बाद भी करीब तीन से चार माह तक किसानों से उपार्जित धान समितियों में ही असुरक्षित भंडारित रहे। इससे जिले के 90 में से 78 समितियों में 30 हजार 257 क्विंटल धान शार्टेज हो गए। इससे समिति 7 करोड़ 56 लाख से ज्यादा घाटे में चले गए।
खाद्य विभाग ने लिखा डीएमओ को पत्र
खरीदी केंद्रों में धान जाम होने व तौल और खरीदी प्रभावित होने की संभावना को देखते हुए खाद्य विभाग ने उठाव के लिए डीएमओ नॉन को पत्र भी लिखा है। बताया जा रहा है कि नॉन ने धान खरीदी केंद्रों से संग्रहण केंद्रों से उठाव के लिए परिवहन का ठेका भी दे दिया है, इसके बाद भी धान का उठाव नहीं होने से प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। बता दें कि बेमेतरा से सप्ताहभर पहले से ही दुर्ग के संग्रहण केंद्रों के लिए उठाव शुरू हो गया है।
प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया
सीपी दीपांकर खाद्य नियंत्रक दुर्ग ने बताया कि खरीदी केंद्रों में धान की आवक को देखते हुए डीएमओ को पत्र लिखकर संग्रहण केंद्रों को खोलने व धान का परिवहन कराने कहा गया है। मिलर्स से भी ज्यादा से ज्यादा धान उठाव का प्रयास किया जा रहा है। जवाहर वर्मा, अध्यक्ष जिला सहकारी केंद्रीय बंैक दुर्ग ने कहा कि खरीदी के अनुपात में धान के उठाव की भी व्यवस्था किया जाना चाहिए। धान के उठाव में प्रशासन की देरी का खामियाजा समितियों को उठाना पड़ता है, यह ठीक नहीं है। समितियों द्वारा भी सीधे संग्रहण केंद्रों में धान के परिवहन का नियम है, लेकिन संग्रहण केंद्र नहीं खोलने से यह भी संभव नहीं है। प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया जाएगा।
Updated on:
20 Dec 2021 01:54 pm
Published on:
20 Dec 2021 01:54 pm
