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चैत्र नवरात्रि 2019 : कन्या भोज कराते समय इन 10 बातों का रखें ध्यान, देवी मां होंगी प्रसन्न

चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि को कन्या पूजन के जरिए व्रत का उद्यापन करें दस वर्ष तक की कन्याओं को भोजन कराने से घर में सुख-समृद्धि आएगी
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kanya bhoj

चैत्र नवरात्रि 2019 : कन्या भोज कराते समय इन 10 बातों का रखें ध्यान, देवी मां होंगी प्रसन्न

नई दिल्ली। नवरात्रि व्रत का उद्यापन कन्या पूजन के साथ किया जाता है। इससे व्रत पूर्ण माना जाता है। कन्या भोज का आयोजन अष्टमी एवं नवमी तिथि को किया जाता है। कन्या खिलाते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखने से व्रत का दोगुना फल मिल सकता है।

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1.पंडित कृष्णकांत शर्मा के अनुसार कन्या भोज में 10 साल तक की कन्याएं खिलानी चाहिए। क्योंकि हर उम्र की कन्या देवी के अलग-अलग स्वरूपों को दर्शाती हैं।

2.शास्त्रों के अनुसार दो वर्ष की कन्या को भोजन कराने से घर में सुख-समृद्धि आती है। इससे घर में हमेशा मां लक्ष्मी का वास होता है। ऐसे घरों में कभी दरिद्रता नहीं आती है।

3.नवरात्रि में तीन वर्ष की कन्या को भोजन कराने से सम्पत्ति का विस्तार होता है। ऐसी कन्या को त्रिमूर्ति का स्वरूप माना जाता है। इसलिए इनकी पूजा करने से घर में खुशहाली भी आती है।

3.नवमी वाले दिन चार साल की कन्या का पूजन करने से परिवार में कभी अशांति नहीं होती। देवी के इस स्वरूप को कल्याणी के नाम से जाना जाता है।

4.नवरात्रि में पांच वर्ष की कन्या का पूजन करने से व्यक्ति रोगमुक्त रहता है। इस आयु की कन्या को रोहिणी का स्वपरूप माना जाता है।

5.इस दिन छह साल की कन्या पूजन करने से व्यक्ति को हर कार्य में विजय प्राप्त होती है। इसके अलावा उसे राजयोग की भी प्राप्ति होती है। छह साल की कन्या को देवी कालिका का रूप माना जाता है।

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6.वहीं 7 साल की कन्या मां चंडिका का स्वरूप माना जाता है। नवरात्र पर कन्या के इस रूप में मां की आराधना करने से घर में ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

7.नवरात्रि पर 8 वर्ष की कन्या को भोजन कराने से कोर्ट-कचहरी और प्रॉपर्टी के विवाद से छुटकारा मिलता है।इस आयु की कन्याएं शाम्‍भवी कहलाती हैं।

9.नवमी वालें दिन 9 साल की कन्या का पूजन करने से शत्रुओं का नाश होता है। इससे आपके जीवन में आ रही कठिनाइयां दूर होती हैं।

10.नवरात्रि में दस साल की कन्या को भोजन कराने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। इससे उनके जीवन में आ रही कठिनाइयां दूर होती हैं। देवी मां के इस स्वरूप को सुभद्रा कहते हैं।