धोनी के साथ हुआ ऐसा कि पुलिस स्टेशन में बितानी पड़ी थी रात, ये थे उनकी जिंदगी के 10 टर्निंग प्वांइट

धोनी के साथ हुआ ऐसा कि पुलिस स्टेशन में बितानी पड़ी थी रात, ये थे उनकी जिंदगी के 10 टर्निंग प्वांइट

Soma Roy | Updated: 13 Jul 2019, 10:28:50 AM (IST) दस का दम

  • Mahendra singh dhoni : साल 2003 में खेले गए देवधर ट्रॉफी से धोनी के खेल को पहचान मिली थी
  • साल 2004 में उन्हें इंडियन क्रिकेट टीम में शामिल होने क मौका मिला था

नई दिल्ली। महेंद्र सिंह धोनी ( Mahendra Singh Dhoni ) को कप्तान कूल के नाम से भी जाना जाता है। उनके धैर्य के दम पर ही इंडिया ने कई खिताब अपने नाम किए हैं। मगर इस साल वर्ल्ड कप के सेमी फाइनल ( Semi Final )में उनके रन आउट होने और पूरे टूर्नामेंट में बेहतर प्रदर्शन न कर पाने के चलते उन पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। मगर क्या आपको पता है धोनी के लिए ऐसे हालात पहले भी बन चुके हैं। एक समय तो ऐसा भी था कि उन्हें सबसे बचने के लिए पुलिस स्टेशन ( police station )तक में रुकना पड़ा था। तो क्या है उनकी जिंदगी के 10 बड़े टर्निंग प्वाइंट आइए जानते हैं।

1.महेंद्र सिंह धोनी को इस साल खेले गए वर्ल्ड कप मुकाबले जैसे हालात पहले भी झेलने पड़े हैं। एक इंटरव्यू में धोनी ने बताया कि कैरेबियन देशों के साथ खेले गए टूर्नामेंट में टीम इंडिया के खराब प्रदर्शन के चलते उन्हें खूब खरी खोटी सुननी पड़ी थी। इतना ही नहीं देश लौटने पर लोगों की आलोचना से वे खुद को एक अपराधी जैसा महसूस कर रहे थे।

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2.धोनी के मुताबिक टूर्नामेंट में श्रीलंका और बांग्लादेश से मिली करारी हार के चलते देश वापसी पर उन्हें लोगों का सामना करने से डर लग रहा था। भीड़ के प्रहार से बचने के लिए वे अपनी टीम को लेकर पुलिस की वैन में बैठकर एयरपोर्ट से बाहर निकलें। टीम की सलामती के लिए उन्हें रात को पुलिस स्टेशन में 20 से 25 मिनट के लिए रुकना भी पड़ा था। इस घटना के बाद से ही धोनी में टीम लीडर की जिम्मेदारी निभाने का जज्बा मजबूत हुआ था।

3.क्रिकेट का एक चमकता सितारा बनने के लिए धोनी ने अपनी लाइफ में काफी संघर्ष किए हैं। वो पहले एक टिकट कलेक्टर की जॉब करते थे। सरकारी नौकरी में होने के चलते उनका परिवार खुश था। मगर धोनी नॉर्मल जिंदगी नहीं जीना चाहते थे, इसलिए उन्होंने एक दिन जॉब छोड़ने क रिस्क लिया था।

4.महेंद्र सिंह धोनी की क्रिकेट में दिलचस्पी बचपन से ही थी। तभी वो नौकरी के साथ खेलने के लिए वक्त निकाल लेते थे। उन्होंने अंडर 19 टीम का हिस्सा बनने के लिए कड़ी मेहनत की थी। मगर टीम में जगह न मिल पाने से उनके सारे दोस्त निराश हो गए थे। मगर धोनी ने हिम्मत नहीं हारी और दोगुनी मेहनत करने लगे। इतना ही नहीं उन्होंने अपने दोस्तों की हौंसालाफजाई के लिए उन्हें पार्टी भी दी थी।

5.टीम इंडिया में अपनी जगह बनाने के लिए धोनी ने पहले राज्यवार टीमों का हिस्सा बनें। उन्होंने बिहार क्रिकेट टीम से रणजी मैच खेले। इसमें उन्होंने साल 1999 में अपना डेब्यू किया था। उन्होंने अपने पहले मैच में 68 रन नाबाद बनाए थे। यहां से उन्हें पहचान मिलना शुरू हो गई थी।

6.बिहार टीम के अलावा उन्होंने झारखंड टीम से भी रणजी ट्रॉफी खेली है। इसमें उन्होंने करीब तीन अर्धशतक लगाए थे।

8.इसके बाद धोनी ने देवधर ट्रॉफी खेली। यहां उनके अच्छे प्रदर्शन के चलते बीसीसीआई की ओर से छोटे शहरों से यंग टैलेंट खोजने की पहल में उनका नाम भी सामने आया। साल 2003 में उनके झारखंड और जमशेदपुर में खेले गए उम्दा खेल की रिपोर्ट नेशनल क्रिकेट अकादमी को भेजी गई, जो धोनी के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ।

9.धोनी के बेहतर प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें टीम इंडिया ए में जगह मिली। उन्हें जिम्बाब्वे और केन्या दौरे के लिए चुना गया था। इस टूर्नामेंट में महेंद्र सिंह धोनी ने विकेट कीपिंग और बल्लेबाजी दोनों में ही शानदार परफॉर्म किया था।

10.इंडिया ए स्क्वैड में धोनी के अच्छे खेल को देखते हुए उन्हें साल 2004 में भारतीय क्रिकेट टीम में शामिल होने का मौका मिला। उन्हें बांग्लादेश टूर्नामेंट के लिए वनडे इंटरनेशनल टीम के लिए चुना गया था। हालांकि इसमें वे बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाए थे। इसके बाद उन्हें पाकिस्तान दौरे के लिए चुना गया था।

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