बेटी की बातों को गंभीरता से नहीं लिया पिता ने, दो बच्चों की मां ने ससुराल में लगा लिया मौत को गले

बेटी की बातों को गंभीरता से नहीं लिया पिता ने, दो बच्चों की मां ने ससुराल में लगा लिया मौत को गले

Dakshi Sahu | Publish: Jul, 17 2018 10:19:06 AM (IST) Durg, Chhattisgarh, India

सिकोला भाठा मुखर्जी चौक निवासी दो बच्चों की मां रानी देवांगन (26 वर्ष) ने रविवार को दोपहर 3.30 बजे फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

दुर्ग . सिकोला भाठा मुखर्जी चौक निवासी दो बच्चों की मां रानी देवांगन (26 वर्ष) ने रविवार को दोपहर 3.30 बजे फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में सोमवार को पोस्टमार्टम कराया गया। बीरगांव (रायपुर) निवासी जम्पूराम देवांगन ने बेटी की आत्महत्या करने पर संदेह व्यक्त किया है।

साड़ी का बनाया फंदा
मोहन नगर पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक रानी देवांगन ने दोपहर घर के प्रथम मंजिल पर अपने कमरे में साड़ी को फंदा बनाकर फांसी लगाई थी। घटना का खुलासा होते ही उसे जिला अस्पताल पहुंचाया गया।

पति थलकमल ने पुलिस को बताया कि जब उसे फांसी के फंदे से उतारा गया तब उसकी सांसे चल रही थी। वह हिचकी भी ले रही थी। चिकित्सकों ने उसे केजुअल्टी में कुछ देर रखने के बाद आईसीयू में शिफ्ट कर दिया था। घंटे भर बाद मृत्यु की सूचना दी गई।

दो बच्चों की मां मृतिका
घटना के बाद शव को मॉरच्यूरी में रखकर पुलिस को सूचना दी गई। मृतक महिला की साढे तीन साल व सवा साल की बेटी है। रानी का विवाह ३ मार्च २०१४ को हुआ था। विवाह को चार साल होने के कारण मोहन नगर पुलिस ने रानी का पंचनामा मजिस्ट्रेट की उपस्थित में कराने के बाद बयान दर्ज कराया। इसके बाद पोस्टमार्टम कराया गया।

एएसआई मोहन नगर थाना बेबी नंदा ने बताया कि मामले में मर्ग कायम किया गया है। दोनों पक्ष का बयना लिया गया है। बयान के आधार पर ही हम आगे की जांच कर रहे हैं। मारच्यूरी पहुंचे मृतका के पिता जम्पूराम देवांगन ने बताया कि उसके दामाद और उसके छोटे भाई की शादी एक साथ हुई थी।

बातों को गंभीरता से नहीं लिया
दोनों भाइयों का ससुराल बीरगांव ही है। कुछ माह रहने के बाद मृतका रानी की देवरानी उमा देवांगन वापस बीरगांव आ गई। उसने बताया कि वहां रहने से कभी भी मौत हो सकती है। तब उन्होंने उमा की बातों को गंभीरता से नहीं लिया।

९ जून को उसकी बेटी विवाह सामारोह में शामिल होकर घर आई थी। दो दिन रुकने के बाद दामाद थलकमल का १५ से २० बार फोन आया। बाद में समधी रानी को लेने बीर गांव आ गए। तब उसकी बेटी जिस हाल में थी उसी स्थिति में दुर्ग आ गई। इसके बाद रानी ने वापस फोन भी नहीं किया।

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