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अमर्त्य सेन ने कहा, भारत दक्षिण एशिया का दूसरा सबसे खराब देश

अमर्त्य सेन ने कहा 20 साल पहले दक्षिण एशिया के देशों में भारत श्रीलंका के बाद दूसरा सबसे बेहतरीन देश था, वो अब दूसरा सबसे खराब देश है।

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Saurabh Sharma

Jul 09, 2018

Sen

अमर्त्य सेन ने कहा, भारत दक्षिण एशिया का दूसरा सबसे खराब देश

नर्इ दिल्ली। देश के नोबल प्राइज विनर अर्थशास्त्रीअमर्त्य सेन ने बड़ा ही चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि सरकार भारत में जरूरी एवं बुनियादी मुद्दों पर ध्यान नहीं दे रही है। देश में तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के बाद भी शिक्षा और स्वास्थ्य पर ध्यान कम दिया जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात तो ये है कि 20 साल पहले दक्षिण एशिया के देशों में भारत श्रीलंका के बाद दूसरा सबसे बेहतरीन देश था, वो अब दूसरा सबसे खराब देश है। यह बातें उन्होंने अपनी पुस्तक ‘भारत और उसके विरोधाभास’ को जारी करने दौरान कहीं।

आलोचना होना काफी जरूरी है
अमर्त्य सेन ने कहा, जब हमें भारत में कुछ अच्छी चीजों के होने पर गर्व होता है तो हमें साथ ही उन चीजों की भी आलोचना करनी चाहिए, जिनके कारण हमें शर्मिंदा होना पड़ता है। उन्होंने कहा, अगर हम स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में बात करें, तो भारत आर्थिक रूप से आगे होने के बावजूद इस क्षेत्र में बांग्लादेश से भी पीछे है, और इसका प्रमुख कारण भारत में सार्वजनिक कार्रवाई में कमी है।

इन सब की अनदेखी कर रही है सरकार
अर्थशास्त्री ने कहा कि सरकार ने असमानता एवं जाति व्यवस्था के मुद्दों की अनदेखी की हुर्इ है। अनुसूचित जनजातियों को अलग रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के समूह है जो शौचालय और मैला हाथों से साफ करते हैं। उनकी मांग एवं जरूरतों की अनदेखी की जा रही है।

शिक्षा, स्वास्थ्य पर सरकार का ध्यान कम
वहीं दूसरी आेर विकासवादी अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज के अनुसार भारत में सामाजिक असमानता दूर करने के लिए वैश्विक स्तर की शिक्षा बहुत ही जरूरी है। उन्होंने इसके लिए मोदी सरकार को आर्थिक विकास के लिए संकीर्ण रुख से बाहर निकलकर व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी। द्रेज के मुताबिक केंद्र सरकार का शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे अहम जिम्मेदारियों पर ध्यान कम है। सरकार ने अपनी जिम्मेदारियों को कारपोरेट और राज्यों के हवाले कर दिया है।

महिलाआें की हिस्सेदारी कम
आर्थिक रूप से कमजोर लोग नोटबंदी से बहुत बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। ग्रामीण मजदूरी की दर कम या ज्यादा स्थिर हो गई है। देश में महिला कार्यबल की हिस्सेदारी यहां दुनिया में सबसे कम है। द्रेज ने तेजी से आर्थिक विकास जनता के लिए पर्याप्त रोजगार और आय के अवसर पैदा करने पर बल दिया।