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Organic farming – रासायनिक खाद की तुलना में जैविक खेती से बढ़ा प्रति एकड़ एक क्विंटल तक पैदावार

जैविक खेती (organic farming) का जमीनी असर शानदार दिख रहा है। जिन किसानों ने पूरी तरह जैविक खाद (Organic manure) से खेती की है उनकी धान की बालियां सघन रही। कुछ किसानों ने कुछ खेतों में रासायनिक खाद का भी प्रयोग किया। रासायनिक खाद (chemical fertilizers) की फसल में बालियां कम रही। गनियारी और बोरई के जैविक खाद से खेती कर रहे किसानों ने बताया कि रासायनिक खाद की तुलना में प्रति क्विंटल एक एकड़ तक उत्पादन अधिक हुआ।

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Organic farming - रासायनिक खाद की तुलना में जैविक खेती से बढ़ा प्रति एकड़ एक क्विंटल तक पैदावार

रासायनिक खाद की तुलना में जैविक खेती से बढ़ा प्रति एकड़ एक क्विंटल तक पैदावार

दुर्ग. बोरई के कृषक झबेन्द्र वैष्णव बताते हैं कि उन्होंने 17 एकड़ जमीन में से एक एकड़ में जैविक खेती किया। जिसके लिए कृषि विभाग के द्वारा छत्तीसगढ़ देवभोग सुगंधित धान मुहैया कराया गया। इस खेत में लगभग 200 किलोग्राम वर्मी कंपोस्ट का उपयोग किया है। उनका खेत धान की बालियों से खचा-खच भरा हुआ था। बीते वर्ष में एक एकड़ में 15 क्विटल धान की औसत उपज प्राप्त हुई थी। इस वर्ष उन्होंने 16 क्विटल धान का उत्पादन किया। भविष्य में पूरे 17 एकड़ खेत में जैविक खेती करने की बात उन्होंने कही।


रसायनिक खाद से गिर गई फसल
जिन खेतों में उन्होंने रसायनिक उर्वरक का उपयोग किया था उस फसल में बालियां भी कम आई हैं और रसायनिक उर्वरक के प्रभाव से फसल की ऊंचाई बहुत ज्यादा होने के कारण फसल जमीन पर गिर गई। उन्होंने बताया कि जैविक खाद के उपयोग से फसल पूर्ण स्वस्थ और रोग रहित थी। भविष्य में भी वह फाउंडेशन बीज या सी1, सी2 सर्टिफाइड बीज का ही प्रयोग करेंगे।


जैविक खाद के लिए पशुपालन
प्रगतिशील किसान डॉ. टीकम सिंह साहू ने बताया कि उनके बड़े-बुढ़े अपने समय में केवल गोबर के खाद का उपयोग किया करते थे। समय के साथ इसमें बदलाव आया और लोग रासायनिक खाद का उपयोग करने लगे। लेकिन जिन खेतों में विगत वर्षों से वो जैविक खेती कर रहे हैं, उस खेत की मिट्टी में संतुलित नमी है जो कि फसल के लिए बहुत अच्छी है। वर्तमान में उनके पास एक गाय और एक बैल है परंतु उनकी योजना है कि भविष्य में वो इनकी संख्या बढ़ाएंगे ताकि घर में ही वर्मी कम्पोस्ट खाद बना सकें।


जैविक खाद से सुधरी खेतों की सेहत
गनियारी के इंद्रजीत भरद्वाज घर में ही वर्मी कम्पोस्ट खाद तैयार करते हैं अपनी जमीन को स्वस्थ करने में लगे हुए हैं। वो अन्य किसानों को भी इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने इसकी जिम्मेदारी गौठान में कार्य कर रही सचिव मथुरा साहू को दी है। मथुरा साहू ने बताया कि शासन की योजनाओं से वर्तमान में उन्हें आसानी से केचुंआ प्राप्त हो जाते हैं जिससे विगत कई वर्षों से उनके द्वारा वर्मी कम्पोस्ट तैयार किए जा रहे हैं।


बेहतर प्रदर्शन कर रहे किसान
कृषि विभाग के उपसंचालक एसएस राजपूत ने बताया कि परंपरागत कृषि का विकास हो इसके लिए शासन एवं प्रशासन के द्वारा सकारात्मक कदम उठाये जा रहे है। जिले में खेती के लिए अपार संभावनाएं हैं। क्योंकि यहां की मिट्टी का अधिक दोहन नहीं हुआ है, इसलिए यहां के किसान वर्मी खाद, कम्पोस्ट खाद और सुपर कम्पोस्ट खाद का उपयोग कर बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।