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अफ्रीकन गुलमोहर से गुलजार होंगी गांवों की सड़कें, केवीके के रोपणी में तैयार हो रहे 30 हजार पौधे

जिले की सड़कें जल्द ही गुलमोहर की पीले फूलों से गुलजार होंगी। इसके लिए जिला पंचायत द्वारा केवीके के रोपणी में अफ्रीकन पेल्टाफोरम प्रजाति के पीले फूलों वाले 30 हजार पौधे तैयार कराए जा रहे हैं। जिला प्रशासन के पौधरोपण अभियान के तहत ये पौधे सड़कों के किनारे रोपे जाएंगे।

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Streets of villages will be buzzing from African Gulmohar

सड़कें जल्द ही गुलमोहर की पीले फूलों से इस तरह गुलजार होंगी

दुर्ग.जिला पंचायत सीईओ सच्चिदानंद आलोक ने बताया कि कलेक्टर डॉ सर्वेश्वर नरेन्द्र भूरे ने प्रमुख सड़कों पर गुलमोहर के पौधे लगाने निर्देशित किया है। जिसके अंतर्गत गुलमोहर के 30 हजार पौधे केवीके में तैयार हो रहे हैं। यह गुलमोहर की पेल्टाफोरम प्रजाति के पौधे हैं। इन्हें रोपित करने ट्री गार्ड भी तैयार किए जा रहे हैं। पौधे जरूरत के मुताबिक ऊंचाई में आ जाने के बाद जिले की प्रमुख सड़कों में रोपित कर दिए जाएंगे। जिला प्रशासन की इस पहल से न केवल हरियाली का रास्ता खुलेगा अपितु सड़कें न्यूनतम निवेश के सुंदरता से गुलजार होंगी।


बंगलूरू में बहुतायत, फूलों से बिछ जाती है सड़कें
सीईओ सच्चिदानंद आलोक ने बताया कि पेल्टाफोरम प्रजाति के वृक्षों की बंगलूरू में भी बहुतायत हैं। ये पौधे तेजी से बड़े होते हैं और अप्रैल मई में फूलों से आच्छादित हो जाती है। स्थिति यह होती है कि बहुतायत में होने वाली फूलों की वजह से पेंड़ के पत्ते तक नजर नहीं आते। इससे सड़कों पर फूलों की परत बिछ जाती है।


कम निवेश में ज्यादा सुंदरता, इसलिए नाम स्ट्रीट ट्री
गुलमोहर के पेड़ के साथ यह भी खास है कि यह न्यूनतम निवेश में अधिकतम सुंदरता की गारंटी करता है। सूखे मौसम में भी इसकी उत्तरजीविता रहती है क्योंकि यह मूलत: अफ्रीकन पौधा है। मूल रूप से यह पौधा स्ट्रीट ट्री ही कहलाता है। यही वजह है कि मेडागास्कर जैसे छोटे से द्वीप से यह पूरी दुनिया में फैल गया।


पक्षियों की पहली पसंद, बनातीं हैं घोसले
गुलमोहर का पौधा पक्षियों के लिए आश्रय स्थल भी बनता है। कापर स्मिथ बार्बेट, ब्राउन हेडेड बार्बेट और मैना अपना घोंसला बनाने इसी पेड़ को चुनती हैं। फूलों की संख्या ज्यादा होने के कारण ग्रीष्म में भी इसकी सुंदरता देखते ही बनती है। इन बातों को ध्यान में रखकर गुलमोहर बढ़ावा देने का फैसला किया गया है।