
गरीब मां ने 10 हजार में किन्नर को बेच दी छह साल की मासूम बच्ची, अनहोनी की आशंका, फिर हुआ ये सब
दुर्ग. गोदनामा (child adoption in Durg) की आड़ में छह साल की एक मासूम बच्ची को एक किन्नर (Third gender)को बेचने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यह मामला अभी पुलिस (Durg police)तक नहीं पहुंची है न किसी सक्षम अधिकारी के पास इसकी शिकायत हुई है। इसकी भनक लगने पर एसडीएम संजय अग्रवाल ने जरूर इसकी जांच कर सच्चाई का पता लगाने के आदेश दिए हैं। यह मामला तब सामने आया जब शुक्रवार को दोपहर में पैसों के लेन-देन को लेकर बातचीत हो रही थी। वहां पर कुछ लोग मौजूद थे जो बातचीत को सुन रहे थे।
बच्ची को कथित गोद (Child ad) लेने वाली ने जब बच्ची को जबरिया ले जाने का प्रयास किया तो बच्ची विरोध करने लगी और रोने लगी। इस पर वहां भीड़ जुट गई। मासूम को पहचानने वाले लोगों को इस पर संदेह हुआ। लोगों ने पूछताछ भी की लेकिन माजरा समझ में आता इससे पहले कथित गोद लेने वाली मासूम को साथ लेकर गायब हो गई। लोगों ने जो चर्चा रही उसके मुताबिक मासूम का सौदा 10 हजार रुपए में किया गया है।
गोद लेने वाली किन्नर, इसलिए लोग सशंकित
स्थानीय लोगों का कहना है कि गोद लेने वाली कोई महिला नहीं बल्कि किन्नर थी। इसलिए भी मासूम के साथ अनहोनी की आशंका भी लोग जता रहे हैं। लोगों ने यह भी बताया कि गोद लेने वाली भी आर्थिक रूप से सक्षम नजर नहीं आ रही थी। इसलिए भी मासूम को गोदनामा में दिए जाने की बात किसी के गले नहीं उतर रही है।
मिला है कथित समझौता पत्र
इस कथित गोदनामा का एक समझौता पत्र पत्रिका को मिला है। जिसके मुताबिक गोदनामा का समझौता पत्रक 30 अगस्त को ही तैयार कराई गई। यह 100 रुपए के नॉन ज्यूडिशियल स्टॉम्प में तैयार गया गया है। जिसमें गोदनामा में बच्चे को देने वाली मां और गोद लेने वाली का नाम और पता दर्ज है। इसमें गोद देने वाली का पता केम्प-1 भिलाई और गोद लेने वाली का पता बेलौदी रोड उरला अटल आवास लिखा गया है। समझौता पत्रमें मासूम का जन्म 6 मई 2013 बताया गया है। मां द्वारा पिता के निधन के कारण पालन पोषण में अक्षमता जाहिर करते हुए गोदनामा में दिए जाने की बात लिखी गई है।
बेचे जाने की आशंका क्योंकि सीधे गोदनामा है प्रतिबंधित
गोदनामा या दत्तकनामा के लिए विशिष्ट कानूनी प्रावधान है। व्यक्तिगत अथवा सामाजिक स्तर पर सीधे गोदनामा की प्रक्रिया पर पहले ही बंदिश लगाई जा चुकी है। शासकीय तौर पर केंद्र से मान्यता प्राप्त संस्था मातृछाया के माध्यम से ही गोदनामा का प्रावधान है।
सक्षम अधिकारी का हस्ताक्षर भी नहीं
पारिवारिक व सामाजिक तौर पर न्यायालय के माध्यम से गोदनामा की प्रक्रिया पूरी कराई जा सकती है। इसके विपरीत इस मामले में 100 रुपए के स्टॉम्प में लिखकर समझौता किया गया है। समझौता पत्रक पर गोद देने वाली और लेने वाली के अलावा किसी सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं है। स्थानीय लोगों ने बताया कि गोद देने वाली मां के साथ मासूम अक्सर तहसील कार्यालय के पास ही रहती थी। माना जा रहा है कि घर में देखभाल करने वाला कोई नहीं होने का कारण मां उसे साथ लेकर आ जाती होगी।
एसडीएम ने अधिकारियों को निर्देशित किया
लंबे समय से मासूम के यहां आने से आसपास के लोग उसे पहचानते हैं। एसडीएम दुर्ग संजय अग्रवाल ने बताया कि इस तरह के गोदनामे की जानकारी सामने आई है। संबंधित अधिकारियों को इसका पता लगाने कहा गया है। मामले की गंभीरता से जांच कराई जाएगी। संबंधित पक्षों के सामने आने के बाद ही वास्तविक स्थिति का पता चल पाएगा। सिटी कोतवाली प्रभारी आर यादव ने बताया कि ऐसे किसी मामले की जानकारी अभी नहीं है। गोदनामा अथवा किसी को जबरिया ले जाने जैसी कोई शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलेगी तो मामले की जांच कर जरूरी कार्रवाई की जाएगी।
कार्यकर्ता चाइल्ड लाइन भारती ने बताया कि इस तरह गोदनामा हो ही नहीं सकता। इस घटना की मुझे जानकारी नहीं है। ऐसे मामले का पता चलता है तो रेसक्यू कर बच्चे को सीडब्ल्यूसी को सौपा जाता है। मामले का पता कर जरूरी कार्रवाई की जाएगी। जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग किरण सिंह ने बताया कि वर्ष 2015 से इस तरह का गोदनामा अवैध है। यदि वह पालन पोषण नहीं कर सकती तो मातृछाया को सौंपना था। मातृछाया के माध्यम से गोदनामा की प्रक्रिया की जा सकती थी। मामले का पता लगाया जा रहा है।
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Published on:
31 Aug 2019 10:49 am

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