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फिक्की ने लगाया अनुमान चालू वित्त वर्ष में विकास दर 7.4 फीसदी रहने के आसार

फिक्की की रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2018-19 में आर्थिक विकास दर न्यूनतम 7.1 प्रतिशत और अधिकतम 7.5 प्रतिशत के बीच रह सकती है।
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Saurabh Sharma

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Updated: 14 Aug 2018, 7:21 PM IST

Ficci

फिक्की ने लगाया अनुमान चालू वित्त वर्ष में विकास दर 7.4 फीसदी रहने के आसार

नर्इ दिल्ली। उद्योग संगठन भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की) ने तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार युद्ध को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए प्रमुख चुनौती बताते हुए मंगलवार को कहा कि चालू वित्त वर्ष में आर्थिक विकास दर 7.4 प्रतिशत और पहली तिमाही में इसके 7.1 फीसदी रहने का अनुमान है। फिक्की के आर्थिक परिदृश्य सर्वेक्षण में शामिल अर्थशास्त्रियों ने ये अनुमान जताए हैं।

तीन फीसदी रह सकती है कृषि विकास दर
रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2018-19 में आर्थिक विकास दर न्यूनतम 7.1 प्रतिशत और अधिकतम 7.5 प्रतिशत के बीच रह सकती है। इसमें चालू वित्त वर्ष में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 3.0 फीसदी रहने का अनुमान जताते हुए कहा गया है कि यह न्यूनतम 2.4 प्रतिशत तथा अधिकतम 4.3 प्रतिशत रह सकती है। इसमें कहा गया है कि अनुकूल मानसून से कृषि को बल मिलेगा। जून और जुलाई महीने में मानसून के कमजोर पडऩे का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि अगस्त और सितंबर में बरसात में तेजी आने का अनुमान जताया गया है।

उद्योग और सेवा क्षेत्र में होगी बढ़ोत्तरी
फिक्की ने जुलाई 2018 में सर्वेक्षण किया था जिसमें उद्योग, बैंकिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्र के अर्थशास्त्रियों ने भाग लिया था। अर्थशास्त्रियों ने वर्ष 2018-19 में उद्योग और सेवा क्षेत्र के क्रमश: 6.9 प्रतिशत और 8.3 प्रतिशत की दर से बढऩे का अनुमान जताया है। सर्वेक्षण रिपोर्ट में चालू वित्त वर्ष की जून में समाप्त पहली तिमाही में विकास दर के 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है। चालू महीने के अंत में सरकार पहली तिमाही के आर्थिक विकास के आकंड़े जारी करेगी।

महंगार्इ हुर्इ है कम
इसमें महंगाई का उल्लेख करते हुये कहा कि ताजे आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि तेल की कीमतों में तेज वृद्धि हो रही है। हालांकि अर्थशास्त्रियों ने महंगाई के नरम रहने की उम्मीद जतायी है। इसमें थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई के चालू वित्त वर्ष में 4.8 प्रतिशत पर रहने का अनुमान लगाया गया है जो न्यूनतम 4.1 प्रतिशत और अधिकतम 5.0 प्रतिशत तक रह सकती है। इसी तरह से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित खुदरा महंगाई के भी चालू वित्त वर्ष में 4.8 प्रतिशत पर रहने की बात कही गयी है। इसमें न्यूनतम 3.0 प्रतिशत और अधिकतम 5.5 प्रतिशत तक जाने का अनुमान लगाया गया है।

चालू आैर राजकोषीय घोटे पर पड़ सकता है असर

रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष में चालू खाता घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 2.5 फीसदी रह सकता है। इसमें निर्यात में 9.8 प्रतिशत की बढोतरी होने और आयात में 14.2 फीसदी की वृद्धि का अनुमान जताया गया है। इसके अनुसार तेल की कीमतों में आयी तेजी का चालू खाता घाटा और राजकोषीय घाटा पर विपरीत असर पड़ सकता है। वैश्विक स्तर पर संरक्षणवाद के कारण बढ़े व्यापार तनाव का उल्लेख करते हुये कहा गया है कि पिछले कई महीने से चीन, मैक्सिको और कनाडा जैसे देशों से भी अमेरिकी नीतियों के विरूद्ध नीतियां बनाये हैं जो बहुत ही चिंताजनक है।

बयाज दरों में हो सकती है बढ़ोत्तरी
अधिकांश अर्थशास्त्रियों का मानना है कि व्यापार युद्ध के अधिक समय तक जारी रहने का असर भारत पर भी पड़ेगा। इसमें कहा गया है कि अमेरिका में आयातित उत्पादों पर कर बढ़ाये जाने से वहां महंगाई बढ़ी है और इससे ब्याज दरों में भी बढोतरी किये जाने की संभावना बन रही है जिसके कारण भारत सहित उभरते बाजारों से पूंजी निकासी में तेजी आ सकती है। इसमें साथ ही अमेरिका द्वारा टैरिफ दरों में बढोतरी किये जाने से भारतीय उत्पाद कम प्रतिस्पर्धी हो जायेंगे और भारत को आयातित उत्पाद के टैरिफ में वृद्धि करना पड़ सकता है।