Donald Trump के फैसले से भारत के 1.84 लाख Professionals का सपना टूटा

  • भारत के 1.84 लाख प्रोफेशनल्स की ओर से किया गया था Visa Apply
  • इस साल America को मिले थे करीब 2.5 लाख Work Visa के Application
  • America हर साल जारी करता है दुनिया के 85 हजार लोगों को Work Visa

By: Saurabh Sharma

Updated: 23 Jun 2020, 11:46 AM IST

नई दिल्ली। अमरीकी सरकार ( American Govt ) ने एच -1 बी वीजा ( H-1B Visa ) पर पाबंदी लगाने के साथ ही भारत और दुनिया के 2.5 लाख लोगों को बड़ा झटका दिया है। खासकर भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स ( Indian IT Professionals ) को इस फैसले बड़ा सदमा लगेगा] जो इस साल अमरीका में जाकर अपना करियर शुरू करने वाले थे। अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप ( American President Donald Trump ) के अनुसार यह फैसला अमरीका में बढ़ती बेरोजगारी ( Unemployment In America ) के कारण लिया गया है। लेकिन इसके पीछे कहानी थोड़ी अलग है। जब से ट्रंप अमरीकी सत्ता में काबिज हुए हैं। तब से उन्होंने अमरीकी फस्र्ट का कैंपेन ( Trump's American First Campaign ) का नारा दिया हुआ है। ताकि अमरीकी लोगों को नौकरियों में पहली प्राथमिकता मिल सके। खास बात तो ये है कि ट्रंप की ओर से यह आदेश अमरीकी प्रेसीडेंशियल इलेक्शन ( American Presidential Election ) से कुछ ही महीने पहले आया है। आइए आपको आंकड़ों में समझाते हैं अमरीका में एच -1 बी वीजा का खेल...

इतने आए थे आवेदन
यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 1 अप्रैल, 2020 तक यूएस को लगभग 2.5 लाख एच -1 बी वर्क वीजा एप्लिकेशन प्राप्त हुए थे। अगर बात भारत की करें तो मार्च 2021 को समाप्त होने वाले चालू वित्त वर्ष के लिए भारतीयों ने कुल एच -1 बी वर्क वीजा के 1.84 लाख या 67 फीसदी आवेदन किए।

कितने और किनको मिल सकता है वीजा
अमरीकी सरकार प्रत्येक वर्ष कुल 85,000 एच -1 बी वीजा ãUè जारी कर सकती है। इसमें से 65,000 एच -1 बी वीजा अत्यधिक कुशल विदेशी श्रमिकों को जारी किए जाते हैं, जबकि बाकी 20,000 को अत्यधिक कुशल विदेशी श्रमिकों को आवंटित किया जा सकता है, जिनके पास अमेरिकी विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा या स्नातकोत्तर की डिग्री है।

Aurangabad में 87.62 रुपए पहुंचा Petrol Price, Jaipur में Diesel Price 80 रुपए के पार

तीन साल के लिए होता है वीजा
एच -1 बी वीजा आम तौर पर किसी व्यक्ति के लिए तीन साल की अवधि के लिए होता है, लेकिन कई वीजा धारक नियोक्ताओं को अपने यूएस प्रवास को बढ़ाने के लिए बदलते हैं। वीजा मानदंड की आलोचना अक्सर अपने स्थानीय कार्यबल की कीमत पर अमेरिका में सस्ते श्रम की अनुमति देने के लिए की जाती है।

काफी समय से जारी है आलोचना
जब डोनाल्ड ट्रंप की ओर से अमरीकी राष्ट्रपति का पदभार संभाला गया था तब से हीवो एच-1 बी वीजा का विरोध करते आ रहे हैं। वो आरोप लगाते आ रहे हैं कि अमरीका में मौजूद भारतीय और चीनी कंपनिया सस्ती दरों पर वर्कफोस को बुला रही हैं। जिसकी वजह से अमरीकी नागरिकों या यूं कहें कि अमरीकी प्रोफेशनल्स को काफी नुकसान हो रहा है। इसी वर्ष नवंबर में यूएस हाउस ज्यूडिशियरी कमेटी ने H-1B वीजा के दुरुपयोग से भारतीय और चीनी कंपनियों को रोकने के लिए बोली लगाई थी, जिसमें H-1B वीजा धारकों के न्यूनतम वार्षिक वेतन को 90,000 से 60,000 तक करने के लिए मतदान किया गया था। ।

वीजा निलंबन के साथ बदलाव भी
इन कार्य वीजा के निलंबन के अलावा, ट्रम्प द्वारा हस्ताक्षरित कार्यकारी आदेश ने एच -1 बी वीजा मानदंडों में व्यापक बदलाव भी किए हैं, जो कि वर्तमान में प्रचलित लॉटरी प्रणाली द्वारा तय नहीं किया जाएगा। नए मानदंड अब उच्च कुशल श्रमिकों के पक्ष में होंगे, जिन्हें उनकी संबंधित कंपनियों द्वारा उच्चतम मजदूरी का भुगतान किया जाता है।

Show More
Saurabh Sharma Desk/Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned