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छत्तीसगढ़ के इस गांव की महिलाएं कीटनाशक और जैविक खाद बेचकर कमा रही लाखों रुपए, पढि़ए सफलता की कहानी

लॉकडाउन और कोरोना संकट के बीच महिलाओं ने जैविक खाद को आमदनी का जरिया बनाया है। दुर्ग जिले के गांवों में तैयार हो रहे जैविक खाद की चर्चा पूरे प्रदेश में है। (organic fertilizer sale)

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दुर्ग

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Dakshi Sahu

Jul 28, 2020

छत्तीसगढ़ के इस गांव की महिलाएं कीटनाशक और जैविक खाद बेचकर कमा रही लाखों रुपए, पढि़ए सफलता की कहानी

छत्तीसगढ़ के इस गांव की महिलाएं कीटनाशक और जैविक खाद बेचकर कमा रही लाखों रुपए, पढि़ए सफलता की कहानी

दुर्ग. लॉकडाउन और कोरोना संकट के बीच महिलाओं ने जैविक खाद को आमदनी का जरिया बनाया है। दुर्ग जिले के गांवों में तैयार हो रहे जैविक खाद की चर्चा पूरे प्रदेश में है। जिले के गौठानों में मनरेगा के तहत 1147 नाडेप, 1093 वर्मी कम्पोस्ट और 1007 अजोला टंकिया बनाई गई है। इन टंकियों में जैविक खाद बनाई जा रही है। इन गौठानों से जुड़ी महिलाओं ने वर्मी कम्पोस्ट, गोबर खाद, अजोला बेंचकर करीब 6.50 लाख रुपए कमाए हैं। वहीं सामुदायिक बाडिय़ों में ऑर्गेनिक सब्जियां उगाकर ग्रामीण महिलाएं ने अच्छी आमदनी अर्जित कर रही हैं।

नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी योजना के माध्यम से प्रदेश जैविक खेती की दिशा में आगे बढ़ रहा है। जिसमें गौठानों की भूमिका महत्वपूर्ण है। गौठानों में स्थापित वर्मी कम्पोस्ट टैंक, नाडेप टैंक, अजोला टैंक में जैविक खाद बन रही। जिसका उपयोग खेतों और बाडिय़ों में किया जा रहा है। कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी और पंचायत विभाग के समन्वय से यह कार्य हो रहा है।

ग्रामीण अंचलों में लोगों को खासकर महिलाओं को आजीविका मिल रही है। लगभग 18 महीनों की मेहनत अब नजर आने लगी है। गौठानों में निर्मित जैविक खाद से लेकर जैविक कीटनाशक भी ट्रेंड कर रहे हैं। जिले के धमधा ब्लॉक के 30 ग्राम पंचायतों और दुर्ग ब्लॉक के चंदखुरी ग्राम पंचायत में महिलाओं द्वारा जैविक कीटनाशक बनाया जा रहा है। आने वाले कुछ दिनों में पाटन ब्लॉक में भी महिलाओं को इसके लिए प्रशिक्षण देकर उत्पादन शुरू करने की योजना है।

बाजार में बिक रही जैविक खाद व कीटनाशक
महिलाओं को प्रशिक्षण के साथ उनके उत्पादों के विक्रय का भी इंतजाम किया गया है। बिहान बाजार या एनआरएलएम बाजार के माध्यम से महिलाएं अपना उत्पाद विक्रय कर रही हैं। जैविक कीटनाशक गाय का गोबर, गोमूत्र, नीम व 6 प्रकार की पत्तियों को पीसकर और डीकम्पोसर मिलाकर तैयार किया गया है। चंदखुरी के समूह द्वारा इस महीने 200 लीटर जैविक कीटनाशक उत्पादन किया गया।

20 हजार रुपए हुआ समूह को मुनाफा
समूह की अध्यक्ष संतोषी देवांगन बताती हैं कि ग्रामीणों ने खाद व कीटनाशक हाथों हाथ खरीद लिया। इससे समूह को 20 हजार रुपए की आय हुई। जब उनके समूह ने प्रशिक्षण लिया था तो उन्हें उम्मीद नहीं थी कि इतना अच्छा मुनाफा होगा। महिलाएं जैविक कीटनाशक बनाकर न सिर्फ खुद आत्मनिर्भर बन रहीं हैं बल्कि किसानों को भी मदद मिल रही है।