नोटबंदी के बाद 50 लाख लोगों ने गंवाई नौकरियां, 8 साल में दोगुनी बेरोजगारी दर

नोटबंदी के बाद 50 लाख लोगों ने गंवाई नौकरियां, 8 साल में दोगुनी बेरोजगारी दर

Saurabh Sharma | Publish: Apr, 17 2019 04:56:51 PM (IST) अर्थव्‍यवस्‍था

  • अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की सीएमआईई-सीपीडीएक्स के आंकड़ों पर आधारित रिपोर्ट में खुलासा
  • 2018 में कुल बेरोजगारी दर छह फीसदी के आस-पास, 2011 के मुकाबले दोगुना बेरोजगारी दर
  • रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, 20-24 वर्ष आयु समूह में सबसे ज्यादा बेरोजगारी

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2019 के दूसरे चरण के मतदान से एक दिन पहले बेरोजगारी को लेकर जो रिपोर्ट आई है वो बेहद ही चौंकाने वाली है। क्योंकि इस रिपोर्ट ने नोटबंदी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। बेरोजगारी को लेकर आई रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2016-2018 के बीच करीब 50 लाख लोगों ने अपनी नौकरियां गंवा दी हैं। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि नौकरियों में 'गिरावट की शुरुआत' नोटबंदी के साथ शुरू हुई। हालांकि इन रुझानों का 'कोई सीधा संबंध स्थापित नहीं किया जा सका है।' अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की यह रिपोर्ट सीएमआईई-सीपीडीएक्स के आंकड़ों पर आधारित है, जिसमें बताया गया है कि भारत के बेरोजगारों में अधिकांश युवा हैं। रिपोर्ट का शीर्षक ' स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया ' है।

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8 साल में दोगुनी बढ़ी बेरोजगारी दर
बयान के अनुसार, "सामान्य तौर पर, महिलाएं पुरुषों से ज्यादा प्रभावित हैं। उनमें बेरोजगारी दर ज्यादा है। इसके साथ ही श्रम बल भागीदारी दर भी कम है।" रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि सामान्य तौर पर बेरोजगारी 2011 के बाद धीरे-धीरे बढ़ी है। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण और सीएमआईई-सीपीडीएक्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि 2018 में कुल बेरोजगारी दर छह फीसदी के आस-पास है, जोकि 2000 से 2011 के बीच के आंकड़े से दोगुना है।

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युवा सबसे ज्यादा बेरोजगार
रिपोर्ट के अनुसार, "शहरी महिलाओं में, कार्यशील आयु आबादी में स्नातक महिलाएं 10 फीसदी हैं, जबकि इनमें 34 फीसदी बेरोजगार हैं। 20-24 वर्ष आयु समूह में सबसे ज्यादा बेरोजगारी है। रिपोर्ट के अनुसार, "शहरी पुरुषों में, उदाहरण के लिए इस आयु समूह की कार्यशील आयु आबादी में 13.5 फीसदी हैं, लेकिन इसमें 60 फीसदी आबादी बेरोजगार है।" इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि 'उच्च शैक्षणिक योग्यता वालों के बीच खुली बेरोजगारी में वृद्धि के अलावा, कम पढ़े-लिखे नौकरीपेशा लोगों ने नौकरियां गंवाई है और 2016 के बाद काम के अवसर में भी कमी आई है।'

 

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