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छत्तीसगढ़ के इस गांव की महिलाओं ने स्वच्छता की जगाई ऐसी अलख अब गांव में कोई नहीं फेंकता खुले में कचरा

धमधा ब्लॉक के पथरिया गांव की महिलाओं ने अपने गांव को सुंदर और स्वच्छ बनाने की मुहिम शुरू की है। इसी उद्देश्य को लेकर वह गांव की गलियों में हर हफ्ते घर-घर जाकर सूखा कचरा गीला कचरा इक_ा करती हैं। अ

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दुर्ग

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Dakshi Sahu

Dec 09, 2020

छत्तीसगढ़ के इस गांव की महिलाओं ने स्वच्छता की जगाई ऐसी अलख अब गांव में कोई नहीं फेंकता खुले में कचरा

छत्तीसगढ़ के इस गांव की महिलाओं ने स्वच्छता की जगाई ऐसी अलख अब गांव में कोई नहीं फेंकता खुले में कचरा

दुर्ग. धमधा ब्लॉक के पथरिया गांव की महिलाओं ने अपने गांव को सुंदर और स्वच्छ बनाने की मुहिम शुरू की है। इसी उद्देश्य को लेकर वह गांव की गलियों में हर हफ्ते घर-घर जाकर सूखा कचरा गीला कचरा इक_ा करती हैं। अब गांव में सेग्रीगेशन शेड भी बन गया है। महिलाओं की इस लगन को देखते हुए अब गांव के लोग भी खुले में कचरा नहीं फेंकते। इस बदलाव की कर्णधार है स्वच्छता ग्राही समूह की दीदियां जो गांव-गांव में स्वच्छता की अलख जगा रही हैं। जिला पंचायत से मिली जानकारी के मुताबिक पथरिया में महात्मा गांधी नरेगा एवं स्वच्छ भारत मिशन के तहत 3 लाख 64 हजार की लागत से महिलाओं के काम करने के लिए शेड का निर्माण किया गया है। स्वच्छता ग्राही समूह की दीदियां प्लास्टिक हटाओं बीमारी भगाओ का संदेश भी दे रही हैं। ग्राम पंचायत सरपंच चंद्रिका प्रसाद ने बताया कि सेग्रीगेशन शेड निर्माण से गांव को स्वच्छ और सुंदर बनाने में काफी मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि पहले गांव वाले यहां वहां कचरा फेंक देते थे, लेकिन अब वे जागरूक होने लगे हैं घर का कचरा डस्टबिन में एकत्रित रखते हैं इसके बाद स्वच्छता ग्राही समूह की महिलाएं रिक्शा लेकर घरों से कचरा इक_ा कर लाती हैं। इस कार्य के लिए समूह को 2 हजार रुपए प्रति माह प्रोत्साहन राशि प्रदाय की जा रही है

कचरे से अतिरिक्त आमदनी का जरिया
उन्होंने बताया कि सूखा कचरा और गीला कचरा रखने के लिये अलग-अलग शेड बनाया गए हैं। गीले कचरे से खाद का निर्माण होगा वही सूखे कचरे से निकले प्लास्टिक कागज कांच की बोतलें और दूसरी सामग्रियां स्क्रेप के रूप में विक्रय की जाएंगी। इससे अतिरिक्त आमदनी का जरिया बनेगा।

वर्कशॉप में काम करने मिला सामान
स्व-सहायता समूह की सोनम गुप्ता बताती हैं कि वर्कशेड में कार्य करने हेतु सॉलिड लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट अर्थात सूखा एवं गीला अपशिष्ट प्रबंधन के तहत 02 कंटेनर युक्त रिक्शा, 02 हाथ ठेला, खाद बनाने के लिए डी कम्पोजर , इलेक्ट्रानिक वजन मशीन, एयर हार्न (भोपू), मास्क, दस्ताना, जैकेट, जूता साड़ी, फावड़ा, कुदाली, धमेला, झाडू, फस्र्टएड बाक्स आदि इत्यादि उपलब्ध कराया गया है।

खुले में कचरा फेंकने की प्रथा बंद
समूह की महिलाएं सप्ताह में 01 दिन कंटेनर युक्त रिक्शे के साथ घर-घर जाकर कचरा एकत्रीकरण का कार्य करते है। जिससे ग्राम पंचायत के सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने की प्रथा बंद हो गई है। अब तक लगभग 310 किलोग्राम कचरा एकत्रित किया जा चुका है।